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मानकों की अनदेखी: समुद्रों में रसायनों का रिसाव चिंताजनक... जहाजों की नियमित तकनीकी जांच और मुस्तैदी जरूरी

Wed, 28 May 2025 05:51 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 28 May 2025 05:51 AM IST
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सार
भारतीय तटरक्षक बल व नौसेना के कौशल से लाइबेरिया के डूबते जहाज के क्रू सदस्यों को तो बचा लिया गया, लेकिन इससे खतरनाक रसायनों के रिसाव की आशंकाएं चिंताजनक हैं। वहीं, पुराने जहाज पर क्षमता से अधिक बोझ होना वैश्विक शिपिंग उद्योग में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय जवाबदेही की जरूरत को ही दर्शाता है।
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Ignoring standards chemical Leakage in ocean alarming Regular technical inspection of ships is necessary
समुद्रों में रसायनों का रिसाव चिंताजनक - फोटो : अमर उजाला वीडियो

विस्तार

भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने तत्परता का परिचय देते हुए केरल तट के पास समुद्र में डूबते एक लाइबेरियाई कंटेनर पोत पर सवार सभी चौबीस क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर तो निकाल लिया, लेकिन जहाज पर मौजूद कंटेनरों से तेल व खतरनाक रसायनों के रिसाव की जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, वे वाकई चिंताजनक हैं।



तब तो और भी, जब मानसून समय से पहले आ गया है और यह समय मछलियों के प्रजनन काल का होता है। हालांकि, तटरक्षक बलों समेत अन्य एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं, लेकिन यह देखते हुए कि डूबे जहाज में करीब 640 कंटेनर थे, जिनमें कई खतरनाक रसायन भी थे, शंकाएं स्वाभाविक ही हैं।


इससे 2017 में चेन्नई के एन्नोर तट पर दो मालवाहक जहाजों के टकराने के हादसे की याद ताजा हो जाती है, जिससे बड़े पैमाने पर तेल रिसाव हुआ था। ताजा हादसे में सबसे बड़ा खतरा वे बारह कंटेनर हैं, जिनमें कैल्शियम कार्बाइड भरा हुआ है, जो पानी से प्रतिक्रिया कर पानी में ऑक्सीजन के स्तर को तो कम कर ही सकता है, एसिटिलीन जैसी बेहद ज्वलनशील गैस भी बनाता है, जो बड़े विस्फोट की वजह भी बन सकती है।

यही नहीं, इस प्रक्रिया में बनने वाला कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड पानी की क्षारीयता को बढ़ाकर केरल के नाजुक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि जब तेल का पानी पर रिसाव होता है, तो कम घनत्व की वजह से वह पानी के ऊपर एक परत जमा देता है, जिससे पानी के भीतर सूर्य का प्रकाश नहीं जा पाता। इससे समुद्री पौधों के प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है और पूरा तंत्र ही डांवाडोल होने लगता है।

कोल्लम और अलप्पुझा जैसे तटीय जिलों में पहले ही कुछ कंटेनर तट तक पहुंच चुके हैं, जिसने चिंता को और बढ़ा दिया है। केरल सरकार ने अलर्ट जारी किया है और मछुआरों को भी इन कंटेनरों के नजदीक न जाने की चेतावनी दी है। ये कंटेनर स्टील के बताए जा रहे हैं और अगर इनमें से तेल बाहर नहीं आया है, तो फिर खतरे की कोई बात नहीं है।

लेकिन अगर तेल समुद्र में फैलने की पुष्टि होती है, तो फिर माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों तक स्थितियों पर नजर रखनी होगी। उल्लेखनीय है कि लाइबेरियाई जहाज पुराना तो था ही, इसका पिछला इतिहास 2016 में हुई टक्कर के बाद इसके ढांचे और मशीनरी को गंभीर क्षति होने का संकेत देता है।

ऐसे में, इस संकट ने एक बार फिर वैश्विक शिपिंग उद्योग में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय जवाबदेही की जरूरत को उजागर किया है। सरकार प्रदूषण नियंत्रण के सभी संभव प्रभावी उपाय कर ही रही है, लेकिन वर्तमान संकट जहाजों की नियमित तकनीकी जांच, पर्यावरणीय मानकों की अनिवार्यता और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की मुस्तैदी का सबक तो देता ही है।

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