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आकाशीय बिजली का खतरा

Dr. TV Venkateswaran डॉ. टीवी वेंकटेश्वरन
Updated Tue, 07 Jul 2020 07:54 AM IST
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Lightning hazard, Lightning strikes cause an average of 2500 deaths annually in india
lightning - फोटो : अमर उजाला

देश में बिजली गिरने से सालाना औसतन 2,500 मौतें होती हैं और वर्ष 1967 से 2018 तक प्राकृतिक आपदाओं में हुई मृत्यु में बिजली गिरने से हुई मौत की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत रही है। तिरुवनंतपुरम स्थित नेशनल सेंटर्स फॉर अर्थ साइंस स्टडीज (एनसीईएसएस) ने बिजली गिरने की पूर्वसूचना देने और लोगों के लिए पहले से चेतावनी जारी करने के लिए देश की छह जगहों में लाइटनिंग डिटेक्शन नेटवर्क स्थापित किया।


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मौसम विभाग ने पिछले साल से बिजली गिरने और आंधी-तूफान की पूर्व चेतावनी देनी शुरू की है। इसके अलावा 2018 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने इससे संबंधित एक विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किया। वैसे तो सभ्यता की शुरुआत से ही बिजली गिरने की घटनाएं देखी गई हैं, लेकिन बादल किस तरह गर्म हो जाते हैं, इसे अभी तक पूरी तरह समझा नहीं जा सका है।

जो हम समझ पाए हैं, वह यह है कि आंधी-तूफान की स्थिति में बादलों के ऊपरी सिरे में पॉजिटिव चार्ज होता है, जबकि निचले हिस्से में निगेटिव चार्ज होता है। पानी को बूंदों को अपने में समाई नीचे की गर्म हवा जब बर्फ से भरे ठंडे बादलों से टकराती है, तब आंधी-तूफान की शुरुआत होती है। इस प्रक्रिया में पानी की बूंदों और बर्फ के टुकड़ों के बीच लगातार घर्षण होता है।

जब आकाश का गर्म क्षेत्र अचानक खुद को डिस्चार्ज करता है, तब बिजली गिरने की घटना होती है। यह घटना बादलों के दो क्षेत्रों या दो बादलों के बीच होती है। जब यह डिस्चार्ज बादलों के दो क्षेत्रों के बीच होता है, तब हम एक जगह और देर तक बिजली गिरने की घटना का अनुभव करते हैं।

पर जब यह डिस्चार्ज दो बादलों के बीच होता है, तब हम रोशनी को एक से दूसरी जगह जाते देखते हैं। जब ऐसी घटना बादलों के निचले हिस्से और जमीन के बीच होती है, तब हम उसे बिजली गिरना कहते हैं। बादलों के भीतर और बाहर बिजली चमकने की घटना से जहां विमानों को नुकसान पहुंच सकता है, वहीं बादलों के निचले हिस्से और जमीन के बीच बिजली चमकने से ही, जिसे हम बिजली गिरना कहते हैं, जान-माल का नुकसान होता है।

बिजली गिरने का असर कई किलोमीटर तक हो सकता है। इसकी गति काफी तेज लगभग 1,50,000 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, और यह अपने आसपास के वायुमंडल को काफी गर्म कर देता है। पृथ्वी पर बिजली गिरने की घटना प्रति सेकंड में पचास से सौ बार होती है।

हर साल 20,000 से अधिक लोग बिजली गिरने से सीधे प्रभावित होते हैं और कई हजार लोगों की इससे मौत हो जाती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक, वर्ष 2018 में प्राकृतिक दुर्योगों से करीब 6,891 मौतें हुईं।

इनमें से 2,357 लोग बिजली गिरने से मारे गए, जो प्राकृतिक दुर्योगों से हुई मौतों का 34.2 फीसदी थी। आकाशीय बिजली का गिरना बिजली आपूर्ति  ठप कर सकता है, इससे जंगल में आग लग सकती है और कच्चे घरों को नुकसान पहुंच सकता है।

भारत में आकाशीय बिजली के ज्यादातर शिकार खेतों में काम करने वाले ग्रामीण होते हैं। गंदा पानी बिजली का सुचालक होता है। इसलिए पानी से भरे खेतों में लोग अक्सर आकाशीय बिजली के शिकार होते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी, पुणे का एक अध्ययन बताता है कि 2004 से 2009 के बीच महाराष्ट्र में आकाशीय बिजली गिरने से मारे गए लोगों का 86 फीसदी अपने खेतों में काम कर रहे किसान थे।

यही आकाशीय बिजली गिरने का मौसम है। इससे बचने का मुख्य सुरक्षा नियम 30/30 है। यानी बिजली चमकने पर 30 तक गिनने से पहले ही बादल के गरजने पर घर के अंदर चले जाना चाहिए और आखिरी बार बादल गरजने के 30 मिनट तक बाहर नहीं निकलना चाहिए। खेत में होने पर दोनों पैरों को एक साथ कर सिर झुकाकर बैठ जाना चाहिए। लेटने पर खतरा बढ़ जाता है।

खेत में सूखी जमीन में जाना चाहिए। रबर सोल के जूते और रबर के टायर आकाशीय बिजली से सुरक्षा नहीं देते। पेड़ के नीचे खड़ा नहीं होना चाहिए। साइकिल, ट्रैक्टर और धातु से बने कृषि उपकरणों से दूर रहना चाहिए। और घर के अंदर बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल देने चाहिए। इन उपायों को अपनाकर आकाशीय बिजली से बचा जा सकता है। (लेखक वैज्ञानिक हैं।)

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