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गुजरात आगे बढ़ चुका है: पिछले 22 वर्षों में राज्य सांप्रदायिक तनाव के अतीत से निकला... अब सह-अस्तित्व का मॉडल

Wed, 19 Mar 2025 06:07 AM IST
ज्योति भास्कर शेखर अय्यर, वरिष्ठ पत्रकार
शेखर अय्यर, वरिष्ठ पत्रकार Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 19 Mar 2025 06:07 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री मोदी ने लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट में बताया कि 2002 से पहले गुजरात में 250 से ज्यादा बड़े सांप्रदायिक दंगे हुए थे। आज शायद ही उनसे कोई असहमत हो कि पिछले 22 वर्षों में राज्य सांप्रदायिक तनाव के अतीत से निकलकर आर्थिक विकास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मॉडल बन गया है।
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Gujarat moved on In the last 22 years by overcoming communal tensions past now model of coexistence
पॉडकास्ट के दौरान एक दूसरे का अभिवादन करते पीएम मोदी और फ्रिडमैन - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी 2002 में गुजरात दंगों के बाद से अब तक इस पर होने वाली किसी भी चर्चा या बहस को निरर्थक बताते हुए कहते रहे हैं कि गुजरात आगे बढ़ चुका है और उसने अपने सबक सीख लिए हैं। हालांकि, अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट में उन्होंने उन घटनाओं पर अपनी राय रखी, जिनके कारण भारत में सबसे बुरी सांप्रदायिक हिंसा हुई। सबसे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 2002 की गोधरा घटना को (जिसमें 59 लोगों को ट्रेन में जिंदा जला दिया गया था) ‘अकल्पनीय परिमाण की त्रासदी’ कहा। हालांकि, उन्होंने कहा कि ये दंगे गुजरात में हुए सबसे बुरे दंगे नहीं थे, उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले राज्य में सांप्रदायिक हिंसा का लंबा इतिहास रहा है।



फ्रिडमैन के साथ तीन घंटे की बातचीत में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दंगों के बारे में झूठी कहानी फैलाई गई थी। राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनकी सरकार को दोषी ठहराने के प्रयासों के बावजूद अदालतों ने उन्हें निर्दोष पाया था। उन्होंने कहा कि ‘अब तक के सबसे बड़े दंगे की धारणा वास्तव में गलत है। अगर आप 2002 से पहले के आंकड़ों की समीक्षा करेंगे, तो पाएंगे कि गुजरात में लगातार दंगे हुए। कहीं-कहीं लगातार कर्फ्यू लगाया जा रहा था। पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता या यहां तक कि मामूली साइकिल टक्कर जैसी छोटी-मोटी बातों पर भी सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती थी। वर्ष 2002 से पहले गुजरात में 250 से ज्यादा दंगे हुए थे। वर्ष 1969 में करीब छह महीनों तक दंगा चला था। इसलिए मेरे आने से बहुत पहले से इसका लंबा इतिहास रहा है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 22 वर्षों में राज्य में एक भी बड़ा दंगा नहीं हुआ। ‘यह महत्वपूर्ण बात है, खासकर गुजरात के लिए, जहां हर साल किसी न किसी तरह से दंगे होते थे। गुजरात अब पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।’


प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट स्वीकार किया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तब वह प्रशासन में नए थे और दंगे उसके तुरंत बाद ही हुए। गोधरा की घटना उनके पहली बार राज्य का प्रतिनिधि चुने जाने के कुछ दिन बाद हुई। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि दंगों से पहले से ही गुजरात की स्थिति खराब थी। जिस गोधरा घटना के बाद दंगे हुए, उसे याद करते हुए मोदी ने कहा कि वह एक ‘अस्थिर समय’ था, जब भारत सहित दुनिया भर में बड़े-बड़े आतंकी हमले हो रहे थे। उन्होंने 1999 में कंधार विमान अपहरण, 2000 में लाल किले पर हमले से लेकर अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले और दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमले तक भारत और दुनिया को हिला देने वाली कई घटनाओं को याद किया। 

