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समाज: संबंधों का नया ट्रेंड नैनोशिप... क्या आने वाले दिनों में मध्य वर्ग का युवा शादियां नहीं करेगा?

Thu, 06 Feb 2025 05:22 AM IST
दीपक कुमार शर्मा क्षमा शर्मा
क्षमा शर्मा Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 06 Feb 2025 05:22 AM IST
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सार
यह संबंध कुछ मिनट और बस एक बातचीत भर का होता है। इसमें न संबंधों को चलाने का दबाव होता है और न ही गंभीरता की गुंजाइश।
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Nanoship is new trend in relationships Will middle class youth will not get married in upcoming days
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल ही में संबंधों के बारे में एक नए शब्द पर नजर पड़ी-नैनोशिप। कुछ साल पहले भारत की सड़कों पर नैनो नाम से एक कार उतारी गई थी। सोचा गया था कि आम मध्य वर्ग, जिसके परिवार में चार सदस्य यानी कि पति-पत्नी, दो बच्चे होते हैं, उनके बीच यह कार खूब लोकप्रिय होगी। मगर ऐसा नहीं हो सका। आज यह कार कहीं-कहीं ही दिखाई पड़ती है।



इसी तरह नैनो पार्टिकल के बारे में भी सुना है। लेकिन नैनोशिप, वह भी स्त्री-पुरुष संबंधों में। आखिर यह क्या है, ढूंढने लगी। पता चला कि इसका मतलब है-जुड़ाव का बहुत छोटा समय। किसी अजनबी से कोई बातचीत, मुस्कराना। इसमें कोई उम्मीद नहीं छिपी होती। न ही ऐसी किसी बातचीत या मुस्कराहट को गंभीर संबंध में बदलने की ख्वाहिश होती है। इसे जानकर ऐसा लगा कि आखिर इसमें नया क्या है?


कई बार हम राह चलते यों ही किसी से नमस्ते करते हैं। मुस्कराकर बात करते हैं। हैलो, हाय करते हैं। इस बातचीत में किसी भी प्रकार का कोई स्वार्थ भी नहीं होता।

नैनोशिप के बारे में जो बातें प्रमुख रूप से कही जा रही हैं, वे हैं-यह संबंध कुछ मिनट और बस एक बातचीत भर का होता है। आम संबंध या डेटिंग की तरह इसमें ऐसे संबंध को चलाने का कोई दबाव भी नहीं होता। न ही इसे गंभीरता से लिया जा सकता है। यह किसी पार्टी में, किसी वाहन में, बाजार में ऐसे किसी व्यक्ति के साथ हो सकता है, जिसे आप ठीक से जानते भी नहीं। इस संबंध का महत्व भी यही है कि बस आप उस क्षण की खुशी महसूस करें।  

कहते हैं कि इसे एक डेटिंग वेबसाइट द्वारा ही चलाया गया है। इसे पढ़कर ऐसा भी लगता है कि अब युवा जैसे लंबे संबंधों से ऊब चुके हैं। वे जीवन में कुछ नया करना चाहते हैं। इसलिए उन्हें नैनोशिप के रूप में एक विकल्प दिया गया है।

आज के समय में जब न नौकरियां स्थायी हैं,  न निवास और न कोई संबंध ही। यह भी देखने में आया है  कि लोग जीवन में अब स्थायित्व की मांग भी नहीं करते। इसलिए हो सकता है कि उन्हें नैनोशिप पसंद आ जाए। बताया जा रहा है कि नैनोशिप 2025 का सबसे बड़ा डेटिंग ट्रेंड बनने जा रहा है, क्योंकि अब तक प्रचलित प्रेम और रोमांस के तरीकों में युवाओं को बहुत उलझन महसूस होती है।

वेबसाइट टिंडर का कहना है कि अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने आठ हजार अकेले लोगों का सर्वेक्षण किया था। वहां लोगों का कहना था कि छोटे से छोटा रोमांटिक संबंध भी बहुत अर्थवान हो सकता है। नैनोशिप से पहले एक और शब्द सामने आया था, जिसे सिचुएशनशिप कहते हैं। इसमें थोड़ा-बहुत कमिटमेंट मायने रखता था। मगर नैनोशिप इन सबसे जुदा है। जब टिंडर ने विदेशी अकेले लोगों से बात की थी, तो इसमें भारत के लोगों को क्यों शामिल नहीं किया था, यह सोचने की बात है। मगर भारत में भी नैनोशिप जोर पकड़ रही है। यह भी कहा जा रहा है कि अब लोग संबंधों के भार को अधिक समय तक नहीं ढोना चाहते।

समाज में चूंकि अकेलापन बढ़ता जा रहा है, इसलिए ये छोटी-छोटी बातचीत, मुस्कराहट मनुष्य को खुशियों से भर सकती है। न ही इसमें ऐसे किसी नाटक और दिखावे की जरूरत पड़ती है, जो लंबे संबंधों की जरूरत मानी जाती है। कहा जा रहा है कि जीवन में प्रेम पाने के लिए किसी लंबे संबंध के मुकाबले क्षणिक खुशी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। अरसे से एक शब्द हम सुनते आ रहे हैं-वन नाइट स्टैंड। इसके बारे में भी यही कहा जाता है कि इसमें लड़के, लड़कियां एक रात साथ बिताते हैं। फिर अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं।

लेकिन अपने देश में एक सच्चाई यह भी तो है कि विवाह भी खूब हो रहे हैं। जहां स्थायित्व की बात गुजरे जमाने की हो, वहां शादी के बारे में अब भी लड़के-लड़कियां यही कहते पाए जाते हैं कि शादी तो बस एक बार ही होती है, इसलिए वह ऐसी हो कि लोग उसे हमेशा याद रखें। इसके लिए खर्चे भी बेशुमार होते हैं। हर घटना के लिए ईवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को बुलाया जाता है। फूल से लेकर, पोशाकों, बैंडबाजों, खान-पान पर इतना खर्च किया जाता है कि कई बार युवा शादी के लिए ही इतनी भारी रकम कर्ज में लेते हैं कि दशकों तक उसे चुकाते हैं। आखिर विवाह का बाजार यों ही तो नहीं अरबों-खरबों तक जा पहुंचा है। क्या आने वाले दिनों में नैनोशिप के चलते शादियां नहीं होंगी। मध्य वर्ग के युवा नैनोशिप की ही राह पकड़ेंगे।

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