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नए कानून से देश में नया भूगोल : तब ऐसे सवाल क्यों नहीं उठाए गए?

Tue, 06 Aug 2019 01:29 AM IST
Avdhesh Kumar विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील
विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 06 Aug 2019 01:29 AM IST
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New geography in the country with the new law after removing Section 370
जम्मू-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अनेक दिनों से चल रही अटकलों को विराम देते हुए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दिए विशेष दर्जे को तुरंत समाप्त कर दिया, राज्यसभा में राज्य पुनर्गठन कानून पारित भी हो गया है। इसके साथ राज्य में लागू  35ए समेत विशेष नागरिकता के अन्य अधिकारों का खात्मा हो गया। केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 से संबंधित राजाज्ञा जारी करने के बाद संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में बराबरी से लागू होंगे।

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अनेक दिनों से चल रही अटकलों को विराम देते हुए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दिए विशेष दर्जे को तुरंत समाप्त कर दिया, राज्यसभा में राज्य पुनर्गठन कानून पारित भी हो गया है। इसके साथ राज्य में लागू  35ए समेत विशेष नागरिकता के अन्य अधिकारों का खात्मा हो गया। केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 से संबंधित राजाज्ञा जारी करने के बाद संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में बराबरी से लागू होंगे।

उसके साथ जम्मू-कश्मीर में भारतीय संसद द्वारा पारित सभी कानून और सर्वोच्च न्यायालय के सभी आदेश भी अब लागू हो सकेंगे। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश तभी बनेंगे जब राज्य पुनर्गठन विधेयक को लोकसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाय। इस कानून के लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य में पुड्डुचेरी की तर्ज पर विधानसभा होगी और उपराज्यपाल के अधीन मुख्यमंत्री रहेगा। 

वहीं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति चंडीगढ़ की तरह रहेगी, जहां विधानसभा ही नहीं होगी। अनुच्छेद 370 को समाप्त किए बगैर इसके नासूर को खत्म करने से सही अर्थों में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हो गया है। संविधान संशोधन विधेयक की प्रति पहले से सांसदों को न दिए जाने और आनन-फानन में इस कानून को पारित कराने के प्रयासों की वजह से इसे संसदीय व्यवस्था के लिए आघात बताया जा रहा है। 

वर्ष 1954 में बगैर संविधान संशोधन के जब अनुच्छेद 35ए को लागू किया गया था, तब ऐसे सवाल क्यों नहीं उठाए गए? जो लोग अनुच्छेद 370 को भारत और कश्मीर के बीच पुल बताते हैं, उन्हें संविधान में लिखे वे शब्द क्यों नहीं दिखते, जहां सबसे ऊपर ही इस कानून को अस्थायी बताया गया है? दरअसल 35ए सही अर्थों में कानून नहीं एक राजनीतिक जुगाड़ था, जिसका इस प्रकार की सामरिक और विधिक रणनीति से ही अंत किया जा सकता था। 

कश्मीर के विशेष दर्जे के खात्मे के बाद अलगाववादी शक्तियों की दुकानें अब बंद हो जाएंगी और तुष्टीकरण का अंत होगा। केंद्र शासित प्रदेश बनने से राजनेताओं के सामंती परिवारवाद का कुचक्र भी खत्म होगा। अशांति, आतंकवाद और उग्रवाद की आड़ में सरकारी खजाने की बंदरबांट और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। इस कदम के बाद कश्मीर में पाकिस्तान के हस्तक्षेप में कमी आएगी और लंबे समय में आतंकवाद पर भी लगाम लगेगी। 

पलायन करके भागे लाखों हिंदू परिवार यदि पुनर्गठित राज्य में लौट सकें तो उनके मानवाधिकारों का सम्मान होगा। महिलाओं को समान अधिकार मिलने से सामाजिक समानता बढ़ेगी। कट्टरता और अलगाववाद में कमी आने से कश्मीरियत और सूफी संस्कृति का विकास होगा। कश्मीर के पेच को सामरिक और विधिक कुशलता से हल करके अमित शाह ने गृह मंत्री के तौर पर विलक्षणता को साबित किया है। 

अनुच्छेद 370 पर नए कानून से भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किया वादा पूरा किया है, और इसको लोकतांत्रिक जवाबदेही की सफलता के तौर पर देखे जाने की जरूरत है। पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के लिए अब भारत को पाकिस्तान पर और संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर और ज्यादा जवाबी दबाव बनाने की जरूरत है।

नए कानून से देश के सभी हिस्सों के नागरिकों को बराबरी का हक मिलेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत देश के सभी लोगों का सांविधानिक अधिकार भी है। एक देश, एक टैक्स के बाद अब एक देश एक विधान को लागू करने से संविधान में दी गई राष्ट्र की भौगोलिक अवधारणा साकार हो रही है। परंतु ताकतवर केंद्र से उपजे नए भूगोल को अब सशक्त अर्थव्यवस्था और सामजिक समरसता के माध्यम से सशक्त राष्ट्र में बदलने की चुनौती, सरकार के सामने अब भी बाकी है।
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