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खुशबू के एक झोंके की तरह
रमण कुमार सिंह
Updated Sat, 14 Dec 2013 09:55 PM IST
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उर्दू शायरीः एक चयन
संपादक-शाहीना तबस्समु/कुलदीप सलिल
सस्ता साहित्य मंडल, मूल्य-150 रुपये
खुशबू के एक झोंके की तरह
-रमण कुमार सिंह
हाल में उर्दू शायरी के संकलनों की लोकप्रियता बढ़ी है। शायद यही वजह है कि गांधी साहित्य का प्रचार-प्रसार करने वाली प्रकाशन संस्था सस्ता साहित्य मंडल ने शाहीना तबस्सुम और कुलदीप सलिल के संयुक्त संपादन में उर्दू शायरी का एक चयन प्रकाशित किया है।
हमारे देश में उर्दू शायरी की बहुत पुरानी एवं समृद्ध परंपरा रही है। यों तो उर्दू का जन्म उत्तर भारत में हुआ, लेकिन उर्दू काव्य का प्रारंभ दक्षिण भारत (दकन) में हुआ था। कुली कुतब शाह और वली दकनी उर्दू के पहले कवियों में थे।
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फिर दिल्ली उर्दू शायरी का केंद्र बनी, जहां मीर तकी मीर, सौदा और मीर हसन ने 18वीं शताब्दी में दिल्ली की महफिलों को अपनी शायरी से गुलजार किया। हालांकि उस पूरी शताब्दी में दिल्ली में अफरा-तफरी का माहौल था, जिसके नक्श इन शायरों की रचनाओं में देखे जा सकते हैं।
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19वीं शताब्दी में जब दिल्ली समेत तकरीबन पूरे भारत पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया, तो 1857 के गदर का केंद्र भी दिल्ली बनी। लेकिन अंग्रेजों द्वारा उस विद्रोह को कुचल दिए जाने के बाद दिल्ली पर आफतों का पहाड़ टूट पड़ा। गालिब समेत कई शायरों के लेखन में तत्कालीन दुर्दशा का मार्मिक चित्रण मिलता है।
इस पुस्तक में वली दकनी, मीर तकी मीर, नजीर अकबराबादी, मुहम्मद रफी सौदा, इन्शा अल्लाह खां, गालिब, जौक, मोमिन, बहादुरशाह जफर, दाग देहलवी, हसरत मोहानी, इकबाल, अकबर इलाहाबादी, मजाज, जोश, जिगर, फिराक, शकील बदायंूनी, फैज, जां निसार अख्तर, साहिर लुधियानवी, कैफी आजमी, अली सरदार जाफरी, मजरूह सुलतानपुरी, कतील शिफाई, अहमद फराज, परवीन शाकिर, शहरयार, बशीर बद्र, निदा फाजली जैसे मकबूल शायरों की प्रतिनिधि नज्में, गजलें संकलित हैं।
इस किताब से गुजरते हुए यह महसूस होता है कि सत्ता का आतंक चाहे कितना भी व्यापक और विध्वंसक क्यों न हो, यह इंसानी सृजनात्मकता और अपराजेय जिजीविषा को परास्त नहीं कर सकता। उर्दू कवियों की रचनाओं में सिर्फ इश्क, प्रेम, गुल-गुलशन, साकी-पैमाने की ही बात नहीं है, बल्कि इसमें हाशिये के लोगों की मौजूदगी भी दर्ज हुई है।
मजदूर-किसान, स्कूल मास्टर, रिक्शा-ठेला चालक, बच्चा, स्त्री, शराबी आदि सभी इस काव्य-गणतंत्र के नागरिक हैं।
इस संग्रह में संकलित ज्यादातर रचनाकार वैसे हैं, जिन्होंने अपने दौर में मकबूलियत हासिल की और उर्दू ही नहीं, संपूर्ण भारतीय काव्य संसार को प्रभावित किया। इस किताब की एक विशेषता यह है कि इसमें संकलित तमाम शायरों का संक्षिप्त जीवन परिचय भी दिया गया है। यह पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है।