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केरल, सोना, तस्करी और राजनीति

Mon, 20 Jul 2020 11:16 AM IST
आर. राजगोपालन आर राजगोपालन
आर राजगोपालन Published by: आर. राजगोपालन Updated Mon, 20 Jul 2020 11:16 AM IST
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Kerala, gold, smuggling and politics
केरल सोना तस्करी मामला - फोटो : social media
केरल में सोने की तस्करी की खबर सुर्खियों में है। यह घटनाक्रम पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली केरल की मार्क्सवादी सरकार के पतन का कारण भी हो सकता है। केरल में यह बड़ा घोटाला तब सामने आया है, जब अगले वर्ष अप्रैल में वहां विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इस घोटाले की काफी चर्चा हो रही है, जिसके पीछे स्वप्ना सुरेश का दिमाग है। चुनाव और तस्करी को जोड़कर देखें, तो इसका राजनीतिक अर्थ पता चलेगा। केरल सौ फीसदी साक्षरता वाला राज्य है। उसी स्तर पर राज्य में इस तरह के सफेदपोश अपराध बढ़ गए हैं। इसकी वजह यह है कि राज्य के 60 फीसदी लोग विदेशों में रहते हैं। 

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स्वप्ना सुरेश इसका शानदार उदाहरण है। ऐसे ही लोगों ने केरल को नकारात्मकता में घसीटा है, जिसे ‘देवताओं का अपना देश’ कहा जाता है। स्वप्ना सुरेश अकेली नहीं है। उसने तस्करी रैकेट में मुख्यमंत्री विजयन से लेकर ड्राइवर और चपरासी तक को घसीट लिया है। सोना तस्करी मामले की मुख्य अभियुक्त स्वप्ना सुरेश के कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह राज्य में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के कई नेताओं से संपर्क में थी। जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को इस बारे में चेताया, तब उन्होंने एनआईए को इस स्वर्ण तस्करी मामले की आतंकवाद से जुड़े होने के बारे में जांच करने का आदेश दिया। 

कहानी उसके बाद ही बदल गई। कई केंद्रीय एजेंसियों ने अब सोने की तस्करी के इस मामले की जांच शुरू कर दी है, क्योंकि इसके राष्ट्रव्यापी प्रभाव हैं और इस जांच के तहत ही स्वप्ना के कॉल रिकार्ड की जांच हो रही है, जो फिलहाल एनआईए की हिरासत में है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, स्वप्ना ने राज्य के मंत्रियों, संसद सदस्यों और विधायकों से बात की थी। इस प्रकरण में केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी. श्रीरामकृष्णन का भी नाम आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सूचियां सामने आ रही हैं और माकपा के कई लोग इनसे जुड़े हो सकते हैं।

राजनीतिक पहुंच और सीमा शुल्क विभाग से संपर्क रखने वाले एक ट्रेड यूनियन नेता ने भी कथित रूप से तस्करी में मदद की है, हालांकि इसके ब्योरे आने शेष हैं। मलयाला मनोरमा सहित केरल के कई दैनिक समाचार पत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी के राज्य के कई उच्च अधिकारियों के साथ संबंध होने की सूचना है। आकलन के मुताबिक, हजारों करोड़ रुपये की तस्करी हुई है और इस पैसे का इस्तेमाल आतंकी संगठनों और धर्म परिवर्तन के लिए किया गया हो सकता है। सिर्फ यही नहीं कि इस तस्करी के तार बहुत गहरे जुड़े हैं, यह भी कि बिना विदेशी हाथ, खासकर संयुक्त अरब अमीरात की मदद के इतने बड़े पैमाने पर तस्करी का संचालन संभव नहीं था। 

विगत तीन जुलाई को पी. सरित कुमार तिरुअनंतपुरम हवाई अड्डे पर संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास में काम करने वाले एक कर्मचारी के नाम से आए एक भारी कार्टन लेने पहुंचे। 39 वर्षीय कुमार ने वाणिज्य दूतावास में जनसंपर्क अधिकारी होने का दावा किया, जो उस कर्मचारी के लिए कार्टन लेने आए थे। दो दिन बाद उन्हें सीमा शुल्क अधिकारियों ने देश में सोने की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। विदेश मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद, सीमा शुल्क (निवारक) आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों
ने संयुक्त अरब अमीरात वाणिज्य दूतावास के कार्यवाहक प्रभारी की उपस्थिति में 70 किलो का कार्टन खोला। 

एक समाचार वेबसाइट के अनुसार, उन्हें कार्टन के भीतर जो नजारा दिखा, उसकी किसी ने अपेक्षा नहीं की होगी। उसमें खाद्य पदार्थ और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के बीच पाइप, नल और दरवाजे का हैंडल दिखा। लेकिन वह पाइप खाली नहीं था, बल्कि उसके भीतर चौबीस कैरेट का तीस किलो सोना भरा हुआ था, जिसकी अनुमानित कीमत कम से कम 15 करोड़ रुपये है। जनवरी के बाद से 30 किलोग्राम से भारी सात एयर कार्गो खेप कथित तौर पर राज्य में आई थी।

सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पी. सरित कुमार, जिन्होंने यूएई वाणिज्य दूतावास के लिए काम किया था, अभी उनके साथ काम नहीं कर रहे थे, जैसा कि उन्होंने दावा किया था। उन्होंने कई बार ऐसी खेप हासिल की थी। केरल के मुख्यमंत्री विजयन को जब पता चला कि राज्यपाल ने इस संदर्भ में केंद्र सरकार को आगाह किया है, तो उन्होंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर इस मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराए जाने का आग्रह किया। 

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि इस अपराध की हर कड़ी को सामने लाया जाना चाहिए। दो दिन बाद एनआईए ने (जो आम तौर पर आतंकवाद से संबंधित मामले सुलझाती है) ने चार लोगों-पी सरित कुमार, जो पहले से गिरफ्तार थे, स्वप्ना सुरेश, संदीप नायर और एर्नाकुलम का कथित तस्कर फजील फरीद, जो अभी यूएई में रहता है, के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 15 जुलाई को एफआईआर में कथित रूप से सोने के तस्कर के रूप में के टी रामीज का नाम भी जोड़ा गया।

शिक्षा के मामले में शानदार रिकॉर्ड के कारण उत्तर भारत में केरल की बेहतर छवि है। लेकिन केरल वैसा नहीं है। भाजपा या केंद्र सरकार को केवल चुनावी प्रचार के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एनआईए को ऐसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की गहराई से पड़ताल करनी चाहिए। अमित शाह को इस जांच की प्रगति की निगरानी करनी चाहिए, और इस मामले में दोषी लोगों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। 

माकपा केरल में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उसके कई शीर्ष नेता कैंसर से जूझ रहे हैं। भारी साक्षरता के कारण केरल के लोग राजनीतिक रूप से चतुर हो गए हैं। उनके ज्ञान ने उन्हें नकारात्मक बना दिया है, चाहे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हो या सांस्कृतिक मुद्दा। ऐसे में केरल का पुनरुद्धार नहीं हो सकता। 'देवताओं के अपने देश' को तो अब देवता ही बचा सकते हैं।
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