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शतरंज का मोजार्ट
हेमेन्द्र मिश्र
Updated Fri, 15 Nov 2013 08:53 PM IST
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आज से तकरीबन दो दशक पहले न्यूयॉर्क के पीसीए विश्व शतरंज चैंपियनशिप में गैरी कॉस्पारोव के सामने विश्वनाथन आनंद ने जब अपनी चालें चलीं, तब यह कहा गया कि आनंद भले ही अभी उभरते सितारे हैं, लेकिन आने वाले समय में विश्व चैंपियन बनेंगे। पांच बार विश्व चैंपियन का खिताब जीतकर आनंद ने इसे सच भी साबित किया। लेकिन आज जब वह छठी बार अपना ताज बचाने के लिए उतरे हैं, तब शायद खुद को गैरी कास्परोव की जगह पर देख रहे होंगे।
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इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि उनका प्रतिद्वंद्वी उनकी आधी उम्र का है, बल्कि वह जैसी आक्रामक चालें चलता है, उससे बड़े-बड़े धुरंधरों के माथे पर भी पसीने आ जाते हैं। 'ओल्ड स्कूल' शतरंज युग के पॉस्टर ब्यॉय (विश्वनाथन आनंद) को टक्कर देने वाला यह शख्स कोई दूसरा नहीं, दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी नॉर्वे का मैग्नस कार्लसन है, जिनकी चालें अपने जमाने के धुरंधर अनातोली कारपोव, जोस कापाब्लैंका और वसीली सिमस्लॉव की याद दिलाती हैं।
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शतरंज से कार्लसन का परिचय पिता ने करवाया। चूंकि दो साल की उम्र में ही कार्लसन कार के सभी ब्रांड्स के नाम फर्राटे से बोला करते थे और बाद में नॉर्वे के नगर निगमों और उसके प्रशासनिक केंद्रों की सूची भी उन्होंने जुबानी याद कर ली थी, इसलिए इंजीनियर पिता ने एक दिन उन्हें काले और सफेद मोहरों के बीच बिठा दिया। शुरुआती अरुचि दिखाने के बाद कार्लसन का मन इसमें ऐसा रमा कि 13 साल की उम्र में ही वह ग्रैंड मास्टर बन गए। यह उपलब्धि ही उन्हें 'शतरंज का मोजार्ट' (वाशिंगटन पोस्ट अखबार द्वारा दी गई उपाधि) बनाती है।
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फुर्सत के क्षणों में मॉडलिंग करने और फुटबॉल खेलने वाले कार्लसन की ताकत उनकी शुरुआत है। सामान्य अवधारणा से उलट वह 1डी4 (क्वीन-पॉन गेम) और 3ई4 (कींग-पॉन गेम) के साथ-साथ 1सी4 (ऊंट के आगे के प्यादे को चलना-इंग्लिश ओपनिंग) और 1एनएफ3 (घोड़े की चाल) चलना पसंद करते हैं। इसलिए कास्परोव तक इसे 'विरोधियों के लिए मुश्किल चाल' बता चुके हैं। विश्व चैंपियन का पहला खिताब कार्लसन अपने नाम कर पाते हैं या नहीं, यह बताना अभी मुश्किल है, लेकिन आज अगर विश्वनाथन आनंद से उनकी 'जंग' में 1972 के बॉबी फिशर और बोरिस स्पास्की के बहुचर्चित बाजी की झलक देखी जा रही है, तो यही उनकी जीत है।