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चौतरफा घिरते इमरान खान, विपक्ष और जनता कर रही जबर्दस्त विरोध

Sat, 06 Feb 2021 02:24 AM IST
कुलदीप तलवार कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Published by: कुलदीप तलवार Updated Sat, 06 Feb 2021 02:24 AM IST
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Imran Khan in trouble after opposition and public is fiercely protesting
प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : twitter.com/PakPMO

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को विपक्ष और जनता के जबर्दस्त विरोध का सामना तो करना ही पड़ रहा है, हाल ही में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में घुसकर आतंकवादियों को मारकर अपने दो सैनिकों को जिस तरह मुक्त कराया, उससे दुनिया भर में पाकिस्तान की भारी किरकिरी हो रही है। ईरान द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन में कई पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं, जो आतंकवादियों को सुरक्षा प्रदान कर रहे थे। ईरान द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन से भारत का दावा एक बार फिर सच साबित हुआ है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है। यह उस देश का हाल है, जिसके पास कोरोना वैक्सीन लेने के लिए भी रकम नहीं है। कहीं से कर्ज नहीं मिल रहा। सऊदी अरब जैसे पुराने मित्र ने भी पहले दिया हुआ कर्ज वापस लेने के लिए अल्टीमेटम दे दिया है। चीन ने भी नया कर्ज देने के लिए गारंटी मांगी है। मलयेशिया जैसे दोस्त देश ने भी कर्ज वापस न देने के कारण पाकिस्तान के दो हवाई जहाज जब्त कर लिए हैं। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि सरकार ने 759 एकड़ में फैले इस्लामाबाद के सबसे बड़े पार्क को गिरवी रख दिया है। प्रधानमंत्री इमरान खान इस्राइल से हाथ मिलाने की फिराक में हैं, जिसका विरोध हो रहा है।


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सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के अवाम ने पाकिस्तान से अलग होने की मांग करते हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शन बढ़ा दिए हैं। सिंधी राष्ट्रवादियों ने हाल ही में सिंधु देश की आजादी की मांग को लेकर एक विशाल रैली निकाली है। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व विश्व के अन्य नेताओं की फोटो हाथ में लेकर सरकार-विरोधी नारे लगाए और सिंध देश को आजादी दिलाने के लिए भारत से दखल देने की प्रार्थना की। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सिंधु घाटी सभ्यता वैदिक धर्म का घर है। ब्रिटिश साम्राज्य ने इस पर जबरन कब्जा कर लिया था और बंटवारे के समय इसे इस्लामी हाथों में सौंप दिया था। सिंध देश को आजादी दिलाने की मांग पुरानी है। पिछले कुछ दशकों से पाक सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रवादी नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्रों को प्रताड़ित कर रही हैं। जेई सिंध मुत्ताहिदा के अध्यक्ष गुलाम मुर्तजा के 117 वें जन्मदिन पर इस संस्था के नेता शफी अहमद बरफल ने कहा है कि सिंध की संस्कृति और परंपरा पाकिस्तान से अलग है। लेकिन सिंध राष्ट्रवाद पर पंजाबी राष्ट्रवाद हावी है। सिंध में 70 फीसदी आबादी मुहाजिरों की है। लेकिन उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिला। पाकिस्तान सिंध के द्वीपों पर बंदरगाहों और सामरिक क्षेत्रों को चीन के हवाले करता जा रहा है। सिंधी राष्ट्रवादियों का कहना है कि बांग्लादेश की तरह सिंध भी आजाद होकर रहेगा। 

एक और प्रांत बलूचिस्तान में तो बंटवारे के समय से ही पाकिस्तान से अलग होने की मांग की जा रही है। राष्ट्रवादी बलूचियों का कहना है कि वे कभी पाकिस्तान में शामिल होना नहीं चाहते थे। इसलिए बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का नाजायज कब्जा है। हाल ही में वहां अल्पसंख्यक हजारा समुदाय के 11 मजदूरों की सामूहिक हत्या कर दी गई। हाल ही में विश्व स्तर पर बलूच आबादी के अधिकारों की मांग उठाने वाली करीमा बलूच की टोरंटों में संदिग्ध हालत में लाश पाई गई। इसके पीछे भी आईएसआई का हाथ बताया जा रहा है। वहां के प्राकृतिक संसाधनों पर केंद्र सरकार का अधिकार बना हुआ है और चीन इस क्षेत्र को अपनी कॉलोनी बनाता जा रहा है। पिछले एक दशक में बलूचिस्तान में 18,000 से ज्यादा बलोच युवकों की पाक सेना हत्या कर चुकी है। दुनिया जानती है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जिस पर पाक ने जबर्दस्ती कब्जा कर रखा है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 व 35ए खत्म करने के बाद वहां के लोग भारत के साथ रहने के लिए बेचैन हैं। पाक सरकार इस क्षेत्र को चीन को सौंप रही है और चीनी लोगों को वहां बसा रही है। पिछले दिनों वहां चीनी सेना द्वारा 33 किलोमीटर लंबी सड़क बनाए जाने का भारी विरोध हुआ। गिलगित-बाल्टिस्तान में भी सरकार-विरोधी प्रदर्शन जारी है।

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