फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   know how Bangladesh is not going away from India

भारत से दूर नहीं जा रहा बांग्लादेश

Fri, 11 Sep 2020 12:49 PM IST
Anand Kumar Anand Kumar
Updated Fri, 11 Sep 2020 12:49 PM IST
विज्ञापन
know how Bangladesh is not going away from India
शेख हसीना-नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter

भारत और बांग्लादेश के बीच अंतर्देशीय जलमार्ग का हालिया उद्घाटन बताता है कि बांग्लादेश के साथ भारत का संबंध किसी भी दूसरे दक्षिण एशियाई देश से अच्छा है। पिछले एक-दो साल में बेशक कुछ अड़चनें पैदा हुई हैं, जिस कारण बांग्लादेश को चीन से मदद लेनी पड़ी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बांग्लादेश सिर्फ आर्थिक मदद के लिए चीन के नजदीक गया है या वह भारत से नाराज है। जनवरी, 2009 के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों ने नए दौर में प्रवेश किया और दोनों कई समस्याओं को हल करने में कामयाब रहे। भारत का पूर्वोत्तर उग्रवाद से त्रस्त था और कई विद्रोही नेताओं ने बांग्लादेश में शरण ली थी। बांग्लादेश ने इन नेताओं को भारत को सौंपा और उनके प्रशिक्षण शिविर बंद कर दिए। 


loader

पश्चिम बंगाल सरकार के असहयोग के कारण बेशक तीस्ता मुद्दे का हल नहीं निकल सका। तीस्ता बांग्लादेश की एक महत्वपूर्ण नदी है, जो उसके उत्तरी क्षेत्र में सिंचाई में मदद करती है, जिसे देश का अन्न भंडार माना जाता है। तीस्ता जल बंटवारे को लेकर कोई समझौता न हो पाने के कारण बांग्लादेश अब इसका विकल्प अपनाना चाहता है। वह एक जलाशय का निर्माण
कर अपने हिस्से के पानी का प्रबंधन करना चाहता है। इस परियोजना के लिए उसने चीन से करीब एक अरब डॉलर की मदद मांगी है। बांग्लादेश के चीन के साथ भी करीबी रिश्ते हैं। चीन बांग्लादेश का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता, निवेशक और व्यापार साझेदार है। चीन पर बांग्लादेश की  निर्भरता बढ़ गई है, पर अवामी लीग सरकार ने हमेशा भारत और चीन के साथ अपने
संबंधों को संतुलित करने की कोशिश की है। 

कोविड संकट के बाद बांग्लादेश ने पायरा बंदरगाह के पहले चरण, बरिशाल भोला पुल और एक टेक्नोलॉजी पार्क के निर्माण के लिए धन की मांग की है। भारत की घरेलू राजनीति ने तीस्ता मुद्दे को सुलझाने में मुश्किलें खड़ी कर दीं। शायद इसी गतिरोध के कारण बांग्लादेश ने तीस्ता जल का प्रबंधन खुद करने का फैसला किया है और चीन से मदद मांगी है। इससे यह धारणा बन रही है कि बांग्लादेश अब भारत से दूर जा रहा है। हालांकि यह सच नहीं है। ऐसा लगता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी
आक्रामकता या दक्षिण एशिया में भारत-चीन टकराव के संदर्भ में ही सारा कुछ देखा जा रहा है। अगर बांग्लादेश तीस्ता के अपने हिस्से के पानी को प्रबंधित करना चाहता है, तो इससे भारत को कोई समस्या नहीं है। 

अगर बाद में भारत और बांग्लादेश के बीच इस संबंध में समझौता होता है, तो इससे भारत के लिए बेहतर स्थिति बनेगी। अगर ऐसा नहीं होता, तब भी बांग्लादेश कम परेशानी महसूस करेगा, क्योंकि उसकी तरफ पानी होगा। हालांकि ब्रह्मपुत्र के बांध पर बांग्लादेश की नाराजगी कम करने के लिए बीजिंग तीस्ता मुद्दे का इस्तेमाल करेगा। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने शेख हसीना को बुलाकर जब कश्मीर पर चर्चा करने की कोशिश की, तो उसे भी भारत के प्रति बांग्लादेश की झुंझलाहट के रूप में देखा गया। ध्यान देने वाली बात है कि पाकिस्तान हमेशा भारत-बांग्लादेश के संबंधों में दरार पैदा करना चाहेगा। बेशक एनआरसी और सीएए को लेकर बांग्लादेश में कुछ भ्रम हो, पर वह नाराजगी इतनी ज्यादा कतई नहीं है कि पाकिस्तान उसका फायदा उठा ले।

बांग्लादेश में कोविड-19 के प्रसार के बीच भारत ने सुनिश्चित किया कि वहां दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कोई कमी न रहे। बांग्लादेश के नीति-निर्माता निश्चित रूप से इसका संज्ञान लेंगे। कूटनीतिक स्तर पर रिश्तों को सुधारने के लिए भारत ने वहां नए उच्चायुक्त की नियुक्ति की है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को बांग्लादेश से रिश्तों के प्रति आश्वस्त होना चाहिए। भारत को चीन और पाकिस्तान, दोनों से सावधान रहना होगा, जो दक्षिण एशियाई देशों को भारत से दूर करना चाहेंगे। चीन की आक्रामक विदेश नीति और पाकिस्तान की हताशा को देखते हुए भारत को सक्रिय विदेश नीति अपनानी होगी। दक्षिण एशिया में भारत की सक्रियता ही चीन और पाकिस्तान, दोनों को रोक सकती है। 

(लेखक मनोहर परिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस में एसोसिएट फेलो हैं।)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed