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नारी शक्ति और नारी : मंद पड़ती राजनीतिक शुचिता और भेष बदल-बदलकर चौकड़ी भरते असुर

Tue, 27 Sep 2022 08:42 AM IST
Bimal Rai बिमल राय
Updated Tue, 27 Sep 2022 08:42 AM IST
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सार
दुर्गापूजा के लिए इस बार ममता सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है। राज्य की 43 हजार पूजा समितियों को 50 की जगह 60-60 हजार रुपये का अनुदान मिला है। इस तरह दो अरब 58 करोड़ रुपये सरकार ने उन कमेटियों को दिया है।
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Nari Shakti and Nari : Womens Power, Deteriorating political correctness and disguise asuras
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

शारदीय दुर्गापूजा शुरू हो चुकी है, जो बंगाल की एक सांस्कृतिक पहचान है। ममता सरकार ने पूजा में चार दिन की अनिवार्य छुट्टी दी है। इस बार सरकारी कर्मचारियों को 11 दिन की छुट्टी मिली है। बंगाल में अखबार भी चार दिन तक बंद रहते हैं, ताकि लोग सब कुछ भूलकर त्योहार का आनंद उठाएं। बंगाल की दुर्गापूजा को यूनेस्को ने सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। लेकिन सामाजिक और राजनीतिक बुराइयों के कारण प. बंगाल में त्योहार की खुशी बुझी-बुझी-सी है। मां दुर्गा तो बुराई का नाश करने वाली हैं। वह महिला शक्ति का प्रतीक हैं। 



हम उत्सव तो मनाते हैं, पर उनका संदेश नहीं पढ़ पाते। बुराई पर अच्छाई की जीत सिर्फ कुछ दिनों की कवायद लगती है, फिर लोग उन्हीं आसुरी प्रवृतियों में जुट जाते हैं। बंगाल का समाज नारी शक्ति के सम्मान के लिए भी जाना जाता है। सबसे ज्यादा 10 शक्तिपीठ बंगाल में हैं। सबसे प्रसिद्ध मंदिर कालीघाट शक्तिपीठ के पास ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का घर है। 


लेकिन दुखद है कि इसी बंगाल के नदिया जिले में इस साल अप्रैल में एक 14 साल की किशोरी के बलात्कार व मौत पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक संवेदनहीन बयान आया था, जिसमें उन्होंने पूछा कि क्या बलात्कार की वजह से नाबालिग लड़की की मौत हो गई? बलात्कारी उस इलाके के एक प्रभावशाली तृणमूल नेता का बेटा था। पिछली दुर्गापूजा के एक मंडप में तो ममता बनर्जी को साक्षात मां दुर्गा की प्रतिमा के रूप में पूजा गया था। 

बस एक अंतर था कि मां दुर्गा के हाथों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के नाम लिखे विज्ञापनी पर्चे थे। उनमें से एक था, लोगों को रोजगार देने वाली योजना। कुछ दिन पहले खड़गपुर में मुख्यमंत्री ममता ने बेरोजगारी दूर करने के अजीब-अजीब नुस्खे बताए थे। दुर्गापूजा में हम पवित्रता व स्वच्छता का पूरा ध्यान रखते हैं, पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक शुचिता का नामोनिशान नहीं दिखता। 

हाल ही में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने नवान्न अभियान का आह्वान किया था। लेकिन सरकार ने उत्तर बंगाल से दक्षिण बंगाल तक के रेलवे स्टेशनों पर पुलिस भेजकर भाजपा कार्यकर्ताओं को ट्रेनों पर चढ़कर कोलकाता पहुंचने ही नहीं दिया। नतीजतन लोग कम पहुंचे, फिर भी हिंसा की छिटपुट वारदातें हुईं। एक घायल पुलिसकर्मी से मिलने पहुंचे ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी और भतीजे अभिषेक बनर्जी ने पुलिस के संयम की प्रशंसा करने के साथ यह भी कह दिया कि मैं होता, तो सीधे सिर पर गोली मारता! 

दुर्गापूजा के लिए इस बार ममता सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है। राज्य की 43 हजार पूजा समितियों को 50 की जगह 60-60 हजार रुपये का अनुदान मिला है। इस तरह दो अरब 58 करोड़ रुपये सरकार ने उन कमेटियों को दिया है, जिनका बजट लाखों में होता है और जो चंदे से ही अब तक पूजा आयोजित करती रही हैं। ध्यान रहे, राज्य सरकार पर लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। 

जब वर्ष 2011 में ममता बनर्जी ने राज्य की बागडोर संभाली थी, तब राज्य पर 1.90 लाख करोड़ रुपये का ही कर्ज था। राज्य सरकार के कर्मचारियों का 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता बाकी है। राज्य में घोटालों की जांच में अब तक कई सौ करोड़ रुपये जब्त हो चुके हैं। मंत्री से लेकर संतरी तक जेल जा रहे हैं। शिक्षा घोटाले से जुड़े पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी सहित चार बड़े अधिकारी जेल में हैं। सिर्फ बंगाल ही नहीं, पूरे देश में असुर भेष बदल-बदलकर चौकड़ी भर रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 14 सितंबर को दो किशोरियों की कथित बलात्कार और हत्या के कुछ ही घंटों बाद बदायूं जिले के फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र में भी एक दलित नाबालिग किशोरी का शव जंगल से बरामद हुआ। उत्तराखंड में भाजपा नेता के बेटे के रिजॉर्ट में कार्यरत रिसेप्शनिस्ट ने देह का सौदा करने से इनकार किया, तो उसकी हत्या कर दी गई। मतलब बंगाल सहित देश के दूसरे राज्यों में भी महिषासुरी प्रवृत्तियों पर काबू नहीं पाया जा सका है। ढोल और ढाक के शोर में यह सब छिप नहीं सकता।

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