{"_id":"9ae3c7a4-8ccc-11e2-b06d-d4ae52bc57c2","slug":"kalyandev-ji","type":"story","status":"publish","title_hn":"कल्याणदेव जी की अनूठी प्रेरणा","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
कल्याणदेव जी की अनूठी प्रेरणा
Updated Thu, 14 Mar 2013 10:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पौराणिक कथाओं में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो हमें शांति-सद्भाव के साथ जीवन बिताने का संदेश देते हैं। उसमें बताया जाता है कि जो व्यक्ति मेल-मिलाप से रहता है और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देता है, वह देश-समाज में ऊंचा स्थान तो पाता ही है, मोक्ष का भी अधिकारी बन जाता है।
विज्ञापन
परम विरक्त संत 'पद्मभूषण' स्वामी कल्याणदेव जी महाराज एक उद्योगपति के आमंत्रण पर उनके निवास स्थान पर गए। उद्योगपति ने उनसे भोजन करने की प्रार्थना की। स्वामी जी ने कहा कि मेरा नियम है कि मैं गरीबों के घर से मांगी गई रोटी खाता हूं। मैं धनिकों के पास गरीबों व असहायों की सेवा की प्रेरणा देने जाता हूं, भोजन के लिए नहीं।
विज्ञापन
उन्होंने आग्रह किया, महाराज, भोजन न सही, दूध या जल ग्रहण करने की कृपा करें। यह सुनकर स्वामी जी बोले, सेठ जी, मुझे पता है कि आपका अपने भाई के साथ संपत्ति का विवाद चल रहा है। मुकदमा भी दायर हो चुका है। आपने हाल ही में अपने खर्च से श्रीराम कथा का आयोजन कराया था। यदि आपको भगवान श्रीराम के प्रति आस्था है, तो राम-भरत के अनूठे भ्रातृ-प्रेम से प्रेरणा लेकर आपको अपने भाई पर दायर मुकदमा खत्म कर देना चाहिए।
विज्ञापन
आप इस काम को करें, तो मैं आपके घर का दूध-जल ग्रहण कर लूंगा। और वास्तव में अगले ही दिन दोनों भाइयों के बीच का विवाद समाप्त हो गया।