फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Need to speed Businesses

कारोबार को गति देने की जरूरत

Mon, 15 Jun 2015 08:15 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 15 Jun 2015 08:15 PM IST
विज्ञापन
Need to speed Businesses

इन दिनों वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर विकास दर, रोजगार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निर्यात के संबंध में जो रिपोर्टें प्रकाशित हो रही हैं, उनमें कहा जा रहा है कि इन तमाम मोर्चों पर भारत की अनुकूल स्थिति है। 10 जून को विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष 2015-16 में 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है, जो चीन से अधिक होगी। वैश्विक स्टाफिंग कंपनी मैनपावर ग्रुप द्वारा नए आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार के अवसरों की दृष्टि से अगले एक वर्ष में ताइवान के बाद दूसरे क्रम पर भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक आशावान देशों में शुमार हैं। रोजगार ढूंढने वालों को श्रम बाजार की संभावना से फायदा मिलने की उम्मीद है। खासतौर से खान, निर्माण, वित्त, बीमा, आईटी और रिटेल में रोजगार के अवसरों में भारी वृद्धि होगी। जर्मनी स्थित वैश्विक सलाहकार ईवाई व शोध कंपनी डेल्फी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एफडीआई आकर्षित करने और निर्यात के मौकों को मुट्ठी में करने की दृष्टि से भारत अनुकूल स्थिति में है।

विज्ञापन


देश में रोजगार और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए दो बातों पर खास ध्यान देना होगा। एक, देश के आंतरिक बाजार को गतिशील बनाना और दूसरी, निर्यात वृद्धि के नए प्रयास करना। देश में विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की मांग कमजोर बनी हुई है। इससे अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिल पा रही। पिछले कुछ वर्षों के दौरान शहरों में मुद्रास्फीति ने वेतन कटौती का काम किया है। इसका असर गांवों में भी दिखता है। हालांकि वहां मनरेगा जैसी योजना लागू है, पर फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि न होने और वैश्विक स्तर पर नकदी फसलों की कीमत में भारी कमी ने ग्रामीणों की आय को प्रभावित किया है। चूंकि पहले से बोझ तले दबा निजी क्षेत्र निवेश करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए सरकार को नई मांग के निर्माण के लिए एक ओर उद्योग-कारोबार को प्रोत्साहन देना होगा, तो वहीं सरकारी निवेश में वृद्धि करना होगा। सड़क, आवास, बंदरगाह, विद्युत निर्माण आदि क्षेत्रों की चालू योजनाओं को शीघ्र पूरा करने का अभियान भी शुरू करना होगा।
विज्ञापन


हमें निर्यात चुनौतियों का समाधान करने के लिए भी तेजी से आगे बढ़ना होगा। वर्ष 2014-15 में निर्यात करीब 310 अरब डॉलर रहा है। जबकि निर्यात लक्ष्य 340 अरब डॉलर का निर्धारित किया गया था। पेट्रोलियम उत्पाद और कृषि जिंसों के निर्यात में भारी गिरावट आई है। मौजूदा डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत निर्यात सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015-20 के लिए बहुप्रतीक्षित विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) के तहत जो निर्यात लक्ष्य रखे गए हैं, उनकी पूर्ति आसान नहीं है। इस नीति के तहत 2020 तक वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा दो फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी पर पहुंचाने तथा वर्ष 2019-20 में देश का निर्यात करीब 900 अरब डॉलर तक करने का लक्ष्य रखा गया है। नई विदेश व्यापार नीति के तहत देश से निर्यात बढ़ाने और मेक इन इंडिया के नारे को साकार करने के लिए अब नए सार्थक प्रयास जरूरी हैं। नई मांग के निर्माण, विदेशी निवेश व निर्यात बढ़ाने के वर्तमान सकारात्मक अवसर को हाथ से न जाने देना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed