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इंसान और स्मृति: क्या आपको भी भूलने की आदत है, गंभीर संकेतों को अनदेखा करना घातक, जानिए बचाव के तरीके
Sun, 16 Feb 2025 05:35 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
होप रीस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
होप रीस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 16 Feb 2025 05:35 AM IST
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अधिकतर लोगों का मानना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारी याददाश्त घटने लगती है। हालांकि, जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट और मस्तिष्क के काम करने के तरीकों पर 20 से ज्यादा किताबें लिख चुके डॉ. रिचर्ड रेस्टक उम्र और स्मृति के बीच संबंध को अनिवार्य नहीं मानते। उनकी हालिया किताब द कंप्लीट गाइड टू मेमोरी : द साइंस ऑफ स्ट्रेंथनिंग योर माइंड के अनुसार, मानसिक व्यायाम, सोने की आदतें और आहार स्मृति को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।
डॉ. रिचर्ड बताते हैं कि हमारी कार्यशील स्मृति, तात्कालिक और दीर्घकालिक स्मृति के बीच आती है, और बुद्धिमत्ता, एकाग्रता और उपलब्धि से जुड़ी होती है। डॉ. रेस्टक कहते हैं कि इस कार्यशील स्मृति को दुरुस्त करने के लिए हमें प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए। वह कुछ भूलों की बात करते हैं, जिन्हें सुधार कर याददाश्त को मजबूत बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि जो हमें याद रहता है, वही हमारे व्यक्तित्व को आकार देता है।
अगर आप तनाव में रहते हैं या फिर मोबाइल-कंप्यूटर में जरूरत से ज्यादा डूबे रहते हैं, तो फिर आप को अपनी याददाश्त का ख्याल रखने की जरूरत है। यह भी जरूरी नहीं कि स्मृति की हर समस्या का संबंध आपके दिमाग से ही हो। किसी पार्टी में एक व्यक्ति ने आपको अपना नाम बताया, लेकिन आपका ध्यान उसकी बातों पर नहीं था। कुछ घंटे बाद, जब आप उसका नाम याद करेंगे, तो शायद वह आपको ध्यान में न आए। यह कमजोर याददाश्त का मामला नहीं, बल्कि ध्यान न देने की आदत का नतीजा है। आप जब दिन भर के कामों की सूची बनाएं, तो उसमें यह भी जोड़ें कि इसमें कौन-से काम आपको बगैर मोबाइल फोन के करने हैं।
मोबाइल फोन आज हमारी जिंदगी में ऐसे शामिल हैं, कि मैसेज आने के संकेत भर से हम कूद कर मोबाइल उठा लेते हैं। यह अपने ध्यान को किसी एक बिंदु पर बांध कर रखने जैसा है। इसके अलावा, जब भी हमें कहीं जाना होता है, तो जीपीएस हमारे काम आता ही है। लेकिन 2020 में हुए अध्ययन के अनुसार, जीपीएस का ज्यादा उपयोग करने वालों की याददाश्त में भारी संज्ञानात्मक गिरावट देखी गई।
आप जीपीएस के बगैर जाकर तो देखें, अगर रास्ता भूल गए, तो किसी अनजान से मदद लेने का भी अलग सुख है। ब्रिज व शतरंज जैसे खेल खेलें, जो मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने से जुड़े हैं। डॉ. रेस्टक कहते हैं कि अपने होटल के कमरे का नंबर भूलना सामान्य बात है, लेकिन अगर आप अपने मकान का नंबर ही भूलने लगे, तो यह गंभीर बात जरूर हो सकती है।