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नजरिया : आलोचना और आरोपों के बीच इस्राइल के पचहत्तर साल

Thu, 18 May 2023 06:43 AM IST
Brett Stephens ब्रेट स्टीफेंस
Updated Thu, 18 May 2023 06:43 AM IST
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सार
इस्राइल की काफी आलोचना होती है और उसके मौजूदा शासन पर फासीवादी होने का आरोप लगाया जाता है। लेकिन इस्राइली पहचान की एक सकारात्मक दृष्टि भी है, जो एक पुनर्निर्मित और नवीनीकृत यहूदी सभ्यता के आदर्श पर केंद्रित है, जिसके भीतर इसके नागरिक समृद्धि, उद्देश्य की भावना और सुरक्षा पा सकते हैं।
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Jewish nation Israel turns 75 Years and doing remarkably well
इस्राइल (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पिछले रविवार को यहूदी राष्ट्र इस्राइल 75 वर्ष का हो गया, मगर ज्यादातर लोगों का मन खट्टा था। इस देश पर एक ऐसे गठबंधन का शासन है, जिसमें राजनीतिक चरमपंथी, समलैंगिकों से घृणा करने वाले अहंकारी, वैचारिक रूप से एकल विचारवादी और केवल भ्रष्ट लोग शामिल हैं। एक प्रस्तावित न्यायिक सुधार, जिसने उच्च श्रेणी के बहुसंख्यकवाद पर प्रमुख संस्थागत जांच को विराम दे दिया, इस्राइल के इतिहास के कुछ बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक के चलते पूरी तरह रुका नहीं है। धर्मनिरपेक्ष इस्राइलियों को डर है कि देश का जनसांख्यिकी संतुलन धार्मिक चरमपंथियों की तरफ झुक न जाए।



बेंजामिन नेतन्याहू को व्हाइट हाउस से निमंत्रण नहीं मिल सकता है। इससे ज्यादातर अमेरिकी यहूदी परेशान नहीं लगते, जो प्रधानमंत्री के आत्मकेंद्रित नेतृत्व को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इससे भी उल्लेखनीय बात यह है कि इस्राइलियों ने पांच दिनों तक गाजा स्थित ईरान समर्थित आतंकी समूह फलस्तीन इस्लामिक जेहाद के रॉकेट हमलों को सहन किया। यह स्मरणीय है कि अरब दुनिया के कुछ हिस्सों के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य करने में इस्राइल की हालिया सफलताओं के बावजूद, इसके कई पड़ोसी अब भी इसे नक्शे से मिटा देना चाहते हैं।


और इन सबके लिए इस्राइल उल्लेखनीय रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह उन परिस्थितियों को याद रखने में मदद करता है, जिनमें इस देश का जन्म हुआ। इस्राइल एक उत्तर-औपनिवेशिक देश है। इसने अपने राष्ट्रीय जीवन की शुरुआत अत्यंत गरीबी से की। इसके समकक्ष देशों के समूह में सीरिया, पाकिस्तान, भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार, श्रीलंका और उत्तर व दक्षिण कोरिया शामिल हैं। ये देश कुछेक साझा समस्याओं के साथ अस्तित्व में आए-शत्रुतापूर्ण पड़ोसी, अस्थिर सीमाएं, भयंकर गरीबी, अशांत जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यक और उनके स्वतंत्रता संग्राम की कुछ अनसुलझी दुविधाएं।

लेकिन अगर इस्राइलियों ने फलस्तीनियों और अन्य पड़ोसियों के साथ संघर्ष को सुलझाया नहीं है, तो उन्होंने खुद को इससे खत्म भी नहीं होने दिया है। इस्राइल ऐसा देश नहीं है, जो खुद को परिभाषित करता है कि वह किसके खिलाफ है, वह क्या नहीं है, या किसने क्या किया है। इस्राइली पहचान की एक सकारात्मक दृष्टि भी है, जो एक पुनर्निर्मित और नवीनीकृत यहूदी सभ्यता के आदर्श पर केंद्रित है, जिसके भीतर इसके नागरिक समृद्धि, उद्देश्य की भावना और सुरक्षा पा सकते हैं।

