फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   narrative of poverty disease and deprivation in African Stories story of 23-year Juji from Congo inspiring

एक लड़की की कहानी: अमूमन गरीबी, बीमारियों और अभावों का वर्णन... प्रेरक है कांगो की 23 वर्षीय जूजी की दास्तान

Sat, 04 Oct 2025 06:48 AM IST
ज्योति भास्कर निकोलस क्रिस्टॉफ, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
निकोलस क्रिस्टॉफ, द न्यूयॉर्क टाइम्स। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 04 Oct 2025 06:48 AM IST
विज्ञापन
सार
अमूमन अफ्रीकी कहानियां गरीबी, बीमारियों और अभावों के बारे में होती हैं। लेकिन, कांगो में एल्बिनिज्म नामक बीमारी के साथ पैदा हुई 23 साल की जूजी की प्रेरणादायक दास्तान कुछ अलग है। पूरी दुनिया को यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए।
loader
narrative of poverty disease and deprivation in African Stories story of 23-year Juji from Congo inspiring
कांगो की युवती पूरी दुनिया के लिए बनीं प्रेरणा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

मुझे इस बात की चिंता है कि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अमेरिकी सहायता में कटौती के बारे में अफ्रीका से की गई मेरी रिपोर्टिंग से यह गलत धारणा बन सकती है कि यहां के ग्रामीण और शरणार्थी लोग असहाय हैं, जिनकी एकमात्र पहचान यही है कि वे वाशिंगटन द्वारा पैदा किए संकटों के शिकार हैं। पर यह सच नहीं है। सबसे गरीब देशों के लोग भी जरूरत पड़ने पर अक्सर अपनी ताकत दिखा जाते हैं।



वाशिंगटन के गैर-जिम्मेदार फैसलों के कारण अपने बच्चों की मौत पर वे भी हमारी तरह रोते हैं, लेकिन हम असंभव परिस्थितियों से लड़ने के उनके साहस से बहुत कुछ सीख सकते हैं। मसलन, चैंटल जूजी का ही उदाहरण ले लीजिए। जूजी का जीवन प्रेरणा का स्रोत है। करीब 23 साल पहले वह कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के एक छोटे से गांव में एल्बिनिज्म (सफेद दाग जैसी बीमारी) के साथ पैदा हुई थी। उसकी नानी उसे मार डालना चाहती थीं, यह सोचकर कि उसकी सफेद त्वचा एक अभिशाप है। सौभाग्य से, उसके माता-पिता ने उसकी रक्षा की। अपने माता-पिता की दस में से पांचवीं संतान जूजी बेहतरीन छात्रा थी, लेकिन गांव का स्कूल बेहद भयावह था। शिक्षक छात्रों को पीटते थे। बच्चों के पास कोई पाठ्यपुस्तक नहीं थी। दूसरे छात्र जूजी को उसके रंग के कारण इस डर से छूते तक नहीं थे कि कहीं उसे भी एल्बिनिज्म का संक्रमण न हो जाए। फिर जून 2014 में, एक विरोधी जातीय समूह ने उसके गांव पर हमला किया, उसका घर जला दिया और उसके माता-पिता की हत्या कर दी। उसका सबसे बड़ा भाई बाकी नौ बच्चों को सुरक्षित युगांडा ले गया, जहां उनके पास पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं था। 13 साल की उम्र में जूजी अनाथ होकर शरणार्थी बस्ती में रहती थी और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करती थी। चूंकि, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एल्बिनिज्म से पीड़ित लोगों को कभी-कभी मार दिया जाता है, ताकि उनके शरीर के अंगों का इस्तेमाल जादू-टोने के लिए किया जा सके। इसलिए 16 साल की उम्र में असुरक्षित महसूस करते हुए जूजी नैरोबी (केन्या) भाग गई।


पासपोर्ट न होने के बावजूद, वह हिम्मत करके सीमा पार चली गई और किसी ने उसे रोका तक नहीं। नैरोबी में, उसने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी से संपर्क किया, जिसने उसे अन्य अनाथों के साथ रहने की जगह दी। एल्बिनिज्म से पीड़ित लोगों के खतरे को समझते हुए एजेंसी ने उसे अमेरिका में पुनर्वास के लिए एक उम्मीदवार के रूप में सूचीबद्ध किया। उसने बताया, ‘एल्बिनिज्म के साथ पैदा होना मेरे लिए दुर्भाग्य था, लेकिन अब मेरे लिए देश छोड़ने का एक मौका था।’ इसलिए 2018 में, लगभग 17 साल की उम्र में जूजी मैसाचुसेट्स के लिए रवाना हुई। लगभग पांच साल तक नियमित स्कूल से बाहर रहने के बावजूद वह वॉर्सेस्टर, मैसाचुसेट्स में नौवीं कक्षा में दाखिल हो गई। जूजी ने अपनी कक्षाओं में पूरी लगन से पढ़ाई की और तेजी से अंग्रेजी सीख ली। कॉलेज की पढ़ाई के बाद उसने तीन साल में ए ग्रेड के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की, और फिर वेलेस्ली कॉलेज में दाखिला लिया।

