फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Maldives emerges from the past

अतीत से निकलता मालदीव

Tue, 09 Apr 2019 06:29 PM IST
Raman Singh माइक इव्स
माइक इव्स Published by: Raman Singh Updated Tue, 09 Apr 2019 06:29 PM IST
विज्ञापन
Maldives emerges from the past
इब्राहिम मोहम्मद सोलिह

मालदीव के राष्ट्रपति की अगुआई वाले राजनीतिक दल ने सप्ताहांत में हुए संसदीय चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की है। इस जीत से उन्हें रणनीतिक रूप से अहम इस देश में राजनीतिक स्वतंत्रता को बहाल करन में मदद मिल सकती है, जिसका अतीत तानाशाही से जुड़ा रहा है।


loader

राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने सितंबर में राष्ट्रपति चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। लेकिन उनकी पार्टी का कुछ एजेंडा स्थगति हो गया, क्योंकि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल उनके कुछ सहयोगी ने पूर्व कद्दावर नेता अब्दुल्ला यामीन के साथ गठजोड़ कर लिया, जिन पर व्यापक रूप से भ्रष्टाचार और दमन का आरोप लगाया गया है।

भारत के दक्षिण-पश्चिम में द्वीपों की शृंखला का देश मालदीव पारंपरिक रूप से नई दिल्ली के प्रभाव में रहा है। फिर यह समुद्री मार्गों तक फैला है, जो चीन के लिए भी महत्वपूर्ण है और बीजिंग ने हाल ही में मालदीव में आधारभूत परियोजनाओं पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। आलोचकों ने मालदीव को चीन के 'कर्ज में फंसाने की कूटनीति' के बारे में चेताया था। इसका मतलब यह है कि चीन बड़े ऋण चुकाने के रूप में सुरक्षा रियायतों की पेशकश करने का दबाव डाल सकता है। पश्चिम समेत भारत के कुछ कूटनीतिज्ञों ने मालदीव को चेताया था कि चीन पर बढ़ती निर्भरता मालदीव की संप्रभुता के लिए खतरनाक हो सकती है।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने पिछले साल सोलिह (जिन्हें चीन के प्रभाव पर संदेह रहा है) की जीत को भारत के हित में एक अच्छी खबर के रूप में देखा था। बीते रविवार को भारत के एक अंग्रेजी दैनिक में एक खबर छपी, जिसमें सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी की संसदीय चुनाव में जीत को नई दिल्ली के लिए 'पड़ोस' में एक 'सकारात्मक घटनाक्रम' बताया गया। फिर भी नई दिल्ली स्थित ब्रूकिंग्स इंडिया में विदेश नीति फेलो कोन्स्टान्टिनो जेवियर कहते हैं कि 'सस्ते और आसान पैसे के लालच ने इस आशंका को बढ़ा दिया है कि मालदीव के नेताओं द्वारा चीन के खिलाफ सार्वजनिक बयानों के बावजूद चीन के साथ मालदीव का रिश्ता और गहरा होगा।' उनका कहना है कि 'दीर्घकाल में मालदीव के किसी भी नेता की स्वाभाविक प्रवृत्ति चीन के साथ संबंधों को बढ़ाने की होगी। चीन के पास वह वित्तीय शक्ति है, जिससे वह तेजी से और प्रभावी ढंग से उसकी जरूरतों की पूर्ति कर सकता है।'

मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने देश की संसद की 87 सीटों में से दो तिहाई से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। मालदीव के 2008 में हुए पहले स्वतंत्र चुनाव के बाद से संसद में बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बनने के लिए उसे सिर्फ 44 सीटों की जरूरत थी। स्थानीय समाचार वेबसाइट द मालदीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, अन्य पार्टियों में से प्रत्येक ने सात से कम सीटें जीतीं।

मालदीव में पिछले चुनावों  के दौरान व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगा था। यामीन पर पिछले साल राष्ट्रपति के चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के कर्मचारियों को उनकी पार्टी को वोट देने के लिए मजबूर किया, निर्वाचन आयोग में अपने वफादारों की नियुक्ति की, विपक्षी पार्टी के नेताओं को जेलों में बंद कर दिया और मतदाता पंजीकरण को रद्द कर दिया।

लेकिन मालदीव के चुनाव पर निगरानी रखने वाली संस्था ट्रांसपैरेंसी मालदीव ने रविवार को एक बयान में कहा कि पिछला मतदान पारदर्शी और अच्छे ढंग से कराया गया था। सप्ताहांत पर सोलिह ने एक बयान में कहा कि देश के लोग चुनाव में 'सबसे बड़े विजेता' थे। उन्होंने कहा कि 'हमारा प्रचार अभियान मुद्दों पर आधारित था, नफरत और संकीर्ण विभाजन पर नहीं, यह हमारे युवा लोकतंत्र की जीत है। हमारी सरकार ने उन उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने में कोई बाधा नहीं डाली, जिनसे हम असहमत थे। यह हमारे लोकतंत्र की एक बड़ी जीत है।'

पिछली सर्दियों में मालदीव अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तब सुर्खियों में था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति यामीन ने आपातकाल की घोषणा करके और सर्वोच्च न्यायालय को घेरने के लिए सेना भेजकर एक राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था। ऐसा कदम उन्होंने अपने नौ विरोधियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों को निरस्त करने के बाद उठाया था।

उनमें से एक मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद थे, जो मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं और उस समय लंदन में निर्वासन में रह रहे थे। वर्ष 2018 के अंत में मालदीव लौटने वाले नाशीद सितंबर में हुए चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य थे, क्योंकि यामीन सरकार ने उन्हें जेल की सजा सुनाई थी। तब नाशीद की जगह पर सोलिह ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था।

पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान सोलिह ने वादा किया था कि अगर वह चुनाव जीत जाएंगे, तो लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को बहाल करेंगे, जिसमें मानहानि विरोधी कानून को हटाने की बात भी शामिल थी, जिसे यामीन ने अपने विरोधियों को जेल में बंद करने के हथियार के रूप में लाया था। जीतने के दो महीने बाद सोलिह ने मानहानि विरोधी कानून को निरस्त कर दिया, लेकिन सोलिह की पार्टी को हाल के महीनों में अपने एजेंडे को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, सोलिह ने एक प्रमुख पत्रकार और यामीन के आलोचक अहमद रिलवान अब्दुल्ला की 2014 में हुई गुमशुदगी की जांच का वादा किया था, लेकिन मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एक पार्टी ने फरवरी में चोरी हुई संपत्ति और अनसुलझी हत्याकांडों की जांच से संबंधित विधेयक पर मतदान करने से इनकार कर दिया।

पूर्व कद्दावर राष्ट्रपति यामीन को हाल ही में देश के पर्यटन बोर्ड में हुए एक भ्रष्टाचार कांड में जेल में डाला गया। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और संसदीय चुनाव से कुछ दिन पूर्व ही मार्च में उन्हें जमानत मिली है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed