फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   maternity at stake.

खतरनाक होड़ से मातृत्व दांव पर

Sun, 15 Feb 2015 12:47 AM IST
इंदिरा मितल
इंदिरा मितल Updated Sun, 15 Feb 2015 12:47 AM IST
विज्ञापन
maternity at stake.

संभावनाओं की प्रत्यंचा पर तीर-सा खिंचा आज का युवा वर्ग बीस वर्ष की आयु से ही जीवन की बेमुरव्वत चूहा दौड़ की कड़ी गिरफ्त में आ जाता है। जो अगले दस-बीस वर्षों के बाद तक उसे जकड़े रखती है। नवयुगल अपने दांपत्य जीवन को ठोस आर्थिक आधार देने की इच्छावश संतानोत्पत्ति स्थगित करने के लिए गर्भनिरोधक के कृत्रिम साधन अपनाते हैं। कई खिलाड़ी/कलाकार/नृत्यांगनाएं पूर्वनिर्धारित स्पर्धाओं/कार्यक्रमों की समय तालिका के अनुसार मासिक धर्म स्थगित करने के कृत्रिम उपाय ढूंढतीं हैं; विवाह और उसके पश्चात संतानोत्पत्ति स्थगित करती हैं।

विज्ञापन


मातृत्व के साथ-साथ मनवांछित कार्यक्षेत्र में भी आत्मतुष्टि खोजने वाली नारी भरसक निष्ठापूर्वक दोनों दायित्वों में तालमेल बिठाने का सतत प्रयास करती है। नारी व पुरुष को समान अवसर, समान अधिकार देने का दम भरने वाला समाज और कार्यक्षेत्र आज भी पुरुषप्रधान है। विश्वव्यापी 'कॉरपोरेट वर्ल्ड' की घमासान प्रतिस्पर्धा में गिनी-चुनी महिलाएं ही शिखर तक पहुंची हैं। इस 'वर्ल्ड' में अपनी पहचान प्रखर बनाने पर दृढ़प्रतिज्ञ, प्रतिभावान व महत्वाकांक्षी नारी के आगे विषम परिस्थिति यह भी हो सकती है कि या तो वह अपने कार्यक्षेत्र को प्राथमिकता दें या अपनी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’को सुने और अपने यौवन की स्फूर्ति व शक्ति के चरमोत्कर्ष पर मातृत्व का गौरव व आनंद प्राप्त करे।
विज्ञापन


महत्वाकांक्षी कॉरपोरेट एग्जक्यूटिव सफलता सोपान बिना अवरोध चढ़ते जाने की ललक में अनथक प्रयास ही नहीं करतीं, मातृत्व की परम आत्मानुभूति तक को दांव पर लगा देती हैं। जगतज्ञात है कि उनमें से कई यौवन के चरम चरण में अपने प्रजनन अंडों को चालीस-पैंतालीस की आयु तक फ्रीज करवाने की प्रणाली पर निजी तौर पर हजारों डॉलर तक खर्च करती हैं, ताकि पैंतालीस की आयु में पदोन्नति के संभावित पठार पर पहुंच कर सुविधानुसार गर्भधारण कर सकें, और देर से ही सही, मां बनने का सुख भोग सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रजनन एग फ्रीजिंग की प्रणाली का विकास मूलतः कैंसर की युवा मरीजों के लिए किया गया था। कीमोथेरेपी द्वारा इलाज में रुग्णा नारी के प्रजनन अंडे नष्ट हो जाते हैं। रोगिणी की कीमोथेरेपी शुरू करने से पहले उसके प्रजनन अंडों को निकाल कर फ्रीज कर लिया जाता है, ताकि पूर्ण रूप से रोग मुक्त व स्वस्थ होकर अपने फ्रोजन अंडों से वह गर्भधारण कर सकें।

एपल और फेसबुक ने अपनी सर्वश्रेष्ठ महिला कर्मचारियों की प्रतिभा का अधिकतम लाभ उठाने के उद्देश्य से उनके व्यस्ततम कार्यकाल के दौरान 'फर्टिलिटी एग फ्रीजिंग' की इस आधुनिकतम प्रणाली द्वारा गर्भाधान की वांछित क्षमता स्थगित रखने के वास्ते उन्हें बीस हजार डॉलर तक की सहायता का ऐलान किया है। कई लॉ-फर्म्ज और इन्वेस्टमेंट बैंक्स भी अपनी प्रतिभावान महिला कर्मचारियों की निष्ठा जीतने के लिए इसी प्रकार का आर्थिक प्रोत्साहन देते हैं। नारी प्रतिभा और नारी शक्ति का अधिक से अधिक लाभ उठाने पर उद्यत सिटीग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी प्रमुख कंपनियां भी इस दिशा में गंभीरता से सोच रही हैं।