वेलेस्ली में रहते हुए जूजी हिलेरी क्लिंटन और एंजेलिना जोली के मार्गदर्शन में शरणार्थी कार्यकर्ता बन गईं, संयुक्त राष्ट्र के साथ काम किया, सम्मेलनों में भाषण, टेड टॉक वगैरह दिए। चूंकि शिक्षा ने उसके जीवन को बदल दिया था, इसलिए उसने युगांडा की शरणार्थी बस्ती में लड़कियों को शिक्षित करने के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था ‘रिफ्यूजी कैन बी’ की स्थापना की, जहां वह कभी रहती थी। वह अमेरिकी नागरिक भी बन गईं और उसने अपने नौ भाई-बहनों में से आठ को भी अमेरिका बुला लिया। जूजी अब अपनी संस्था का विस्तार करने के लिए पूर्णकालिक रूप से काम कर रही हैं। हाल ही में मैंने युगांडा में उसके साथ एक दिन बिताया, जहां उसका स्वागत एक लौटी हुई नायिका के रूप में किया गया। क्लाउड रुजिंडाना नामक एक शरणार्थी ने रोते हुए मुझे बताया कि कैसे इस गर्मी में उसने अपनी पत्नी को किसी बीमारी के कारण खो दिया। अस्पताल ने उसे बताया कि अमेरिकी सहायता में कटौती के कारण उसके पास दवाइयां खत्म हो गई हैं। अब उनका ध्यान छठी कक्षा में पढ़ने वाली बेटी एस्थर पर है, जो प्राथमिक स्कूल पूरा करने वाली परिवार की पहली लड़की बनेगी। उसने जूजी से कहा, ‘तुम्हारे सहयोग की वजह से मैं उसे स्कूल भेज पा रहा हूं। उसे स्कूल बहुत पसंद है।’

मुझे नहीं मालूम कि जूजी का संगठन कितना कारगर होगा, क्योंकि यह अपेक्षाकृत नया है। लेकिन मैं जूजी की कहानी तीन कारणों से साझा कर रहा हूं। पहला, दुनिया अब शरणार्थियों से भरी पड़ी है, जिनमें से ज्यादातर अवांछित और अक्सर तिरस्कृत हैं। जूजी हमें याद दिलाती है कि कैसे वे लोग अक्सर प्रतिभा, शक्ति, महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता और लचीलेपन का प्रतीक होते हैं, जो समाजों को समृद्ध बनाते हैं। मुझे उसका काम बहुत अच्छा लगा, जब मैंने युगांडा में ग्रामीण महिलाओं की एक कतार देखी, जो अपने बच्चों को टीका दिलवाने मीलों पैदल चलकर आई थीं, ठीक उसी समय, जब रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर अमेरिका में टीकों पर संदेह जता रहे थे। युगांडा की इन महिलाओं ने टीकाकरण के अभाव में बच्चों को मरते देखा था, इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास करने का दृढ़ निश्चय किया। दूसरा, ऐसे वक्त में जब ट्रंप प्रशासन ने मानवीय सहायता में कटौती की है और इसके परिणामस्वरूप मर रहे बच्चों के प्रति घोर उदासीनता दिखाई है, जूजी एक वैकल्पिक नैतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। वाशिंगटन हाथ पर हाथ धरे बैठ सकता है, लेकिन दुनिया भर के कई आम लोग शक्ति या साधन की कमी के बावजूद अपने मूल्यों को बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं। और इसलिए जूजी अमेरिकी विदेश मंत्री से बेहतर रोल मॉडल हो सकती हैं।

तीसरा, विकासशील देशों में सबसे बड़ा अप्रयुक्त संसाधन तेल, सोना या दुर्लभ मृदा खनिज नहीं हैं; ये गांव की लड़कियां हैं, जिन्हें अक्सर स्कूल जाने से रोक दिया जाता है, बचपन में ही शादी कर दी जाती है और उनसे पानी लाने और दूसरों की देखभाल करने की अपेक्षा की जाती है। क्रूर विरोधाभास यह है कि कांगो के एक सुदूर गांव में हुए भीषण नरसंहार के कारण ही चैंटल जूजी नाम की एक अनाथ लड़की को खुद को विकसित करने का रास्ता मिला।

जूजी का उदाहरण बताता है कि अफ्रीका से केवल भयानक कहानियां ही पैदा नहीं होतीं और यह भी कि अवसर बेशक सर्वत्र उपलब्ध न हों, लेकिन प्रतिभाएं कहीं से भी पैदा हो सकती हैं, ये जगह देख कर नहीं पैदा होतीं। इन प्रतिभाओं को अगर थोड़े भी अवसर मिलें, तो ये दुनिया बदल सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed