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स्मृति की प्रयोगशाला से
नई दिल्ली
Updated Sat, 09 Mar 2013 11:41 PM IST
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साल 2012 का साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले कुणाल सिंह की यह चौथी पुस्तक है। ‘इतवार नहीं’ कुणाल की सात कहानियों का संग्रह है।
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कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े इस युवा लेखक की लेखनी में नयी सदी के कई रंग एक साथ दिखते हैं। इसमें ऐसी किस्सागोई भी है, जो पाठक को बांधे रखती है। ऐसा शिल्प भी, जो एक नये ही माहौल में ले जाता है और ऐसे मुद्दे भी, जिनकी जमीन हर व्यक्ति से कहीं न कहीं जुड़ी है।
‘सनातन बाबू का दाम्पत्य’, ‘रोमियो जूलियट और अंधेरा’, ‘आदिग्राम उपाख्यान’ के बाद आया कुणाल सिंह का यह कथा संग्रह उनकी कथनी की शैली पर पाठक के भरोसे को और भी मजबूत बनाता दिखता है। इस संग्रह में शामिल ‘डूब’, ‘दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे’ और ‘झूठ तथा अन्य कहानियां’, ऐसा चित्रण प्रस्तुत करती हैं, जिनमें पाठक खुद को घिरा हुआ पाता है।
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इतवार नहीं-कुणाल सिंह
प्रकाशक-भारतीय ज्ञानपीठ
नई दिल्ली
मूल्य-१४० रुपये