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इसलिए भी कोई किसी के मरने की दुआ मांगे, आप सोच नहीं सकते

Mon, 09 Feb 2015 09:11 AM IST
गुणभद्र
गुणभद्र Updated Mon, 09 Feb 2015 09:11 AM IST
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immotion changes after behave

अवंतिका नरेश अजित वर्मन लोगों का हाल-चाल जानने के लिए महीने में कम से कम एक बार नगर में निकलते थे। उनका भ्रमण पूर्णिमा या प्रतिपदा को होता। एक भ्रमण में राजा ने देखा कि एक दुकान पर बैठा व्यापारी असहज दिख रहा है। उन्हें व्यापारी के चेहरे पर चिंता और खीझ दिखाई दी। नजरें मिलीं, तो उन्होंने पाया कि व्यापारी की आंखों में नफरत का भाव भी था। देखते ही उसने राजा की ओर से नजरें पलट दी।

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अकारण उपजते द्वेष भाव ने राजा को विचलित कर दिया। महल पहुंचकर राजा ने अपने बुद्धिमंत प्रधान को यह बात बताई। प्रधान ने राजा को कारण का पता लगाने और उस व्यापारी की समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। दूसरे ही दिन प्रधान उस व्यापारी की दुकान पर गया और हालचाल पूछा। व्यापारी ने बताया कि वह चंदन की लकड़ी का व्यापारी है, आजकल धंधे में घोर मंदी होने के कारण बिक्री बिलकुल भी नहीं हो रही, इसलिए वह परेशान है।
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प्रधान ने तत्काल राजमहल में उपयोग हेतु प्रतिदिन दस पण (करीब 900 ग्राम) चंदन पहुंचाने का आदेश दिया। इसके साथ ही राजकोष से प्रतिदिन भुगतान की व्यवस्था भी कर दी। अगले ही नगर-भ्रमण के दौरान उस व्यापारी को देखकर राजा को लगा कि उसकी भाव भंगिमा बदली हुई है। अजित वर्मन ने प्रसन्न मुद्रा में प्रधान की ओर दृष्टि घुमाई, प्रधान ने भी मुस्कराकर अभिवादन किया।
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प्रधान ने राजा को बताया कि बिक्री न होने के कारण व्यापारी के मन में बुरे विचार उठते थे। वह सोचता था कि राजा मर जाए, तो चंदन की लकड़ी बिक जाए। इसी कारण वह आपको दुर्भाव से देखता था। मैंने प्रतिदिन उसके चंदन की बिक्री की व्यवस्था कर दी, लिहाजा उसके चिंतन की दिशा बदल गई है।

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