राजनीति नहीं, सौदेबाजी: भाजपा के कई नेता मानते हैं कि कांग्रेस के लिए यह राज्य एटीएम का काम करता है
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राजनेताओं की चरित्रहीनता के हम इतने आदि हो गए हैं कि उन चीजों को बर्दाश्त करते हैं, जो कभी बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए। कर्नाटक और गोवा में पिछले कुछ दिनों से जो हो रहा है, वह राजनीति नहीं, सौदेबाजी है, लेकिन उसको हम राजनीति कहते हैं। कर्नाटक के कुछ विधायक मुंबई के एक पांच सितारा होटल में सिर्फ इसलिए कैद थे, क्योंकि उनके उन राजनेताओं के हाथों बिकने का डर था, जो रिश्वत देकर दल बदलने का काम करवाते हैं।
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राजनेताओं की चरित्रहीनता के हम इतने आदि हो गए हैं कि उन चीजों को बर्दाश्त करते हैं, जो कभी बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए। कर्नाटक और गोवा में पिछले कुछ दिनों से जो हो रहा है, वह राजनीति नहीं, सौदेबाजी है, लेकिन उसको हम राजनीति कहते हैं। कर्नाटक के कुछ विधायक मुंबई के एक पांच सितारा होटल में सिर्फ इसलिए कैद थे, क्योंकि उनके उन राजनेताओं के हाथों बिकने का डर था, जो रिश्वत देकर दल बदलने का काम करवाते हैं।
भारतीय राजनीति में दल बदलने की परंपरा पुरानी है। इस तरह की सौदेबाजी भी पुरानी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी अगर वास्तव में देश की राजनीतिक सभ्यता में नैतिकता लाना चाहती है, तो न उसे गोवा में कांग्रेस छोड़कर आने वाले विधायकों से हाथ मिलाना चाहिए था और न ही कर्नाटक में सरकार गिराने की कोशिश करनी चाहिए।
भाजपा ऐसा करने को तैयार है, तो उसको नैतिकता की बातें करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा। राजनीतिक सौदेबाजी से नैतिकता का कोई रिश्ता नहीं हो सकता, लेकिन हम मीडियावालों ने भी जैसे स्वीकार कर लिया है कि ऐसा तो होता ही है, सो हम यह तय करने में उलझे रहे हैं कि कर्नाटक की सरकार गिरेगी या नहीं। उस बात की तरफ बहुत कम ध्यान गया है कि सरकार को अस्थिर करना गलत है। नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राजनेता यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं कि रिश्वत देकर किसी विधायक को अगवा करके किसी दूसरे शहर में ले जाना गलत है!
अपने भारत महान में राजनीति जनता की सेवा का माध्यम न रहकर अगर व्यवसाय बन गई है, तो इसलिए कि हमने स्वीकार कर लिया है कि जनता की सेवा के बहाने राजनीति में सिर्फ इसलिए आते हैं लोग, क्योंकि जानते हैं कि राजनीति में आने के बाद सबसे जल्दी पैसा बनता है। कर्नाटक जैसे राज्य में इन गलत परंपराओं को समाप्त करना और भी ज्यादा जरूरी है, जहां खनन माफिया का गंभीर हस्तक्षेप है। भाजपा के कई बड़े राजनेता स्वयं मानते हैं कि कांग्रेस के लिए यह राज्य एटीएम का काम करता है।
अपने देश में ऐसा पहले भी बहुत बार हुआ है। लेकिन क्या भाजपा ने परिवर्तन लाने का वादा नहीं किया है? क्या उसने नैतिकता की बातें नहीं की हैं? अगर वह वास्तव में देश की राजनीतिक सभ्यता में परिवर्तन लाना चाहती है, तो उसको कर्नाटक और गोवा में ऐसा काम नहीं करना चाहिए।
न ही उसे पार्टी में ऐसे विधायकों को लाना चाहिए, जो खरीदे जा सकते हैं। इस तरह की गंदी आदतों को समाप्त करने के लिए ही नरेंद्र मोदी को जनता का इतना समर्थन मिला है। भाजपा अगर खुद इस तरह की गलत चीजें करने लगेगी, तो मतदाता बहुत जल्दी जान जाएंगे कि उसमें और अन्य राजनीतिक दलों में कोई फर्क नहीं है।
मोदी के ‘नए भारत’ में न तो इस तरह की गंदी राजनीति के लिए जगह होनी चाहिए और न ही ऐसे लोगों के लिए, जो राजनीति में सिर्फ पैसा बनाने आते हैं। क्या यह दिखाई नहीं दे रहा कि गोवा और कर्नाटक में नए भारत का सपना टूट रहा है?