कॉरपोरेट वर्ल्ड में शीर्ष पदों पर महिलाओं की अल्प संख्या पर चिंतित और समान अवसर, समान अधिकार के कायल शायद इस नीति का स्वागत करें। प्रश्न यह है कि घमासान प्रतिस्पर्धा में डटे कॉरपोरेट वर्ल्ड के महारथियों ने क्या इस नई नीति के गंभीर और व्यापक सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सबसे बढ़कर नैतिक परिणामों का पूर्व-मूल्यांकन भी किया है।

नारी के प्रजनन अंडों और पुरुष के स्पर्म को उनके चरमोत्कर्ष पर फ्रीज करने के साथ-साथ क्या स्फूर्ति, नवकामना के नवोत्साह के चरमोत्कर्ष को, बालक्रीड़ा में सरलमति आनंद की अनुभूति को भी फ्रीज या बोतलबंद करना संभव है, जो शिशु के शारीरिक व मानसिक पोषण के लिए अनिवार्य हैं? नव उमंग कोई परफ्यूम तो नहीं कि जिसे जब चाहे, स्प्रे कर लिया। केवल आर्थिक या पारिवारिक कारणों से विवाह और संतानोत्पत्ति जैसे अहम निर्णयों का स्थगन अनिवार्य हो सकता है। भौतिकवादी महत्वाकांक्षा को अग्रिम रखकर मातृत्व के सुविधानुसार स्थगन के दूरगामी और व्यापक परिणाम निश्चित हैं और भारी भी पड़ सकते हैं।

सर्व धर्मशास्त्रों के अनुसार, एक सद्गृहस्थ का परम दायित्व है समाज को स्वस्थ, सुसंस्कृत, सुशिक्षित संतान से समृद्ध करना। हिंदू धर्मानुसार मानव जीवन काल का विभाजन-ब्रह्मचर्य, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थ और संन्यास-मनुष्य की आयुसुलभ क्षमता और शक्ति के सर्वथा अनुरूप माना गया है। गृहस्थाश्रम जीवन और नवजीवन की धुरी है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी बीस, पच्चीस या अधिक से अधिक तीस वर्ष तक प्रजनन के परम लक्षणयुक्त माता-पिता की संतान के स्वस्थ और मेधावी होने की सर्वाधिक संभावना होती है। अधिक आयु के साथ-साथ प्रजनन शक्ति घटने लगती है और संतान में मानसिक व शारीरिक दोष की आशंका बढ़ जाती है। हॉर्मोन की सहायता से प्रजनन अंडों की संख्या बढ़ाकर उन्हें फ्रीज करने और फ्रोजन अंडों को पुनः जागृत करने की विधि भी साहसपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग है, जिसकी शत-प्रतिशत सफलता की भी कोई गारंटी नहीं। नारी की बायोलॉजिकल क्लॉक की कुंजी केवल मां प्रकृति के पास है! इस क्लॉक के साथ एक्सपेरिमेंट के खतरे बेबुनियाद नहीं।

धर्म और संस्कृति के स्वर्ण मूल्यों में आस्थावान वर्ग की मान्यता है कि मानव शरीर ईश्वरप्रदत्त अमूल्य धरोहर है, जिसके साथ किसी भी किस्म का खिलवाड़ अनर्गल प्रयास है। आधुनिक विज्ञान का एकमात्र और परम उद्देश्य मानव जीवन का हित हो, भौतिकवाद नहीं।

फेसबुक और एपल के ही द्वारा घोषित अन्य प्रोत्साहन प्रजनन के अधिक हित में हैं। फेसबुक नवजात शिशु के माता-पिता, दोनों को चार-चार महीने का सवैतनिक अवकाश देगी। जबकि एपल द्वारा उन्हें नए लाभ दिए जाने की सूची में अधिक लंबे अवकाश का प्रावधान है।


मातृत्व धैर्य, उत्सर्ग, निष्ठा, संवेदनशीलता जैसे अनेक गुणों की खान है। कार्यक्षेत्र की चूहा दौड़ की समय तालिका के अधीन करने के बजाय शिक्षा, योग्यता और अनुभव के विवरण से दमकते 'रेज्यूमे' में मातृत्व को भी श्लाघायोग्य उपलब्धि गुण कर समस्त दुविधा का श्रेयस्कर समाधान मिल जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed