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स्वतंत्रता दिवस: समता और न्याय लोकतंत्र के मूल मंत्र, सत्य-अहिंसा का मार्ग ही संवारेगा भविष्य

Tue, 15 Aug 2023 06:35 AM IST
Ramji Singh रामजी सिंह
Updated Tue, 15 Aug 2023 06:35 AM IST
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सार
एक गरीब मुल्क से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। सत्य, अहिंसा और संयम का मार्ग ही भारत को और पूरी दुनिया को भविष्य की राह पर आगे बढ़ाएगा।
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Independence Day 2023 equality justice are basic principles of democracy truth-non-violence will shape future
स्वतंत्रता दिवस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मेरा सौभाग्य है कि मुझे 15 अगस्त, 1947 से लेकर अब तक हर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने का अवसर मिला है। सात दशकों से लंबे इस सफर में हमने कई चुनौतियां झेली हैं और बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता से आजादी पाने के बाद हमने कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल आदि जीवन के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय कीर्तिमान रचे हैं। हमारा लोकतंत्र न केवल मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंचों पर हमारी प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।



जब हमने आजादी हासिल की थी, तब हमारा देश गरीब था। हमें अपने नागरिकों तक का पेट भरने के लिए दूसरे देशों से अनाज मंगाना पड़ता था। मगर आज हम न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुके हैं, बल्कि दूसरे देशों को भी खाद्यान्न की आपूर्ति करते हैं। एक गरीब मुल्क से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है और यह उपलब्धि केवल कुछ लोगों और कुछ वर्षों का हासिल नहीं है। इसमें अब तक की सभी सरकारों, किसानों, नागरिकों और राजनीतिक दलों का योगदान है।


इन उपलब्धियों के बावजूद आज जब हम अपने अब तक के सफर का लेखा-जोखा करने बैठते हैं, तब हमें बहुत-सी कमियां नजर आती हैं। रामायण एवं महाभारत के समय के इतिहास को छोड़ भी दें, और अपने देश के आधुनिक इतिहास पर नजर डालें, तो पता चलता है कि इस देश को बनाने और सजाने-संवारने में हर धर्म, पंथ, समुदाय, जाति, वर्ग के लोगों का योगदान रहा है। विविध वर्गों, समुदायों, धर्मों के लोगों में भारतीयता की भावना का विकास करने में महात्मा गांधी एवं उनके सहयोगियों का बड़ा योगदान रहा है। हालांकि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी का प्रवेश 20वीं शताब्दी में हुआ, लेकिन आजादी की लड़ाई 1857 में ही शुरू हो गई थी। आखिरी मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के इस शेर से भला कौन परिचित नहीं होगा-गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख्ते लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।

हमारे लोकतंत्र के मूल मंत्र हैं समता और न्याय। लेकिन आज आत्मविश्लेषण करने पर लगता है कि अपने नागरिकों को समता और न्याय दिलाने का सपना अधूरा ही है। विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है और हमारी गंगा-जमनी तहजीब की मिसाल दी जाती रही है। लेकिन आज कुछ ताकतें भाई-भाई के बीच अलगाव की भावना पैदा करने में लगी हैं। इस देश के लोग स्वभाव से शांतिप्रिय रहे हैं, लेकिन राजनीतिक स्वार्थी तत्वों के उकसावे के कारण नागरिक जीवन में हिंसा का बोलबाला बढ़ गया है। गांधी जी कहा करते थे, कि आंख के बदले आंख का सिद्धांत सारी दुनिया को अंधा कर देगा।

आज भी अगर हम गांधी जी के बताए हुए मार्ग पर आगे बढ़ें, तो कोई ताकत नहीं है कि हमें परास्त कर पाए। सत्य, अहिंसा और संयम का मार्ग ही भारत को और पूरी दुनिया को भविष्य की राह पर आगे बढ़ाएगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं।

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