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अर्थव्यवस्था: विकसित देश बनने की राह पर भारत, कारगर साबित होंगी बेहतर नीतियां

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सार
बेहतर नीतियों से अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और इसी कारण प्रति व्यक्ति आय के मौजूदा दो लाख से बढ़कर 2047 में 14.9 लाख रुपये होने का अनुमान है।
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India on path of to become developed country better economic policies will prove effective
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

आजादी के 100वें वर्ष, यानी 2047 में भारत दुनिया का शक्तिशाली देश बन सकता है, इसका पता लोगों द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न के विश्लेषण से चलता है। देश की आबादी अभी 140 करोड़ है, जिसके 2047 में 161 करोड़ होने का अनुमान है। फिलहाल देश में कामगारों की संख्या 53.0 करोड़ है, जो 2047 में बढ़कर 72.5 करोड़ हो सकती है। आयकरदाताओं की संख्या अभी 31.3 करोड़ है, जो 2047 में बढ़कर 56.5 करोड़ हो सकती है।



संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, वर्ष 2040 तक 15 से 64 साल उम्र वाले कामगारों की संख्या उच्च स्तर पर रहेगी, पर उसके बाद इसमें कमी आएगी। आकलन बताता है कि 2047 में 22 फीसदी कामगार ही कृषि से जुड़े रहेंगे। चूंकि, कृषि क्षेत्र में कार्यरत किसानों को आयकर से छूट प्राप्त है, इसलिए किसानी में कामगारों की संख्या घटने और दूसरे क्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ने से आयकर संग्रह में वृद्धि होगी।


निर्धारण वर्ष 2023 में लोगों की भारित औसत आय 13 लाख रुपये हो गई, जो 2047 में बढ़कर 49.7 लाख रुपये होने का अनुमान है। निर्धारण वर्ष 2023 में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या वर्ष 2022 की 7.3 करोड़ से बढ़कर 7.8 करोड़ हो गई है। इनमें से 5.8 करोड़ या 75 प्रतिशत आयकर रिटर्न निर्धारित तारीख से पहले दाखिल की गई। निर्धारित तिथि के बाद दंड शुल्क के साथ आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में भारी कमी आई है।

निर्धारण वर्ष 2023 में सबसे ज्यादा आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले पांच राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल हैं। छोटे राज्यों में मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड में विगत नौ वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 20 फीसदी की वृद्धि हुई। निर्धारण वर्ष 2015 की तुलना में 2023 में 4.81 करोड़ अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए और 2023 में 2020 के मुकाबले एक करोड़ अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए।

रिटर्न दाखिल करने वालों के कार्यस्थल और उनके स्थायी निवास में अंतर देखने में आया है, जिसका कारण कामगारों का रोजगार हेतु दूसरे प्रदेशों में पलायन करना है। निर्धारण वर्ष 2011 में 1.6 करोड़ या 84 फीसदी लोग आयकर के पांच लाख रुपये वाले स्लैब में आते थे, जिनकी संख्या निर्धारण वर्ष 2023 में बढ़कर 6.85 करोड़ हो गई।

विगत कुछ वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या और उनकी आय, दोनों में इजाफा हुआ है। 2012 के मुकाबले 2023 में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों में 13.6 फीसदी ने पांच लाख रुपये से ऊपर वाले स्लैब में शिफ्ट किया है, जिनमें से 8.1 फीसदी लोगों ने पांच लाख से 10 लाख के स्लैब में, 3.8 फीसदी ने 10 लाख से 20 लाख रुपये के स्लैब में, जबकि 1.5 फीसदी लोगों ने 20 लाख रुपये से 50 लाख के स्लैब में शिफ्ट, 0.2 प्रतिशत लोगों ने 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के स्लैब में और 0.02 फीसदी लोगों ने एक करोड़ रुपये से ऊपर के स्लैब में शिफ्ट किया है।

अनुमान है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करीब 27 फीसदी लोग 2047 में नीचे से ऊपर के स्लैब में शिफ्ट कर जाएंगे। ऐसे 17.5 फीसदी लोग पांच लाख रुपये से 10 लाख रुपये वाले स्लैब में, जबकि पांच फीसदी लोग 10 लाख से 20 लाख रुपये वाले स्लैब में शिफ्ट करेंगे। तीन फीसदी लोग 20 लाख से 50 लाख के स्लैब में, 0.5 फीसदी लोग 50 लाख से एक करोड़ रुपये के स्लैब में और 0.075 फीसदी लोग एक करोड़ से ऊपर के स्लैब में शिफ्ट करेंगे।

आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या और आयकर संग्रह में वृद्धि के अनेक कारण हैं, जैसे निम्न आय वर्ग के लोगों की आय में वृद्धि, वैसे लोगों की संख्या में इजाफा, जो पहले आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे, तथा कम या शून्य आय दिखाने वाले लोगों की संख्या में कमी। यानी सरकार की बेहतर नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और इसी वजह से प्रति व्यक्ति आय के मौजूदा दो लाख रुपये से बढ़कर 2047 में 14.9 लाख रुपये होने का अनुमान है।

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