{"_id":"5c29fe5e88c254b1080292197e2f3bc9","slug":"kaisa-aadmi-hun-mein-hindi-news-rk","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैसा आदमी हूं मैं","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
कैसा आदमी हूं मैं
Updated Sat, 14 Mar 2015 09:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कतरा-कतरा जीने की चाह लिए लोग एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहते हैं, ताकि वो एक मुकम्मल इन्सान बन सकें। 'कैसा आदमी हूं मैं' की कहानियां इसी तलाश से जुड़ी हैं। पुस्तक के लेखक हैं अरुण अस्थाना, जो पेशे से एक पत्रकार हैं। लखनऊ में जन्मे अस्थाना काम के सिलसिले में देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भटकते रहे। इसी तलाश में अस्थाना की कहानियों के चरित्रों का जन्म होता है।
विज्ञापन
'चल झूठे' का नायक और लेखक शेखर, उसकी नायिका क्षमा या फिर 'अपने-अपने सच' की नायिका ऐसे ही कुछ चरित्र हैं। सारे पात्र खुद में मुकम्मल तो नहीं हैं, पर दब्बू और मजबूर होने के अलावा भी बहुत कुछ हैं। ये पात्र अपने अभावों में भी अपने सपने और अच्छाइयां बचाने की कोशिश करते नजर आते हैं।
विज्ञापन
संग्रह में सात कहानियां हैं। सभी कहानियों के पात्र अपनी पीड़ा, अभावों और आकांक्षाओं को छिपाते हुए मुकम्मल दिखना चाहते हैं। 'कैसा आदमी हूं मैं' का नायक अपने सीधेपन की वजह से लोगों के व्यंग्य का शिकार होता है, तो 'केतली भर अंधेरा' विदेश जाने की चाहत और आधुनिक जीवन शैली के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानियां हैं।
विज्ञापन
इन कहानियों को पढ़ने के बाद ऐसा लगता है मानो लेखक अपनी आत्मा के लुहारखाने में छैनी और हथोड़े के साथ बैठा हो और अपने समाज का अन्त: करण गढ़ रहा हो।
कैसा आदमी हूं मैं
अरुण अस्थाना
पेंगुइन बुक्स
मूल्य-150 रुपये