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जीवन धारा: बिखेरने से बड़ी है मिलाने वाली शक्ति... विनाश के नियम से बड़े किसी नियम का अस्तित्व अवश्य है
Thu, 30 Jan 2025 06:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
महात्मा गांधी
महात्मा गांधी
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 30 Jan 2025 06:38 AM IST
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Amar Ujala
विस्तार
वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि हमारी यह पृथ्वी जिन परमाणुओं से मिलकर बनी है, उनमें उन्हें एक-दूसरे के साथ बांधे रखने वाली शक्ति न हो, तो वह चूर-चूर हो जाएगी और हमारा अस्तित्व मिट जाएगा। यह शक्ति जिस तरह जड़ पदार्थ में है, उसी तरह सारे चेतन प्राणियों में भी होनी चाहिए। चेतन प्राणियों को एक-दूसरे से बांधने वाली, उन्हें जोड़ने और एक करने वाली इस शक्ति का नाम है-प्रेम। उसे हम पिता-पुत्र, भाई-बहन में और मित्र-मित्र में देखते हैं। लेकिन हमें प्राणीमात्र में उसका उपयोग करना सीखना है और उसके उपयोग में ही हमारा ईश्वर का ज्ञान समाया हुआ है। जहां प्रेम है, वहां जीवन है और जहां द्वेष है, वहां नाश है।
यद्यपि प्रकृति भी पारस्परिक प्रेम के आधार पर ही कायम है। मनुष्य विनाश के आधार पर नहीं जीता। स्वप्रेम उसे दूसरों से प्रेम करने और उनके हित का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रों में एकता इसलिए होती है कि जिन व्यक्तियों से वे बनते हैं, उनमें पारस्परिक प्रेम का तत्व काम करता है। जिस तरह हमने परिवार-धर्म का विस्तार करके राष्ट्रों का निर्माण किया है, उसी तरह किसी दिन हमें राष्ट्रधर्म का विस्तार करके उसे विश्वव्यापी बनाना होगा। मैंने देखा है कि विनाश के बीच भी जीवन कायम रहता है, और इसलिए मेरा विश्वास है कि विनाश के नियम से बड़ा कोई नियम अवश्य है। वह नियम प्रकट होगा, तभी सुव्यवस्थित समाज की रचना संभव होगी और जीवन जीने योग्य होगा। और अगर वह नियम ही जीवन का सच्चा नियम है, तो हमें दैनिक जीवन में उस पर चलना होगा। जहां कहीं भी आपको किसी विरोधी का सामना करना पड़े, वहां आप उसे प्रेम से जीतिए।
मैंने उक्त नियम को अपने जीवन में इसी सादे ढंग से कार्यान्वित किया है। इसका अर्थ यह नहीं कि मेरी तमाम मुश्किलें हल हो गईं। मतलब इतना ही है कि मैंने पाया है कि प्रेम के कानून ने जो काम किया है, वह विनाश के कानून ने कभी नहीं किया। मेरा विश्वास है कि मानव-जाति की कार्यशक्ति हमें गिराने के लिए नहीं, उठाने के लिए है। और यह परिणाम उस निश्चित, भले ही अज्ञात, कार्य का है, जो प्रेम का कानून करता है। मानव-जाति कायम है, इसी बात से जाहिर होता है कि बिखेरने वाली शक्ति से मिलाने वाली शक्ति बड़ी है, दूर ले जाने वाली शक्ति से नजदीक लाने वाली शक्ति बड़ी है।