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सुगम हो सकती है कैलाश मानसरोवर यात्रा
श्रीकांत शर्मा
Updated Tue, 22 Jul 2014 06:47 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स के छठे शिखर सम्मेलन में शिरकत कई मायनों में ऐतिहासिक रही। तमाम बैठकों के बीच जिस वार्ता ने सभी का ध्यान खींचा, वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात थी। यह मुलाकात भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों के लिए फलदायी मानी जा रही है।
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मोदी ने इस बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक और रास्ता खोलने का आग्रह किया, जिस पर चीनी राष्ट्रपति ने विचार करने का आश्वासन दिया है। भारत लंबे समय से चीन से कैलाश मानसरोवर यात्रा का अतिरिक्त रूट खोलने की मांग कर रहा है। अब तक चीन इसे यह कहकर टालता रहा है कि अतिरिक्त रूट खुलने से यात्रियों को चीन की सीमा में अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, और वहां रास्ता खस्ताहाल भी है। लेकिन मोदी-जिनपिंग मुलाकात के बाद कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए एक छोटी, सुगम और सुरक्षित अतिरिक्त राह खुलने की उम्मीदों को बल मिला है।
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फिलहाल कैलाश मानसरोवर यात्री उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर लिपुलेख दर्रे से चीनी सीमा में प्रवेश करते हैं। यह यात्रा धार्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक महत्व, भौतिक सौंदर्य और रोमांचक प्राकृतिक परिवेश के लिए प्रसिद्ध है। मानसरोवर झील समुद्र तल से 4,590 मीटर (15,600 फुट) की ऊंचाई पर स्थित है, जो विश्व में सर्वोत्तम निर्मल जल वाली झीलों में से एक है। इस क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व, बर्फ से ढकी पहाड़ियों के रास्ते, रोमांचक चढ़ाई, चुनौतीपूर्ण मौसम और खूबसूरत वादियां इस यात्रा का आकर्षण और असाधारण अनुभव है।
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विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है। यह यात्रा उत्तराखंड होकर की जाती है। यात्रियों को इस रास्ते पर दुर्गम पर्वतीय चढ़ाई, फिसलन भरे रास्ते, बर्फीली हवाओं के थपेड़े सहते हुए लगभग एक हजार किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिसमें से लगभग 700 किलोमीटर की दूरी भारतीय क्षेत्र में, जबकि 300 किलोमीटर की दूरी चीनी सीमा में पड़ती है।
चीनी राष्ट्रपति के आश्वासन से यात्रियों को सुगम और छोटे रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा करने की उम्मीदें बंधी हैं। यह अतिरिक्त मार्ग हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले से हो सकता है। यात्रियों को किन्नौर जिले के मुख्यालय रिकांग प्यू तक जाने में दो दिन लगेंगे और तीसरे दिन वे शिपकला पहुंचेंगे, जो कि चीनी सीमा के निकट किन्नौर जिले में भारत का आखिरी गांव है। शिपकला दर्रे से पवित्र मानसरोवर झील करीब 91 किलोमीटर दूर है।
इस तरह लिपुलेख दर्रे की जगह अगर यात्री हिमाचल प्रदेश के रास्ते शिपकिला दर्रे से मानसरोवर जाएं, तो उन्हें बहुत सहूलियत हो जाएगी। उम्मीद है, मोदी सरकार आने वाले समय में कूटनीतिक मोर्चे पर ऐसी ही उपलब्धियां हासिल करेगी, जिससे न सिर्फ देश का गौरव बढ़ेगा, बल्कि उसका लाभ भी आम लोगों को मिलेगा।
(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं)