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खुद की कमियां भी तो देखें: हरदम दूसरों का विश्लेषण करने की आदत... यह आंतरिक अशांति का सबसे बड़ा कारण
Sun, 01 Jun 2025 08:29 AM IST
ज्योति भास्कर
जांसी डन (द न्यूयॉर्क टाइम्स)
जांसी डन (द न्यूयॉर्क टाइम्स)
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 01 Jun 2025 08:29 AM IST
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खुद की कमियां भी तो देखें (प्रतीकात्मक)
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एडॉब स्टॉक
विस्तार
मैं सुपरमार्केट में सामान का भुगतान कर रही थी, कि मेरी तीन साल की बेटी कहीं चली गई। क्रेडिट कार्ड ढूंढने के चक्कर में मेरा ध्यान उससे हट गया था। बीस मिनट तक मैं उसे खोजती रही। कुछ लोगों ने मेरी मदद की, तो कुछ पूछने लगे कि मैंने यह कैसे होने दिया? अंततः वह मिल गई। वह घर पहुंच गई थी। उस वक्त हर कोई मेरी कमी बता रहा था, तब मैंने कसम खाई कि अब आगे से कभी किसी की आलोचना नहीं करूंगी। हालांकि, यह प्रण ज्यादा दिन नहीं चल सका।
हम अक्सर दूसरों की कमियां ढूंढते रहते हैं और यह नहीं सोचते कि हमने क्या किया है? शोध बताते हैं कि जब लोग नया चेहरा देखते हैं, तो सेकंड के दसवें हिस्से में ही दिमाग तय कर लेता है कि वह आकर्षक और विश्वसनीय है या नहीं। न्यूरो मनोवैज्ञानिक सनम हफीज कहती हैं, ‘दूसरे लोगों की लगातार कमियां निकालने से आपकी सहानुभूति कम हो सकती है। नए दृष्टिकोण के प्रति आपकी ग्रहणशीलता कम हो जाती है और आप प्रतिक्रिया करने की ओर अधिक प्रवृत्त हो सकते हैं।’ शोध यह भी बताते हैं कि आप किसी की जितनी ज्यादा कमियां निकालेंगे, आपको उतना ही ज्यादा बदतर महसूस होगा।
मैंने विशेषज्ञों से पूछा कि किसी की ज्यादा आलोचना करने से खुद को कैसे बचाएं? डॉ. हफीज कहती हैं, ‘इसके लिए आपको सतर्क रहना होगा, खासकर तब, जब आप किसी के रूप-रंग और व्यवहार को लेकर नकारात्मक धारणा बना रहे होते हैं। ऐसे में खुद को रोकने की कोशिश करें। साथ ही खुद से पूछें कि क्यों बेवजह हम इसके गुण-दोषों में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं?’ मनोचिकित्सक एरिका श्वार्टजबर्ग कहती हैं कि निंदा से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अगली बार जब आप किसी की आलोचना करें या कमियां निकालें, तो सबसे पहले खुद का आकलन करें। यह भी सोचें कि कोई आपका साथी समय पर काम खत्म नहीं कर पा रहा है, तो संभव है कि उसकी अपनी व्यक्तिगत समस्याएं हों।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हम अपने आसपास के लोगों की बेकार में ही कमियां ढूंढते रहते हैं, जबकि उनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं होता। इसलिए मैंने दूसरों पर अंगुली उठाने से पहले खुद का परीक्षण करने की ठानी है। हालांकि, मैं हमेशा ऐसा कर नहीं पाती। हाल ही में मैं बच्चों के बैंड प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गई, तो मैंने देखा कि ज्यादातर लोग अपने फोन में व्यस्त थे, तो मैंने अपनी दोस्त से फुसफुसाते हुए कहा, फोन ही चलाना था, तो यहां आने की क्या जरूरत थी? उसने पलटकर कहा, तुम्हारे प्रण का क्या हुआ?