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ईरान और ट्रंप: टैरिफ, सैन्य धमकियां और वैश्विक अस्थिरता

Thu, 15 Jan 2026 07:03 AM IST
अमर उजाला Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 15 Jan 2026 07:03 AM IST
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सार
ईरान 1979 के बाद से अब तक की सबसे गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ के आदेश और सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के बीच क्षेत्र की भू-राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। भारत के लिए यह रणनीतिक संतुलन बनाने का समय है।
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From tariffs to confrontation US Donald Trump pressure on Iran and diplomatic challenge facing India and China
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के आदेश और प्रदर्शनकारियों से विरोध जारी रखने के आह्वान से उपजी सैन्य हस्तक्षेप की आशंकाओं के बीच क्षेत्र की भू-राजनीति एक नए व संवेदनशील मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। उल्लेखनीय है कि ईरान 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। इंटरनेट पूरी तरह से बंद है और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई खुद प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दे चुके हैं। करीब ढाई हजार लोग मारे जा चुके हैं, जबकि दस हजार से ज्यादा हिरासत में हैं। ईरान और इस्राइल के बीच चले 12 दिनों के युद्ध, जिसमें अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, के करीब सात महीनों के बाद ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। इसके अलावा, ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वालों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का जो आदेश दिया है, उसे लेकर भी आशंकाएं फैली हुई हैं। ईरान से सबसे अधिक तेल खरीदने वाला देश चीन है। पिछले वर्ष ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार युद्ध के मद्देनजर एक अस्थायी समझौता हुआ था। आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच शिखर बैठक होनी है। सवाल यह है कि अतिरिक्त टैरिफ का फैसला लेकर क्या उन्होंने चीन के साथ महत्वपूर्ण बैठक को खतरे में नहीं डाल दिया है। जहां तक भारत की बात है, तो ईरान में अस्थिरता से भारत के रणनीतिक और कुछ हद तक आर्थिक हित भी प्रभावित हो सकते हैं। ईरान निस्संदेह भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और वहां की वर्तमान अशांति से इसके निर्यात पर कुछ असर पड़ भी रहा है। लेकिन, 2019 में अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद से भारत का ईरान से समग्र व्यापार कम ही है, इसलिए टैरिफ के असर के भी सीमित होने की उम्मीद है। हां, चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे (आईएनएसटीसी) से भारत के रणनीतिक हित जरूर जुड़े हैं, जो प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता जारी है। ऐसे में, भारत के सामने मुख्य चुनौती संतुलन बनाने की है, ताकि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बगैर अमेरिका और ईरान, दोनों से अपने रिश्ते बनाए रख सके। ईरान संकट न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता की भी परीक्षा है। ट्रंप की चेतावनियां क्या असर दिखाएंगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन ईरान में शांति, न्याय और नागरिकों की स्वतंत्रता की स्थापना की उम्मीद जल्द पूरी होती नहीं दिखती।
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