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दिल तो पट्ठा है जी!
अशोक गौतम
Updated Mon, 30 Sep 2013 07:30 PM IST
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क्या करें, जो कमर को लकवा मार गया! हमारी लकवे की मारी कमर न देखिए साहब! कमर की लचक देखिए! क्या करें, जो घुटने जवाब दे गए! पर हमने अपने प्रेम के रास्ते में घुटने नहीं टेके, तो नहीं टेके!
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पता नहीं, आजकल आपको क्या हो गया है कि अगर हम अपनी उम्र को ठेंगा दिखा कुछ नया करने लगें, तो आप हमारे हाथ में हमारी जन्म कुंडली थमा देते हैं? आपको कोई और काम है या नहीं? भला इसी में है कि आप अपना काम करो और हमें हमारा काम करने दो, प्लीज!
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हमारी सांसें फूल रही हैं, तो फूलती रहें! अरे, जब हमें ही अपनी उखड़ती सांसों की परवाह नहीं, तो आप लोग क्यों अपनी उखड़ी सांसें गिनना बीच में ही छोड़ हमारी उखड़ी सांसों को गिनने की तकलीफ कर रहे हो? आपकी नजरों में हमारी टांगें कब्र में झूलती हैं, पर हमें तो हमारी टांगें कैटवॉक के लिए एकदम फिट लग रही हैं। कहो, कहां तक दौड़ लगाएं? हम तो पैदा ही प्रेम करने के लिए हुए हैं। और भगवान से वरदान लेकर आए है कि जब तक इस देश में रहेंगे, जवान होकर ही रहेंगे! आप भले ही हमें बूढ़ा कहते रहिए, हम पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला! हम तो चिकने घड़ों से भी चिकने हैं।
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इसलिए, खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगे हम प्यारे, नहीं किसी से डरेंगे ओ प्यारे! प्यार हम करते हैं चोरी नहीं, राजनीति में मस्ती है, बिलकुल सही! हम जैसे महापुरुषों पर कीचड़ उछाल कर क्यों आप अपने कपड़े गंदे करते हो? इन्हें धोने के लिए जेब में साबुन के पैसे भी हैं क्या?
वैसे भी जवानी का संबंध तन से नहीं, मन से होता है। और हमारा दिल तो अभी पट्ठा है जी! चलो, आपका मन रखने के लिए हम नब्बे के हो जाते हैं। पर नब्बे के बाद क्या आदमी आदमी नहीं रहता? उसके दिल में प्रेम के गीत नहीं फुनफुनाते? आपको जो कहना है, कहते रहिए! हम तो वही करेंगे, दिल जो कहे? अब आपको गलतफहमी हो गई, तो इसका इलाज हमारे पास तो है नहीं! उस रोज हम शहीदों को श्रद्धांजलि देने थोड़े ही गए थे, हम तो बुढ़ापे को श्रद्धांजलि देने गए थे।
और जब आप भी मेरी तरह शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बहाने बुढ़ापे को श्रद्धांजलि दे आएंगे, तो उसके बाद क्या करेंगे? दिल पर हाथ रखकर कहिएगा! आपको अपने दिल की कसम! बुढ़ापे को श्रद्धांजलि देने के बाद दिल के एकबार फिर पट्ठा होने पर भला कौन खुश होकर नाचने नहीं लगेगा!