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पारिस्थितिकी: पंजिम को 'पोंजी' ही रहने दें, नए रूप के लिए जरूरी लगता है पुराना स्वरूप

Wed, 12 Jul 2023 07:59 AM IST
Pankaj chaturvedi पंकज चतुर्वेदी
Updated Wed, 12 Jul 2023 07:59 AM IST
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सार
पणजी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जरूरी है कि यहां की नदी, मैंग्रोव और क्रीक आदि को उनके सौ साल पुराने स्वरूप में लाया जाए।
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Making Panaji smart city necessary to preserve rivers mangroves and creeks ecology
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

यदि गोवा सरकार की वेबसाइट पर भरोसा करें, तो गोवा की राजधानी पणजी की जमीन ऐसी थी कि पानी को सोख लेती थी, जिससे इसे 'पोंजी' कहा जाता था और अपभ्रंश होकर यह पणजी या पंजिम हो गया। इस बार पहली बरसात में ही पंजिम दरिया बन गया। 'वैश्विक राज्य' कहलाने वाले गोवा के लिए यह चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन की मार सबसे अधिक तटीय नगरों पर पड़नी है।



विदित हो 14 अक्तूबर, 2015 को यहां स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू हुई। इसका बजट कोई 11 सौ करोड़ रुपये है और इसकी आधी राशि खर्च हो चुकी है। यह परियोजना निर्धारित समय सीमा से बहुत पीछे है। बरसात ने बता दिया कि कार्य की या तो गुणवत्ता दोयम है या फिर यह भविष्योन्मुखी नहीं है।


पाट्टो पंजिम का सबसे उभरता और महंगा व्यावसायिक केंद्र है। यहां कई बड़े-बड़े दफ्तर हैं, बैंक के मुख्यालय, होटल और मॉल हैं। यहीं राज्य की सबसे बड़ी लाइब्रेरी गोवा स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी (जिसे अब कृष्णदास शर्मा लाइब्रेरी भी कहा जाता है) और संस्कृति केंद्र भी हैं, जिसके ठीक पीछे भारत का दूसरा मैंग्रोव बोर्डवॉक है (पहला अंडमान द्वीप समूह में है)। यह पहला वॉकवे आगंतुकों के लिए क्षेत्र की वनस्पतियों और जीवों के बारे में अधिक जानने और खोजने के लिए है। ओरेम क्रीक के ऊपर स्थित यह 1,100 वर्ग मीटर में फैला हुआ है और सभी के लिए नि:शुल्क है।  

इस इलाके का नाम पाट्टो इसलिए पड़ा, क्योंकि यह मंडोवी नदी और अरब सागर के बीच बनी एक पतली-सी नहर, जिसे कोरम क्रीक कहते हैं, के पाट अर्थात कचार का मैदान था। इस नमकीन पानी की धरा में आगे नमक बनाने की खदान भी है। स्थानीय लोग इसे 'लवण' कहते हैं, अर्थात नमकीन धरती। गोवा के मिजाज में बरसात है। यहां जून से लेकर अक्तूबर तक लगभग छह महीने पानी गिरता है। शहर के बीच से गुजरने वाला यह क्रीक, उसके किनारे का पाट और लवणीय भूमि कभी यहां बरसात की हर बूंद को अपने में जज्ब कर लेती थी। शायद तभी यह पोंजी कहलाई। कभी ये मैंग्रोव पंजिम के लिए शुद्ध हवा हेतु फेफड़े जैसे थे और जल संरक्षण के असीम भंडार।

स्मार्ट सिटी के लिए सबसे पहले पाट्टो की जमीन पर कंकरीट रोपी गई, फिर क्रीक की जलधारा को संकुचित कर उस पर नए निर्माण की तैयारी शुरू की गई। इस बात का ध्यान रखा नहीं गया कि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी बाढ़ और क्षति से बचाने में मैंग्रोव का बहुत अधिक महत्व है। शहर में पानी भरने का एक और कारण है-यहां बहने वाली मांडोवी और जुआरी नदियों का प्रदूषण। मांडोवी, जिसे महादायी भी कहा जाता है, कर्नाटक पठार के पश्चिमी किनारे पर स्थित कर्नाटक राज्य के बेलगाम जिले के डेगाओ गांव में केलिल घाट के ऊपर मुख्य सह्याद्रि में 600 मीटर की ऊंचाई से उद्गमित होती है।

कर्नाटक में उत्तर कन्नड़ जिले से 29 किलोमीटर तक बहती हुई यह नदी उत्तरी गोवा जिले के सत्तारी तालुका से होते हुए गोवा राज्य में प्रवेश करती है। गोवा राज्य के भीतर यह 52 किलोमीटर की लंबाई में बहती हुई अरब सागर में गिरती है। दुर्भाग्य है कि इस नदी के दोनों किनारों पर जमकर खनन हो रहा है और इसके अवशेष नदी में गिरकर उसकी गहराई को कम कर रहे हैं और इसे दलदली बना रहे हैं। यह कीचड़ आगे चलकर समुद्र के रास्ते में भी एकत्र हो रहा है और शहर में जल का आधिक्य जब इन नदियों के माध्यम से समुद्र तक जाता है, तो वहां से उसे उल्टा धक्का सहना पड़ता है, जिससे पानी नालियों के जरिये पलट कर सड़कों पर आ जाता है।

पणजी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि यहां की नदी, मेंग्रोव, उसके किनारे की जमीन, बरसाती नालों के नदियों में जुड़ने और नदियों के समुद्र से जुड़ने के स्थान, क्रीक आदि को उनके सौ साल पुराने स्वरूप में लाया जाए, ताकि बरसात के जल को जल निधियों के तट पर फैलने और खेलने का अवसर मिले। यदि नदियों के समुद्र में मिलन स्थल पर मेंग्रोव नष्ट नहीं होंगे, कचरा जमा नहीं होगा और नदियों से आए मलबे की नियमित सफाई होगी, तभी पंजिम फिर से 'पोंजी' शहर बन सकता है।

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