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पड़ताल: मोदी सरकार के बेहतरीन नौ साल, अर्थव्यवस्था की तेज हुई चाल

Fri, 26 May 2023 07:17 AM IST
Ashwani Mahajan अश्विनी महाजन
Updated Fri, 26 May 2023 07:17 AM IST
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सार
नरेंद्र मोदी ने जब देश की कमान संभाली थी, तब देश की अर्थव्यवस्था 20 खरब डॉलर की थी, जो बढ़कर 37.3 खरब डॉलर की हो गई है।
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nine years of modi govt size of indian economy increases from 10th position to 5th position
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

जब भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली एनडीए सरकार ने 26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता संभाली, तो भारत का सकल घरेलू उत्पाद 20 खरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था, जो अब 37.3 खरब डॉलर है। प्रति व्यक्ति आय जो 2014 में 1,573.9 डॉलर थी, अब 2023 में 2,601 डॉलर है। रुपयों में मौजूदा कीमतों पर यह जीडीपी 2013-14 में 104.73 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 272.04 लाख करोड़ रुपये हो गई है। जीडीपी के मामले में भारत 2014 में 10वें स्थान पर था और अब यह पांचवें स्थान पर है।



माना जाता है कि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि कुशल- क्षेम की कोई गारंटी नहीं है। पिछले कुछ समय से देश में आय की असमानताओं में भी भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, वर्ष 2020-21 की कोरोना महामारी ने हालांकि सभी वर्गों को प्रभावित किया, पर उसकी सबसे ज्यादा मार मजदूरों एवं अन्य कामगारों और व्यवसायियों, खासतौर पर छोटे व्यवसायियों पर पड़ी, जिसके कारण उनकी आमदनी और कुशल-क्षेम, दोनों प्रभावित हुए। 80 करोड़ लोगों को लगातार मुफ्त अनाज, इलाज और संपूर्ण जनसंख्या को कोविड निरोधी टीका लगाने में भारत दुनिया के मुल्कों में अग्रणी रहा। ग्रामीण बेरोजगारों के लिए पहले से चल रही ‘मनरेगा’ योजना पर पिछले नौ सालों में लगभग 5.89 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।


जुलाई 2008 और जून 2009 के बीच किए गए एनएसएसओ सर्वेक्षण के 65वें दौर के अनुसार, देश में 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवार और 2.1 प्रतिशत शहरी परिवार कच्चे घरों में रहते थे, जो 3.15 करोड़ परिवारों के बराबर था। 2015 के बाद पक्के घरों के निर्माण में बड़ी प्रगति हुई है, जहां पीएम आवास योजना- ग्रामीण और शहरी के तहत सरकारी सहायता से मकान बनाने के लिए 4.1 करोड़ परिवारों (ग्रामीण क्षेत्रों में 2.85 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 1.23 करोड़) को सहायता दी गई है; और आठ साल से भी कम समय में अब तक 2.87 करोड़ घर बनाए गए हैं। इसे ग्रामीण व शहरी गरीबों के जीवन स्तर को उठाने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

वर्ष 2014-15 के दौरान 12 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क निर्माण हो रहा था, जो 2022-23 में बढ़कर  22.23 किमी प्रतिदिन हो गया है। जब हम यूपीए सरकार से तुलना करते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा सड़क निर्माण पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये खर्च होता था, जो एनडीए के दौरान बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये हो गया है। सड़कों के अलावा जलमार्ग, रेलवे का विस्तार और वंदे भारत के नाम से स्वदेशी तीव्र गाड़ियों का विस्तार हुआ है। 2014 में 74 हवाई अड्डे थे, जो अब दोगुने यानी 148 हो गए हैं।

मोदी सरकार के नौ साल भारतीय अर्थव्यवस्था और लोगों के लिए बेहतरीन माने जा सकते हैं। सदी की सबसे खराब महामारी के बावजूद इन नौ वर्षों में, भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति में भी काफी सुधार हुआ है, न केवल जीडीपी में रैंकिंग के मामले में, बल्कि अमीर और गरीब देशों के साथ सहयोग के मामले में भी। कोरोना काल में जब अमीर देश खुदगर्ज बनते जा रहे थे, तब भारत ने अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए कई देशों को दवा और वैक्सीन उपलब्ध कराई। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, रूस से तेल न खरीदने के भारी दबाव के बावजूद भारत मजबूती से खड़ा रहा।

मोदी सरकार की यात्रा बहुत सहज नहीं थी, क्योंकि इसे भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, कृषि कानूनों को लागू करने, विमुद्रीकरण, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) यानी पड़ोसी देशों के सताए गए गैर-मुस्लिम नागरिकों को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त करने के अपने फैसले के विरोध का सामना करना पड़ा था। मोदी सरकार के फैसलों के विरोध के बावजूद कोई भी प्रधानमंत्री मोदी की किसी भी दुर्भावना को साबित नहीं कर सका। इन फैसलों को लेते समय मोदी सरकार ने विपक्ष के प्रति भी अपनी पूरी संवेदनशीलता दिखाई, और मीडिया के कोप का सामना करते हुए भी सुधार करने के लिए सरकार तैयार दिखाई दी।
-लेखक स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक हैं
 

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