वक्त पर न बोलने का नुकसान
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क्या प्रधानमंत्री जानते हैं कि मौन रहने से उन्होंने सबसे ज्यादा नुकसान अपना ही किया है? राजनेताओं को राजनेता इसलिए कहा जाता है, ताकि उन्हें याद रहे कि उनका सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है उस समय नेतृत्व दिखाना, जब कोई आपदा आती है देश पर या कोई ऐसी घटना घटती है, जो सबको शर्मसार कर देती है। मोदी के कार्यकाल में आपदाएं भी आई हैं और शर्मसार करने वाली घटनाएं भी घटी हैं बहुत बार, पर उन्होंने अपना मौन व्रत नहीं तोड़ा। ऐसा लगने लगा था देशवासियों को कि मोदी के पास कुछ कहने को ही नहीं रहा है। उन्होंने अपनी बात अक्सर अपने किसी मंत्री या पार्टी प्रवक्ता द्वारा कहलवाई है। प्रवक्ता सिर्फ प्रवक्ता होते हैं। उनसे किसी को नेतृत्व की आशा नहीं होती।
लंदन में ‘भारत की बात, सबके साथ’ करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कठुआ और उन्नाव में उन बच्चियों के साथ हुई बलात्कार की घटना की चर्चा की, जिसकी वजह से सारे देश का सिर शर्म से झुका रहा पिछले दिनों। दुनिया के बड़े अखबारों ने लेख छापे, जिनमें मोदी की चुप्पी की निंदा की गई। प्रधानमंत्री जी, यदि कुछ दिन पहले आपने कहा होता, तो आपकी छवि को कम नुकसान होता। आपकी चुप्पी का फायदा उठाकर आपकी पार्टी के कुछ सिरफिरे, कट्टरपंथी किस्म के लोगों ने ऐसी गंदी बातें की हैं कि नुकसान आपका और आपकी सरकार का हुआ है।
आपने पहले अपना मौन व्रत तोड़ा होता, तो शायद जम्मू में उन वकीलों की हिम्मत न होती न्यायालय के सामने प्रदर्शन करने की। जम्मू-कश्मीर की सरकार द्वारा भाजपा के उन मंत्रियों को, जिन्होंने टीवी पर आकर उन लोगों की पैरवी करने की कोशिश की थी, जिन पर बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या करने के आरोप हैं, अगर पहले ही बर्खास्त कर दिया जाता, तो इतनी किरकिरी नहीं होती। उन्नाव में यदि भाजपा विधायक की गिरफ्तारी पहले हो गई होती, तो शायद उस लड़की के पिता आज जीवित होते, जो पुलिस हिरासत में सिर्फ इसलिए मारे गए, क्योंकि उन्होंने विधायक पर उनकी बेटी का बलात्कार करने का आरोप लगाने की हिम्मत की थी।
मोदी खुद को प्रधान सेवक कहना पसंद करते हैं। यह अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात है यह याद रखना कि देश के लोगों की नजरों में वह प्रधानमंत्री हैं और उनको इस पद पर बिठाया गया है इस विश्वास से कि वह जब नेतृत्व करने का समय आता है, वह नेतृत्व करेंगे। नेतृत्व करने का अहम हिस्सा है उस वक्त बोलना, जब बोलने की सख्त आवश्यकता होती है।