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फिर मुश्किल में अदाणी: समूह निश्चित ही अदालतों में अपील करेगा, निष्पक्ष जांच के जरिये सच सामने आना ही चाहिए

Sat, 23 Nov 2024 04:54 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला
अमर उजाला Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 23 Nov 2024 04:54 AM IST
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सार
देश के दूसरे सबसे अमीर शख्स और अरबपति गौतम अदाणी हिंडनबर्ग के आरोपों की काली छाया से उबर ही रहे थे कि अब अमेरिका की एजेंसियों ने भारत में वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगाकर उनकी मुश्किलों को बढ़ा दी। अब अदाणी समूह की मुश्किलें भारतीय बाजार पर हावी होती हुई दिख रही हैं। कारण है कि अदाणी देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से हैं, और वह अगर घेरे में हैं, तो इसका असर बाजार पर पड़ना तय ही है। 
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Gautam Adani row appeal definite in higher courts but truth must come out impartial probe vital
गौतम अदाणी - फोटो : ANI

विस्तार

देश के दूसरे सबसे अमीर शख्स और अरबपति गौतम अदाणी हिंडनबर्ग के आरोपों की काली छाया से उबर ही रहे थे कि अब अमेरिका की एजेंसियों ने भारत में वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगाकर उनकी मुश्किलों को बढ़ा दिया है। राज्यों के साथ सौर ऊर्जा समझौतों के लिए अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में उनके और उनके भतीजे सागर अदाणी, जो अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक भी हैं, के अलावा छह अन्य लोगों के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने और धोखाधड़ी की योजना में शामिल होने के आरोप लगाए हैं, जो वाकई गंभीर हैं।


इस मामला स्थिति गंभीर
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग द्वारा करीब 22 महीने पहले लगाए गए आरोप कथित तौर पर शेयरों में हेराफेरी और गलत तरह से लेन-देन तक ही सीमित थे, साथ ही वह एक निजी फर्म भी थी। जबकि इस बार स्थितियां अलग हैं। उन पर आरोप है कि 2021 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री से अदाणी की मुलाकात के बाद राज्य सरकार उनसे बिजली खरीदने के लिए सहमत हुई, जिसके लिए प्रदेश के अधिकारियों को तो भारी रिश्वत दी ही गई, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में भी कुछ इसी तरह से बिजली खरीदी गई, जिससे अंदर की व्यवस्थाओं के काम करने के तरीके का ही पता चलता है।


भारतीय बाजार पर असर स्वभाविक
अदाणी देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से हैं, और वह अगर घेरे में हैं, तो इसका असर बाजार पर पड़ना तय ही है। अमेरिकी अदालत में अभियोग दायर होने के बाद केन्या सरकार ने अदाणी समूह के साथ दो बड़ी परियोजनाओं का सौदा रद्द कर दिया, तो घरेलू बाजार में भी कंपनी के शेयर तेजी से गिरे हैं।

अभियोग से आरोप तक
दरअसल, ऐसे मामलों में सबसे बुरी बात यह होती है कि इनसे निवेशकों का बाजार पर से भरोसा टूटता है, जो समग्र अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग के बयान में भी कहा गया है कि अभियोग केवल आरोप हैं, जो जब तक सिद्ध नहीं होते, तब तक प्रतिवादियों को निर्दोष ही माना जाएगा।

एक नजर राजनीतिक मोड़ पर भी..
अच्छा गौर करने वाली बात है कि जिन राज्यों के ये मामले हैं, उनमें गैर-भाजपा सरकारें ही थीं, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष जिस तरह से हमलावर है और सियासत गर्माई हुई है, उससे 25 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। अदाणी समूह निश्चित ही उच्च अदालतों में अपील करेगा और उपलब्ध कानूनी विकल्पों को खंगालेगा। इसके पीछे आर्थिक प्रतिस्पर्धा हो या कुछ और। सवाल उठे हैं, तो निष्पक्ष जांच के जरिये सच सामने आना ही चाहिए।
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