फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Lessons from nature Our needs are not as great as we think What do the Los Angeles fire in US teach us

प्रकृति के सबक: हमारी जरूरतें उतनी होती नहीं, जितना हम समझते हैं... लॉस एंजिलिस की आग क्या सिखाती है?

Thu, 23 Jan 2025 05:59 AM IST
दीपक कुमार शर्मा पिको अय्यर, उपन्यास व निबंधकार
पिको अय्यर, उपन्यास व निबंधकार Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 23 Jan 2025 05:59 AM IST
विज्ञापन
सार
लॉस एंजिलिस की आग को देख मुझे 1990 में कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग याद आ गई, जब मैंने अपना घर खाक होते हुए देखा, सिर्फ ब्रश बचा था। उस दौर ने दो बातें सिखाईं। एक, घर वह है, जो आपके भीतर रहता है, और दो, हमारी जरूरतें उतनी होती नहीं, जितना हम समझते हैं।
loader
Lessons from nature Our needs are not as great as we think What do the Los Angeles fire in US teach us
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सन 1990 की धुंधली सुबह एक बार फिर मेरे जेहन में कौंध रही है। मैं कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में संकरे पहाड़ी मार्ग पर पैदल ही बढ़ता जा रहा था। अग्नि बुझाने वाली टीम थकी होने के बावजूद लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी। राख में तब्दील हो चुके घरों और जली हुई कारों के बीच से गुजरते हुए मैं उस जगह पर पहुंचा, जहां मेरा घर हुआ करता था। अब वहां मलबे का गर्म ढेर था।



एक दिन पहले शाम को जब मैं वहां आया था, तो मेरा घर करीब 70 फुट ऊंची लपटों में घिरा हुआ था, जो तेज हवाओं के कारण लगातार बढ़ रही थीं। मैं जल्दी से कार में बैठ गया। जब मैं नीचे लौटने लगा, तो मुझे महसूस हुआ कि मैं फंस चुका हूं। करीब तीन घंटे तक मैं कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी विनाशक आग के बीच में था। एक नेक इन्सान ने मुझे बचाया, जो पानी के ट्रक में मदद करने के लिए आया था। भभकती हुई लपटों के बीच उसने मुझे आगे आने का इशारा किया। उसकी निस्वार्थता तब तक ताकत देती रही, जब तक कि मैं बाहर नहीं निकल आया। शाम के अंत तक मेरे पास जितना आभारी होने के लिए था, उतना ही दुखी होने के लिए भी। मेरी मां, जो उस वक्त फ्लोरिडा में थीं, को मैंने सब कुछ बताया, लेकिन फिर भी मैं हल्का नहीं हो सका।


मैंने उन्हें बताया कि साठ वर्षों की उनकी प्रत्येक अंतिम स्मृति-सभी फोटो, स्मृति चिह्न, व्याख्यान नोट और गले का हार-लगभग सब कुछ चला गया। उन्होंने कहा, ‘वहां कुछ तो होगा, जो तुम बचा सकते हो, उसे तो बचा लो।’ लेकिन पहाड़ी के ऊपर जाकर मैंने देखा कि हमारे नए घर की एक-एक चीज जल कर राख हो चुकी थी। आज अपनी आधी जिंदगी जी लेने के बाद मैं महसूस करता हूं कि 1990 का वह दिन मेरी जिंदगी का निर्णायक दिन था। धीरे-धीरे मैंने अपने जीवन को फिर से संवारा और मुझे एहसास हुआ कि हम ज्यादा साधारण जीवन जी सकते हैं, जैसा कि मैं हमेशा करना चाहता था। लगभग मौत के मुंह से लौटने के बाद मेरे लिए संपत्ति के नुकसान को सहन करना आसान हो गया था। नए खरीदे गए टूथब्रश के अलावा कुछ नहीं बचने पर, मैं अब भी उस पल को याद करके सिहर जाता हूं, जब मैं अकेला कार में बैठा खुद को असहाय महसूस कर रहा था। आग की लपटों को मेरी अगली तीन पुस्तकों और मेरे अगले कई वर्षों के लेखन के लिए मेरे सभी हस्तलिखित नोट्स को और उनके साथ मेरे एक लेखक बनने के आजीवन सपनों को मिटाते देख सकता हूं। मेरी मां को लगा कि उन्होंने अपना पूरा अतीत खो दिया है और अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर वह आसानी से नई शुरुआत के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं। जैसा किसी की मौत के बाद होता है, ठीक वैसे ही, हमें कागजी कार्यवाही के एवरेस्ट का सामना करना पड़ा। छोटे अपार्टमेंट में रहने के बाद नया घर खरीदने के लिए करीब साढ़े तीन साल लग गए।

