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Covid-19: कहीं नहीं गया सार्स कोव-2 हालांकि नया सब-वैरिएंट चिंता का कारण नहीं

Chandrakant Lahariya डॉ. चंद्रकांत लहारिया
Updated Mon, 25 Dec 2023 07:27 AM IST
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सार
वीओआई का सीधा-सा मतलब है कि प्रसारित होने वाले वायरस में कुछ विशेषताएं हैं, जिन पर स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकार को नजर रखने की जरूरत है। यह वीओआई वर्गीकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों को कोविड-19 मामले की निगरानी करने और उत्परिवर्तन का पता लगाने के लिए प्रेरित करने की खातिर दिया गया है।
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New sub-variant of Covid-19 is not a cause for concern
कोरोना का नया वैरिएंट खतरनाक नहीं। - फोटो : istock

विस्तार

करीब चार साल होने को आ गए हैं, जब कोविड-19 फैलाने वाले वायरस सार्स कोव-2 का पहला मामला चीन में मिला था। अब एक बार फिर से कोविड-19 खबरों में है। सार्स कोव-2 का एक नया सब-वैरिएंट जेएन.1 सुर्खियों में है। इस नए सब-वैरिएंट की भारत सहित कई देशों में पाए जाने की सूचना है। सरकारों ने उच्च स्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं और कई राज्यों ने मास्क लगाने सबंधी दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं। इससे कुछ चिंताएं बढ़ रही हैं। क्या हमें चिंतित होना चाहिए? लोग इस संबंध में आजकल कई तरह के सवाल पूछ रहे हैं। पहली बात तो यह है कि भले ही कोविड-19 की महामारी खत्म हो गई, लेकिन सार्स कोव-2 कहीं नहीं गया है। एक बार जब किसी भी हिस्से में वायरस फैल जाते हैं, तो फिर लंबे समय तक प्रसारित होते रहते हैं। फिर वायरस की आनुवंशिक संरचना (विशेष रूप से श्वसन वायरस की) बदलती रहती है और उन्हें नए संस्करण और सब-वैरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। चूंकि डब्ल्यूएचओ ने जेएन.1 को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) घोषित किया है, इसलिए लोग चिंतित हैं। पर यह चिंता बेवजह है।



वीओआई का सीधा-सा मतलब है कि प्रसारित होने वाले वायरस में कुछ विशेषताएं हैं, जिन पर स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकार को नजर रखने की जरूरत है। यह वीओआई वर्गीकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों को कोविड-19 मामले की निगरानी करने और उत्परिवर्तन का पता लगाने के लिए प्रेरित करने की खातिर दिया गया है। अच्छी बात यह है कि अभी तक इसका कोई सबूत नहीं मिला है कि जेएन.1 किसी गंभीर बीमारी या प्रतिरक्षा घटाने का कारण बनता है। इसलिए नागरिकों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है।


दूसरी बात, हमें याद रखना होगा कि जेएन.1 नया वायरस नहीं है, बल्कि बीए.86 का सब-वैरिएंट है, जो खुद सार्स कोव-2 वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का सब-वैरिएंट है। पिछले चार वर्षों में भारत में बच्चों सहित अधिकांश लोग अनुमानित रूप से दो से तीन बार वायरस के संपर्क में आए हैं और फिर अपने देश में अधिकांश वयस्कों को कोविड-19 टीकों के कम से कम दो खुराक मिले हैं। वर्तमान साक्ष्य इसकी पुष्टि करते हैं कि टीके और प्राकृतिक संक्रमण किसी भी सब-वैरिएंट से सुरक्षा प्रदान करना जारी रखे हुए हैं, इसलिए भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह भी वजह है कि अभी किसी को भी कोविड-19 टीकों के अतिरिक्त खुराक की आवश्यकता नहीं है।

तीसरी बात, अखबार और टीवी बताते हैं कि कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि यह वास्तविक से अधिक कृत्रिम है, क्योंकि हाल तक कोविड-19 जांच की दर बहुत कम थी और जेएन.1 की सूचना के बाद जांच बढ़ी है। इसलिए जांच बढ़ने के कारण कोविड-19 के मामले बढ़े हैं। हालांकि कुछ मौतों के लिए कोविड-19 को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, पर वे कोरोना से संबंधित नहीं है, बल्कि ऐसी मौतें उन लोगों की हुई हैं, जिन्हें अन्य बीमारियों के साथ कोविड-19 भी था। चौथी बात, इस बात की आशंका है कि आने वाले दिनों में कोविड-19 में मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, जैसा कि अप्रैल, 2023 में हुआ था, जब दैनिक मामले बढ़ गए थे। हालांकि सॉर्स कोव-2 सहित ज्यादातर प्रसारित श्वसन वायरस के संक्रमण या मामलों की वृद्धि तत्काल चिंता का विषय नहीं है।

यदि सॉर्स कोव-2 का कोई नया वैरिएंट ऑफ कंसर्न उभरता है, तो अतिरिक्त सावधानी की जरूरत हो सकती है। इसलिए छुट्टियों पर जाने की योजना रद्द करने का कोई कारण नहीं है। हां, यदि किसी को खांसी-जुकाम या फ्लू जैसी बीमारी है, तो सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें, खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को ढंकें और हाथ धोएं, भले ही सॉर्स कोव-2 या किसी अन्य प्रकार की श्वसन संबंधी बीमारी हो। कुछ शहरों में वायु प्रदूषण सॉर्स कोव-2 से भी बड़ी समस्या है। अब समय आ गया है कि हम कोविड-19 का इलाज अन्य श्वसन बीमारियों की तरह ही करें।

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