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चीन की जगह लेता भारत
विंदु गोयल
Updated Mon, 28 Sep 2015 08:13 PM IST
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अमेरिकी तकनीकी कंपनियां भारतीय तकनीकी उद्योग के प्रमुख केंद्र बंगलूरू के राकेश पचौरी एवं उनके परिवार के लोगों का दिल जीतने की कोशिश में लगी हैं। कंस्ट्रक्शन व्यवसाय से जुड़े राकेश जहां अपने स्मार्टफोन से सिनेमा का टिकट बुक कराते और डोमिनो का पिज्जा मंगवाते हैं, वहीं उनकी पत्नी ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ यू-ट्यूब से वीडियो और अपनी चार साल की बिटिया के लिए गूगल प्लेस्टोर से गेम्स डॉउनलोड करती हैं। वे हमेशा वाट्सऐप और फेसबुक के जरिये एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं।
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पचौरी परिवार का तकनीकी प्रेम यह समझने के लिए पर्याप्त है कि क्यों अमेरिकी इंटरनेट कंपनियां अब चीन के बजाय भारत में अपने लिए संभावनाएं देख रही हैं। चीन द्वारा प्रतिबंधित करने और वहां की सरकार की कठोर शर्तों से निराश फेसबुक, गूगल एवं ट्विटर जैसी कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप एवं निवेशक भारत में अपने लिए संभावनाएं देख रहे हैं। गूगल के पूर्व एक्जक्यूटिव पुनीत सोनी, जो हाल ही में फ्लिपकार्ट के मुख्य उत्पाद अधिकारी बनकर भारत आए हैं, बताते हैं कि 'मैं भारत में संभावनाएं तलाश रहा हूं और यह सोच रहा हूं कि पांच वर्ष पहले चीन सबके आकर्षण का केंद्र था, लेकिन हमने वह मौका गंवा दिया, पर अब भारत में मेरे लिए अवसर है।'
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दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के प्रति बढ़ते आकर्षण को हालिया घटनाक्रम से समझा जा सकता है। सिएटल में अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के एक्जक्यूटिव के साथ एक मीटिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जहां अपनी सरकार की सख्त इंटरनेट नीतियों पर अडिग थे, वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अमेरिकी दौरे में इन कंपनियों को आकर्षित करने के प्रति उत्सुक दिख रहे हैं। सिलिकॉन वैली में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला और गूगल के सुंदर पिचाई समेत प्रौद्योगिकी कंपनियों के दिग्गजों के साथ रात्रिभोज में हिस्सा लिया। फेसबुक के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, भारत की प्रगति के लिए जरूरी है कि नेता ऑनलाइन रहें। कुल मिलाकर सिलिकॉन वैली के लिए मोदी का संदेश यही है कि भारत को इंटरनेट महाशक्ति बनाने में मदद करें।
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दो वर्ष पहले एक डिजिटल राष्ट्र के रूप में भारत की कल्पना करना भी मुश्किल था। इंटरनेट की पहुंच बहुत कम लोगों तक थी, मोबाइल फोन का नेटवर्क बहुत धीमा था और बेसिक फोन की भीड़ में स्मार्टफोन कम लोगों के पास था। लेकिन वर्ष 2013 से स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या भारत में तेजी से बढ़ने लगी और ई-मार्केटर के अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष यह आंकड़ा 1.68 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है। गूगल पर मोबाइल के जरिये सर्वाधिक सर्च अमेरिका के बाद भारत में ही होता है। गूगल सर्च के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुनीत सिंघल (जो पच्चीस वर्ष पहले भारत से अमेरिका जा बसे) बताते हैं, फिर भी हम आम लोगों के लिए इंटरनेट मुश्किल से ही उपलब्ध करा पाए हैं।
भारत के लोग लंबे समय से एक-दूसरे से ऑनलाइन जुड़ना पसंद करते रहे हैं। शुरुआती सोशल नेटवर्क फ्रेंडस्टर के विकास में भारतीयों का बड़ा योगदान रहा। इसलिए हैरानी नहीं कि फेसबुक के 13.2 करोड़ उपभोक्ता भारतीय हैं और इस मामले में भारत सिर्फ अमेरिका से पीछे है। वाट्सऐप भारत में काफी लोकप्रिय है, जो उस देश के लोगों को मुफ्त में संदेश भेजने और बात करने की सुविधा प्रदान करता है, जहां के ज्यादातर लोगों की रोजाना आय बहुत कम है। ऐप एनी कंपनी के मुताबिक, फेसबुक मैसेंजर भारत में दूसरे नंबर पर है।
लेकिन अब भी भारत में कई चुनौतियां हैं। इंटरनेट डॉट ओआरजी नियामकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गया है, जो चिंतित हैं कि फेसबुक अपनी सेवाओं का पक्ष ले रहा है। मोदी के आगे बढ़कर प्रयास करने के बावजूद सरकारी एजेंसियां प्रतिकूल एवं आक्रामक सामग्रियों को प्रतिबंधित करने की कोशिश कर रही हैं। पिछले वर्ष फेसबुक को भारत सरकार की ओर से सूचनाएं हटाने की 10,792 मांग की गई थी, जो किसी भी अन्य देश से अधिक थी। पैसा कमाना भी भारत में बहुत मुश्किल है, जहां ई-मार्केटर के अनुसार, इस वर्ष डिजिटल विज्ञापन पर करीब 94 करोड़ डॉलर खर्च होने की संभावना है।
इंटरनेट कंपनियों का कहना है कि वे दीर्घकालीन उद्देश्य के तहत काम कर रहे हैं। अभी ज्यादा से ज्यादा लोगों को ऑनलाइन करने पर ध्यान केंद्रित है, बाद में मुनाफा कमाएंगे। जैसे, गूगल ने वर्ष 2017 तक 50 करोड़ भारतीय को ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा है। इन नए लोगों में से ज्यादातर गूगल एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम (भारतीय स्मार्टफोन बाजार में जिसका ज्यादा उपयोग होता है) से चलने वाले फोन का इस्तेमाल करेंगे। इससे गूगल को अपने सर्च एवं यू-ट्यूब सेवाओं के साथ-साथ विज्ञापनों को ग्राहकों के सामने रखने का मौका मिलेगा।
हालांकि ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को ऑनलाइन लाने के प्रयास ने प्रौद्योगिकी कंपनियों को कुछ बुनियादी मान्यताओं को फिर से जांचने के लिए मजबूर किया है। छह में से मात्र एक भारतीय ही इंटरनेट पर सर्फ करने लायक अंग्रेजी जानते हैं और हिंदी एवं देश की अन्य 21 आधिकारिक भाषाओं में इंटरनेट पर बहुत कम पेज हैं। गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी तमाम कंपनियों ने ज्यादा भारतीय भाषाओं को जोड़ा है और डेवलेपर्स एवं उपभोक्ताओं को स्थानीय भाषाओं में ज्यादा सामग्री तैयार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भारत के खराब डाटा कनेक्शन से निपटने के लिए गूगल सर्वर पर वेब पेज को संक्षिप्त कर रहा है, ताकि 80 फीसदी कम डाटा खर्च हो और चार गुना ज्यादा तेजी से काम करे।
जिन लोगों ने इंटरनेट का कभी उपयोग नहीं किया है, उन तक पहुंचने के लिए गूगल ने इंटेल के साथ साझेदारी की है। अब तक सौर ऊर्जा से संचालित टैबलेट एवं स्मार्टफोन से लैस 200 बाइक सड़कों पर हैं और गूगल को इनकी संख्या दस हजार तक बढ़ने की उम्मीद है।