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दक्षेस में भारत का बढ़ता दबदबा

Wed, 10 Dec 2014 08:42 PM IST
शंभूनाथ शुक्ल
शंभूनाथ शुक्ल Updated Wed, 10 Dec 2014 08:42 PM IST
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India's growing clout in SAARC

यह एक नया संकेत है। भारत सार्क देशों के बीच नेता बनकर उभर रहा है और मालदीव की गतिविधियों से यह साफ भी हो गया है। उसने अपने संकट के निजात के लिए किसी मुस्लिम देश से नहीं, बल्कि हिंदू बहुल देश भारत की दक्षिणपंथी सरकार से अनुरोध किया। जबकि सार्क देशों में पाकिस्तान और बांग्लादेश सरीखे मुस्लिम देश भी हैं। और उनके यहां मालदीव के संकट का बेहतर हल भी मौजूद था। मगर मालदीव की विदेश मंत्री दुन्या मौमून ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से ही अनुरोध किया कि उनके देश को तत्काल पीने का पानी उपलब्ध कराने की कृपा करें। भारत के लिए भी मालदीव के इस संकट को हल करना आसान नहीं था। पर एक विवेकवान नेता की तरह विदेश मंत्री ने फौरन मालदीव की मदद का फैसला लिया और पानी के जहाजों व हवाई जहाजों से सीधे मालदीव की राजधानी माले में पीने के पानी की पहली खेप पहुंचा दी गई।

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इस बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री से संपर्क किया और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद फौरन पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय, विदेश मंत्रालय तथा माले स्थित भारत के उच्चायुक्त राजीव शहारे और विदेश सचिव सुजाता सिंह को पीने का पानी माले भिजवाने के लिए व्यवस्था करने को कहा गया। बृहस्पतिवार को मालदीव की विदेश मंत्री दुन्या मैमून का फोन आया और शुक्रवार की सुबह दिल्ली से पानी लेकर वायुसेना का विमान उड़ गया। तिरुअनंतपुरम में इस विमान पर टनों पीने का पानी लादा गया और कुछ ही देर में पानी माले पहुंच भी गया। शुक्रवार को ही 200 टन पानी पहुंचा दिया गया और शनिवार को भी इतना ही पानी। इसी बीच नौसेना के दो जहाज- आईएनएस सुकन्या और आईएनएस दीपक भी माले रवाना किए गए।
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यह एक सामान्य घटना है। पर एक बड़ा संकेत भी है कि भारत अब अपने पड़ोसी देशों द्वारा नेता स्वीकार किया जा चुका है। एक तरह से मोदी सरकार की रणनीतिक जीत भी, क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान में जिस तरह मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगला जा रहा है और इसे मुस्लिम विरोधी सरकार के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ सार्क देशों के बीच का एक मुस्लिम देश सीधे भारत पर पूरा भरोसा कर रहा है। उसने पीने के पानी की मांग की। जबकि पाकिस्तान में पेयजल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और उसे मालदीव पहुंचाना भी आसान होता। इसका मतलब साफ है कि पाकिस्तान की घृणा की राजनीति उसके अपने ही हमधर्मी देशों में भी अलग-थलग पड़ गई है।
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पाकिस्तान दरअसल नफरत की नीति पर चल रहा है। उसका मकसद अपने पड़ोसी देश भारत के साथ निरंतर शत्रुतापूर्ण रिश्ते बनाए रखना है। इससे एक तरफ तो पाकिस्तान सेना में मौजूद हथियार लॉबी को सीधे फायदा होता है, दूसरी तरफ युद्धोन्माद बनाए रखने से पाकिस्तान में जो भी सरकार बनती है, वह सेना की कठपुतली होती है। इस तरह पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और वहां मौजूद आतंकवादी तत्व पाकिस्तानी सरकार को भारत विरोधी बनाने में कामयाब रहते हैं। इसके लिए वे इस्लामी एकता के नाम का सहारा लेते हैं। पर मालदीव ने दिखा दिया कि धर्म नहीं, इंसानियत की एकता भारत में है। और यह एकता परस्पर संकट में एक-दूसरे का सहारा बनने में सहायक होती है।

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