प्रधानमंत्री ने पॉडकास्ट में कहा कि ‘काठमांडो से दिल्ली जा रहे भारतीय विमान को अपहृत करके अफगानिस्तान के कंधार में उतारा गया और सैकड़ों भारतीय यात्रियों को बंधक बनाकर रखा गया। इसने पूरे भारत में भारी उथल-पुथल मचा दी, क्योंकि लोगों को जीवन और मृत्यु की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। फिर दिल्ली के लाल किले पर आतंकवादियों ने हमला किया। इसने भय और अशांति को और बढ़ा दिया। उसके बाद अमेरिका में ट्विन टावर पर हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हिला दिया। फिर अक्तूबर, 2001 में जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा पर आतंकी हमला हुआ और उसके तुरंत बाद दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद को निशाना बनाया गया।’

उन्होंने कहा कि ‘सिर्फ आठ से दस महीनों के भीतर ही ये बड़े वैश्विक आतंकवादी हमले हुए, हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें खून-खराबे के कारण निर्दोष लोगों की जानें गईं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में छोटी-सी चिंगारी भी अशांति को भड़का सकती है। स्थिति पहले से ही बदतर हो चुकी थी। अचानक सात अक्तूबर, 2001 को मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी।’ उन्होंने कहा कि गुजरात उस विनाशकारी भूकंप से उबर रहा था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला बड़ा काम जीवित बचे लोगों के पुनर्वास की देखरेख करना था। उन्होंने कहा, ‘यह एक महत्वपूर्ण काम था और शपथ लेने के बाद पहले ही दिन से मैंने खुद को इसमें झोंक दिया। मैं ऐसा व्यक्ति था, जिसे सरकार में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। मैंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा था, यहां तक कि कभी राज्य का प्रतिनिधि भी नहीं रहा। अपने जीवन में पहली बार मुझे चुनावों का सामना करना पड़ा।’ 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मुझे राज्य प्रतिनिधि बने (विधानसभा सदस्य) अभी तीन दिन ही हुए थे कि अचानक गोधरा की घटना घट गई। यह अकल्पनीय परिमाण की त्रासदी थी, लोगों को जिंदा जला दिया गया था। कंधार अपहरण, संसद पर हमला या यहां तक कि 9/11 जैसी घटनाओं की पृष्ठभूमि में, और फिर इतने सारे लोगों को मार दिया जाना और जिंदा जला दिया जाना, आप कल्पना कर सकते हैं कि स्थिति कितनी तनावपूर्ण और अस्थिर थी।’

उन्होंने गुजरात की प्रगति और पिछले 22 वर्षों में एक भी बड़ा दंगा न होने का श्रेय अपनी सरकार की ‘वोट बैंक की राजनीति’ से दूर होकर समावेशी विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की नीति को दिया। आज, बहुत कम लोग ही मोदी की इस बात से असहमत होंगे कि गुजरात सांप्रदायिक तनाव के अतीत से निकलकर आर्थिक विकास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मॉडल बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने ‘तुष्टीकरण की राजनीति से आकांक्षा की राजनीति की ओर कदम बढ़ाया है’ और यह सुनिश्चित किया है कि सभी समुदायों के लोग राज्य के विकास में योगदान दें। उन्हें अब भी इस बात का दुख है कि साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के बाद हुए दंगों को लेकर उनकी छवि खराब करने का एक सुनियोजित प्रयास किया गया था। दूसरी किसी भी सरकार को इतनी कानूनी जांच का सामना नहीं करना पड़ा, जितना उनकी सरकार को जांच एजेंसियों और अदालतों द्वारा कठोर कानूनी जांच का सामना करना पड़ा। 

मोदी अब भी अपने खिलाफ हुए तीखे हमलों को नहीं भूले हैं। हालांकि, वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया, लेकिन 2002 के दंगों का राजनीतिक इस्तेमाल उनके और गुजरात के खिलाफ किया गया। लेकिन मतदाताओं ने ऐसे आरोपों को खारिज कर दिया है।

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