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चीन का विकल्प बनने की उम्मीद

Fri, 13 Mar 2020 07:57 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Fri, 13 Mar 2020 07:57 AM IST
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Hope to become an alternative to china
जयंतीलाल भंडारी

वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय जब कोरोना से प्रभावित चीन कई वस्तुओं का निर्यात करने में सक्षम नहीं है, तब भारत वैश्विक निर्यात बाजार में इलेक्ट्रिक आइटम, वाहन, ऑर्गेनिक रसायन, वस्त्रोद्योग एवं चमड़ा जैसे क्षेत्रों में चीन का विकल्प बन सकता है। भारत से निर्यात बढ़ने के तीन स्पष्ट कारण हैं। एक, कोरोना  के कारण चीन से जिन देशों को निर्यात घट गए हैं, वहां भारत नए निर्यात-मौकों को भुना सकता है। दो, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बन गया है और अमेरिका में निर्यात बढ़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं, और कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी होने, मेक इन इंडिया को प्राथमिकता देने तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन व सस्ते श्रम के कारण उन देशों में भी भारतीय निर्यात बढ़ने की संभावनाएं हैं, जहां अब तक निर्यात नगण्य हैं।


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चीन में कोरोना वायरस का असर वहां के उद्योग-कारोबार तथा निर्यात पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वहां बड़ी संख्या में कारखाने बंद हैं या कम क्षमता से चल रहे हैं। वहां कोयले की खपत 75 फीसदी घट गई है। कई बड़ी कंपनियों ने चीन में अपना कारोबार बंद कर दिया है तथा पिछले दो महीने में उसके निर्यात में करीब 17 फीसदी गिरावट आ गई है। ऐसे में, भारत के लिए संभावनाएं बनी हैं। ऐसे ही, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के कारण भारत के लिए जो मौके बढ़ रहे थे, कोरोना के कारण वे अब मजबूत संभावनाओं में बदल गए हैं। वर्ष 2018-19 में अमेरिका ने चीन को पीछे छोड़ भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर होने का तमगा हासिल कर लिया। 2018-19 में भारत और अमेरिका के बीच 87.95 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। जबकि इस दौरान भारत का चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 87.07 अरब डॉलर रहा। अमेरिका में भारतीय निर्यात बढ़ने की संभावना इसलिए है, क्योंकि अमेरिका उन चुनिंदा देशों में से है, जिसके साथ व्यापार संतुलन का झुकाव भारत के पक्ष में है। वर्ष 2018-19 में भारत का चीन के साथ जहां 53.56 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा था, वहीं अमेरिका के साथ 16.85 अरब डॉलर के व्यापार लाभ की स्थिति में था। हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा प्रकाशित शोध पत्र ‘इंडियन एक्सपोर्ट द नेक्स्ट ट्रैजेक्टरी मैपिंग प्रोडक्ट्स ऐंड डेस्टिनेशंस’ में ऐसी 37 प्रमुख वस्तुओं को चिह्नित किया गया है, जिनमें भारत से निर्यात बढ़ाने की क्षमता बहुत अधिक है। इनमें महिलाओं के परिधान, दवाएं, फर्नीचर, साइकिल, हाइड्रोकार्बन जैसी वस्तुएं हैं।

निर्यात बढ़ाने के लिए निर्यातकों को सस्ती दरों पर और समय पर कर्ज दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। सरकार द्वारा अन्य देशों की गैर शुल्कीय बाधाएं, मुद्रा का उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क अधिकारियों से निपटने में मुश्किल और सेवा कर जैसे निर्यात को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों से निपटने की रणनीति जरूरी है। दवा उद्योग के कच्चे माल की चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। सरकार ने नए निर्यात प्रोत्साहनों के साथ ढांचागत सुविधाओं पर ध्यान देने, वैश्विक मानक अपनाने, निर्यात मंजूरी संबंधी कामों को डिजिटल करने आदि का वादा किया है। इससे वैश्विक निर्यात में भारतीय हिस्सेदारी को दो फीसदी तक पहुंचाने का सपना साकार किया जा सकता है।

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