{"_id":"685df7a3035fb7849208901f","slug":"govt-running-schemes-for-development-of-msme-sector-but-entrepreneurs-to-be-patient-in-fluctuations-of-market-2025-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्थिकी : ताकि विकास का इंजन बने एमएसएमई, अनिश्चितता में अस्थिर न हो आधारशिला","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
आर्थिकी : ताकि विकास का इंजन बने एमएसएमई, अनिश्चितता में अस्थिर न हो आधारशिला
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
MSME
- फोटो :
Adobe Stock
विस्तार
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी प्रगति की आधारशिला बने हुए हैं। अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता की दुनिया में भारतीय एमएसएमई, विशेष रूप से सूक्ष्म उद्यम बाधित आपूर्ति शृंखला, बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष, अस्थिर व्यापार शुल्क और बदलते कारोबारी माहौल जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल ने निवेश लागत और शिपिंग शुल्क में वृद्धि तथा समय-सीमा में व्यवधान की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। सूक्ष्म उद्यम, जो कुल एमएसएमई का 98 फीसदी से अधिक हिस्सा हैं, के अस्तित्व को बचाने और सफल बनाने के लिए उचित रणनीतियों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारत की जीडीपी में 30 प्रतिशत योगदान और करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले एमएसएमई क्षेत्र को थोड़ा लोचशील बनाना राष्ट्रीय जरूरत बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में कहा था, ‘एमएसएमई सेक्टर देश की आर्थिक उन्नति में परिवर्तनकारी योगदान देता है। यह भारत के विनिर्माण और औद्योगिक विकास की रीढ़ है। हम इस क्षेत्र को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
सूक्ष्म उद्यम को जोखिम से बचाने व आज की अनिश्चित दुनिया में उन्हें अधिक लचीला बनाने के लिए आपूर्ति शृंखला में लचीलापन बढ़ाने की जरूरत है। इस क्षेत्र की वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कम करने के लिए देश में कई घरेलू स्रोतों का पता लगाने और आपूर्ति शृंखला के डिजिटलीकरण पर विचार करना चाहिए। एमएसएमई को अपने ग्राहक आधार (स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों) में विविधता लानी चाहिए। प्रदर्शनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये संसाधनों और ज्ञान को साझा करने के लिए स्थानीय व्यापार नेटवर्क, उद्योग समूहों और संघों के साथ मजबूत संबंध बनाना महत्वपूर्ण है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशंस के एमएसएमई पर तीसरे वार्षिक सर्वे के अनुसार, डिजिटलीकरण त्वरित विकास का प्रमुख तत्व है। ई-कामर्स एकीकरण से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और वित्तीय बाधाएं भी दूर होंगी।
पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए भारत सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पर्यावरण संबंधी नियमों को लागू किया है। ग्रीन टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए सरकार टैक्स छूट, सब्सिडी और अनुदान प्रदान करती है। इसके अलावा, वित्तीय संस्थाएं सूक्ष्म उद्यमों को टिकाऊ पद्धतियां अपनाने में सहायता देने के लिए हरित वित्तपोषण विकल्प भी प्रदान करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-वेस्ट) के निपटान और उसके पुन: उपयोग के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में उद्यमियों को भी चाहिए कि ई-वेस्ट और प्लास्टिक के निपटान के लिए वे सरकार से सहयोग करते हुए नियमों का पालन करें, ताकि उनको उत्पाद से अच्छा मुनाफा हो सके और पर्यावरण को भी क्षति न पहुंचे। केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं, जैसे वित्त, बुनियादी ढांचा, कौशल विकास, तकनीक और बाजार पहुंच के जरिये एमएसएमई को विकसित करने में अहम योगदान दे रही है। अब उद्यमियों को चाहिए कि सरकार से मिलने वाली आर्थिक और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाएं। सबसे जरूरी बात कि कोई भी उद्यम शुरू करने और उसे जारी रखने के लिए व्यापार में आने वाले उतार-चढ़ावों के प्रति उद्यमियों को धैर्य रखना होगा।