यह मान लेना आसान है कि यह दृष्टि पूरी तरह से कितनी साकार हुई है। डेविड बेन-गुरियन ने सामान्यता को परिभाषित करते हुए कहा था, 'जब यहूदी चोर और यहूदी सेक्स वर्कर हिब्रू में अपना कारोबार करने लगेंगी, तो हम समझेंगे कि हम सामान्य देश बन गए हैं।' इस्राइल बहुत पहले वहां पहुंच गया। पिछले हफ्ते इस्राइल की यात्रा पर मैंने यूं ही एक आईफोन ऐप में देखना चाहा कि रॉकेट कहां गिर रहे हैं - वैसे बहुत चिंता की बात नहीं थी, क्योंकि आयरन डोम और डेविड की स्लिंग मिसाइल सिस्टम प्रभावी रक्षा प्रदान करते हैं। यदि किसी समाज की सफलता को उस गति से मापा जा सकता है, जिस पर चमत्कार सांसारिक हो जाता है, तो इस्राइल ठीक कर रहा है। जेरूसलम में मैंने नए अप्रवासियों के एक केंद्र का दौरा किया, उनमें से अधिकांश 20 और 30 वर्ष की उम्र के थे, जो इथियोपिया, अर्जेंटीना, फ्रांस और रूस से आए थे। वर्ष 2022 में इस्राइल ने लगभग 75,000 नए लोगों का स्वागत किया। अप्रवासियों को आकर्षित करने वाले राष्ट्र सफल होते हैं।

भविष्य बनाने वाले देशों का अपना भी भविष्य बचा रहता है। इस्राइल की प्रजनन दर प्रति महिला करीब तीन जन्म की है, जो भारत (2.05), अमेरिका (1.7) और दक्षिण कोरिया (0.8) की तुलना में काफी ज्यादा है। इस्राइल की उच्च जन्मदर मजबूत आर्थिक विकास से संबंधित है। पिछले साल, विकसित देशों के 2.8 फीसदी औसत विकास दर की तुलना में इस्राइल की अर्थव्यवस्था में 6.5 फीसदी की वृद्धि हुई। अब इस्राइल का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद जर्मनी की तुलना में ज्यादा है और यह ब्रिटेन की तुलना में ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करता है।

यहां की राजनीति कैसी है? एक तरह से देखा जाए, तो न्यायिक सुधार पर बहस इस्राइली लोकतंत्र के लिए मृत्यु के करीब जैसा अनुभव था। दूसरे नजरिये से यह जिम्मेदार नागरिक सक्रियता का एक आश्चर्यजनक प्रदर्शन रहा है, जो इस बात का सबूत है कि एक ध्रुवीकृत देश में केंद्र अब भी पकड़ बना सकता है और अहंकारी नेताओं को जनता की मांगों के आगे झुकना होगा।

जहां तक इस्राइल की बदनाम राजनीतिक हस्तियों की बात है, उनकी तुलना किसके साथ की जाएगी? स्वीडन में सत्तारूढ़ गठबंधन धुर दक्षिणपंथी, जेनोफोबिक (दूसरे देशों के लोगों से घृणा करने वाले) स्वीडन डेमोक्रैटिक पार्टी के साथ 'सहयोग में' शासन करता है। कोई भी स्वीडन या अन्य अधिकांश लोकतंत्रों के बारे में नहीं सोचता है कि राजनीतिक अतिवाद के उदाहरण के रूप में इस तरह के भद्दे चेहरे हैं।

कहीं भी, जब निरंकुश शासक सत्ता में आते हैं, तो वे सार्वजनिक विरोधों पर प्रतिबंध लगाते हैं, अपने राजनीतिक विरोधियों को कैद करते हैं या उनकी हत्या करते हैं और आतंक का शासन थोपते हैं। इसके विपरीत इस्राइल में हर हफ्ते नया विद्रोह शुरू होता है, जबकि नेतन्याहू पर मीडिया को खरीदने की कोशिश करके अपने अधिकार का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया जाता है। अगर इसे इस्राइली फासीवाद कहा जाता है (एक ऐसा शब्द जिसका उपयोग इस्राइली वामपंथियों को पसंद है), तो इस्राइलियों को खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए।

पचहत्तर साल एक अजीब उम्र है, जिस पर किसी मुल्क को परखा जाता है। अमेरिका जब इस मुकाम पर पहुंचा था, तब मिलार्ड फिलमोर राष्ट्रपति थे। लेकिन एक ऐसे देश के लिए जिसकी व्यापक रूप से आलोचना की जाती है और जो खुद की आलोचना से गुरेज नहीं करता, इस्राइल के लोगों के पास जश्न मनाने के लिए बहुत कुछ है। इतने सारे उत्तर-औपनिवेशिक देश विलीन हो गए, लेकिन इस्राइल ने खुद को खत्म नहीं होने दिया।

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