आखिरकार, जब हमारी बीमा कंपनी ने हमारे सामान को बदलने का प्रस्ताव दिया, तब मैंने देखा कि मैं अपने द्वारा जमा की गई ज्यादातर किताबों, कपड़ों और फर्नीचर के टुकड़ों के बिना भी खुशी से रह सकता हूं। कुछ मायनों में मुझे पहले की अपेक्षा हल्का महसूस हुआ। मैंने अपने संपादक से बात की और उन्हें बताया कि जिन किताबों के लिए मैंने उनसे वादा किया था, वे अब संभव नहीं हैं। सांत्वना जताते हुए उन्होंने मुझे यह एहसास भी कराया कि शायद मैं अब स्मृति, कल्पना और भावनाओं से, अपने नोट्स की तुलना में कहीं अधिक गहरे स्रोतों से लिख सकता हूं। एक आजीवन यात्री के रूप में, मैंने महसूस किया कि घर वह नहीं है, जहां आप रहते हैं, बल्कि वह है, जो आपके भीतर रहता है। मेरी मां, मेरी होने वाली पत्नी, कहानियां और गाने, जो अब भी मेरे मस्तिष्क में गूंजते हैं, ये सब मिलकर मेरा घर बनाते हैं। मेरे पास अब भी मेरे शब्द और कविताएं थीं, जिनसे मैंने सीखा था और यही मेरा असल आंतरिक बचत खाता था।

वर्षों बाद एक मित्र ने मुझे बताया था कि सूफी कहते हैं कि उन्हीं चीजों पर आपका सच्चा हक होता है, जिन्हें आप जहाज के डूबने पर भी नहीं खोते हैं। बीते हफ्ते जब मैंने सांता बारबरा के लिए मेरी दिवंगत मां द्वारा पुनर्निर्मित किए गए घर की ओर उड़ान भरी, ठीक उसी वक्त मैंने लॉस एंजिलिस के आसपास आग से जिंदगियों को तबाह होते देखा। जैसा कि अक्सर होता है, हमारे घर में घुप्प अंधेरा था। हमें एक और आग के खतरे से बचाने के लिए हमारी बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। रात भर एक छोटी-सी लालटेन की रोशनी में काम करते हुए मैंने उन दोस्तों के बारे में सुना, जिन्होंने अपना घर खो दिया था या होटलों में रह रहे थे, न जाने किस हाल में उनका लौटना होगा।
 हमारा घर जला था, तब अक्सर आग लगने का डर बना रहता था, अब कैलिफोर्निया और पूरे पश्चिम में नियमित पर्यटक आते रहते हैं। इन जगहों के लिए बीमा पॉलिसियां लेना बहुत कठिन है। यहां आग, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनियां मिलती रहती हैं। 1990 में आग लगने के महीनों बाद, मैंने देखा कि मेरे कुछ पड़ोसी अपने सामान की बर्बादी के दुख से उबर नहीं पा रहे थे, जबकि कुछ सोच रहे थे कि वे कैसे नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं। यह शायद परिस्थितियों और मनोदशा का मामला है, लेकिन दुनिया के बढ़ते खतरों का मतलब है कि हमें अस्थिरताओं के बीच खुद को बिखरने न देना सीखना होगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि लॉस एंजिलिस के आसपास बर्बाद हुए मेरे मित्र पीछे देखने के बजाय, आगे बढ़ेंगे। वे उन चीजों को संजोकर अपने पास रख सकते हैं, जो उनके पास हैं और जिन्हें, अक्सर हम हल्के में लेते हैं, जबकि यही वे चीजें हैं, जो हमें जीवित रखती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed