फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Then fight is right

तो फिर जंग ही सही

Sun, 24 May 2015 06:59 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Sun, 24 May 2015 06:59 PM IST
विज्ञापन
Then fight is right

साधो, हम जंग नहीं चाहते, पर वे हैं कि हमारे ऊपर जंग थोपने पर आमादा हैं। दूसरी तरफ के लोगों का कहना है कि जंग लाजमी है और जंग के बिना कभी कोई समस्या हल नहीं होती। दिल्ली इन दिनों जंग का मैदान है। एक समय जंतर-मंतर और फिर रामलीला मैदान जंग की जगह हुआ करता था। अब वह हैसियत दिल्ली सचिवालय ने हासिल कर ली है। जंग और केजरीवाल का पुराना नाता है। वे जहां होंगे, वहां जंग की मौजूदगी होगी ही। जंग के बिना यह टोपियाया आदमी आधा-अधूरा है। पर इस बार यह शख्स जंग के खिलाफ ही खड़ा हो गया है।

विज्ञापन


जंग खत्म हो जाए, तो भी उसके पीछे बहुत गर्दो-गुबार बचा रह जाता है। मैं जंग के इन दिनों में दिल्ली जाने से बच रहा हूं। जंग की विदाई हो, तो राजधानी की ओर कूच करूं। मेरे एक मित्र ऐसे भेड़ियाधसानी हैं कि जंग के इस माहौल में भी दिल्ली प्रवास कर गए। सही-सलामत लौटे, तो मैंने पूछा, आप पर जंग का कोई असर तो नहीं हुआ। वह बोले, जंग को केजरीवाल से ही फुर्सत नहीं है। मैंने आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता से पूछा, आखिर इस जंग का इलाज क्या है? वह बोले, जंग को पाकिस्तान की सरहद पर भेज दिया जाए, तो समस्या आसानी से सुलझ सकती है।
विज्ञापन


तजुर्बे बताते हैं कि जंग कोई मुफीद चीज नहीं है, पर भाजपा वाले इन दिनों जंग को पसंद करने लगे हैं। जंग पहले कांग्रेसियों की चाहत थी, पर वे चुनाव में ऐसे पिटे कि अब जंग का नाम लेने से भी डरने लगे हैं। एक सज्जन बोले, मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल को अब आंदोलनकारी की छवि से मुक्त हो जाना चाहिए। मैंने कहा, ठाले बैठकर राज करेंगे, तो जंग लग जाने का खतरा बना रहेगा। इतिहास बताता है कि दिल्ली जंग के लिए ही बनी है। दिल्ली ने न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखे हैं। दिल्ली देश का दिल है। पर दिल्ली आकाश कुसुम भी है, जिसे हर कोई नहीं पा सकता। दिल्ली को मोदी और केजरीवाल, दोनों ही अपना मानने लगे हैं। अब इन दोनों में दिल्ली के लिए जंग जारी है। दिल्ली की रजिया इस जंग के बीच बुरी तरह फंस चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed