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सैलरी बढ़ने और घटने का ऐसा भी कारण हो सकता है आपने सोचा नहीं होगा

Tue, 16 Jun 2015 12:52 PM IST
अब्दुल गनी
अब्दुल गनी Updated Tue, 16 Jun 2015 12:52 PM IST
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एक व्यक्ति एक दिन बिना बताए काम पर नहीं गया। उसके मालिक ने सोचा कि उसका वेतन बढ़ा दिया जाए। हो सकता है कि आर्थिक तंगी के चलते वह परेशान रहता हो और इस वजह से मन लगाकर काम नहीं कर पाता हो। मालिक ने सोचा कि उस व्यक्ति का वेतन यदि बढ़ा दिया जाए, तो वह दिलचस्पी से काम करेगा। इसलिए मालिक ने उसकी पगार बढ़ा दी। उस व्यक्ति को जब अतिरिक्त मेहनताना मिला, तो वह कुछ नहीं बोला, चुपचाप पैसे रख लिए।

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कुछ महीनों के बाद वह फिर गैरहाजिर हो गया। मालिक को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा कि मेहनताना बढ़ाने का क्या फायदा हुआ? और उसने बढ़ा हुआ मेहनताना कम कर दिया। इस बार उस शख्स को पहले वाली राशि ही मेहनताने में मिली।
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इस बार भी वह चुप ही रहा और जितना वेतन दिया गया, उसने चुपचाप रख लिया। तब मालिक को बड़ा ताज्जुब हुआ। उसने उस व्यक्ति से पूछा, जब मैंने तुम्हारे गैरहाजिर होने के बाद पैसे बढ़ाकर दिए, तब तुम कुछ नहीं बोले और आज गैरहाजिरी के कारण तुम्हारा मेहनताना कम कर दिया, तब भी खामोश रहे। इसकी क्या वजह है?
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उसने जवाब दिया, जब मैं पहली बार गैरहाजिर हुआ था, तब मेरे घर पर एक बच्चे का जन्म हुआ था। आपने मेरी तनख्वाह बढ़ाकर दी, तो मैंने समझा कि परमात्मा ने उस बच्चे के पोषण का हिस्सा भेज दिया है। और दोबारा मैं इसलिए गैरहाजिर हुआ, क्योंकि मेरी मां का निधन हो गया था। आप ने मेरी तनख्वाह कम कर दी, तो मैंने मान लिया कि मेरी मां अपने हिस्से का अपने साथ ले गई। मैं इस तनख्वाह की खातिर क्यों परेशान होऊं, जिसका जिम्मा खुद परमात्मा ने ले रखा है!

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