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फैशन: बाजार तो चाहता है कि पुरुष भी सजें... कंपनियां भारी मुनाफा क्यों छोड़ेंगी?
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बाजार तो चाहता है कि पुरुष भी सजें (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो :
अमर उजाला प्रिंट / एआई
विस्तार
फैशन की दुनिया में हर रोज नए-नए ट्रेंड्स चलते रहते हैं। यदि इन्हें बड़ी सेलिब्रिटीज के द्वारा चलाया जाए, तो ये बहुत जल्दी गति पकड़ते हैं। जाहिर है कि सेलिब्रिटीज इन्हें किसी न किसी कंपनी के विज्ञापन के तौर पर चलाते हैं। इससे उन्हें भारी कमाई होती है। लेकिन लोग इनसे प्रभावित होकर उस ब्रांड के उत्पादों को हाथों-हाथ लेते हैं।
इन दिनों पुरुषों की दुनिया का नया ट्रेंड है, सजना-संवरना। अपने नाखूनों पर तरह-तरह की नेल पॉलिश लगाना। इसके पक्ष में कुछ पुरुष कह रहे हैं कि फैशन या सजना-संवरना, लैंगिक भेदभाव से मुक्त होना चाहिए। पुरुष क्यों नहीं नेल पॉलिश लगा सकते? वे क्यों नहीं अपने नाखूनों को सुंदर रख सकते? किसने कहा कि नेल पॉलिश पर सिर्फ स्त्रियों का ही अधिकार है?
कहा जा रहा है कि आदमियों द्वारा नेल पॉलिश लगाना कोई नई बात नहीं है। अंगरेजी गायक डेविड बोवी जब मंच पर गाते थे, तो हमेशा उनके नाखूनों में नेल पॉलिश लगी रहती थी। आजकल सिर्फ नेल पॉलिश ही नहीं लगवाई जा रही, बल्कि तरह-तरह के डिजाइन भी बनवाए जा रहे हैं। उंगलियों में भी तरह-तरह की अंगूठियां पहनी जा रही हैं।
पुरुषों के लिए साज-सज्जा का काम करने वाले विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इसमें गलत क्या है! जो पुरुषों को अच्छा लगता है, वह वे कर सकते हैं। प्रतीक बब्बर से लेकर बहुत से लोग अपने रंगीन नाखूनों को दिखाकर खुश हो रहे हैं। पुरुषों का कहना है कि इस तरह से वे स्त्री नहीं हो जाते, पुरुष ही रहते हैं। हां, पुरुषों को भी सुंदर और आकर्षक दिखने का हक है। दुनिया के बहुत से मशहूर गायक और अभिनेता इसे अपना रहे हैं।
यह भी बताया जा रहा है कि नाखूनों पर तरह-तरह के रंगों की नेल पॉलिश आदमी की सामाजिक स्थिति भी बताती है। जैसे कि काला रंग ऊंची आर्थिक स्थिति का प्रतीक है, तो हरा रंग साधारण लोगों के लिए है। कमाल है न, रंगों ने भी अमीर-गरीब का भेद सीख लिया है!
सिर्फ नेल पॉलिश ही नहीं, पुरुषों में बालों को भी तरह-तरह से रंगवाने, सजाने, काढ़ने का फैशन बढ़ रहा है। उनके लिए तरह-तरह के शृंगार-प्रसाधन बाजार में आ रहे हैं। वे बड़ी मात्रा में इनका उपयोग भी कर रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि पुरुषों को ब्यूटी मिथ्स को तोड़ना चाहिए। वे क्यों नहीं मेकअप कर सकते! सारा मेकअप का सामान और सारा प्रसाधन उद्योग आखिर स्त्रियों को ही क्यों समर्पित हो?
पुरुषों के फैशन ट्रेंड्स पर वर्षों से लिखने वाले पत्रकार कह रहे हैं कि मेकअप के प्रति जितना आकर्षण इन दिनों पुरुषों में देखा जा रहा है, वह पहले कभी नहीं देखा गया। वे अपनी त्वचा की देखभाल पहले से अधिक कर रहे हैं। इसके लिए तरह-तरह के प्रसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में वे लिपस्टिक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने लगें।
बताने वाले यह भी कह रहे हैं कि पुरुषों का इस तरह से सजना-संवरना कोई नया नहीं है। हजारों वर्षों से पुरुष ऐसा करते आए हैं। अपने यहां भी राजा-महाराजाओं की तस्वीरें देखें, तो वे खूब गहने पहने दिखते हैं। उनके माथे पर तिलक भी लगे होते हैं। भगवानों की मूर्तियां भी खूब गहने पहने रहती हैं। यानी कि गहनों पर भी स्त्रियों का एकाधिकार नहीं है।
पुरुषों के इस फैशन के बारे में सोचते हुए अपने यहां के सखी संप्रदाय की याद आती है। ये पुरुष स्त्री भाव से सजते हैं। वैसे ही सिंदूर लगाते हैं। चूड़ियां पहनते हैं। पांवों में आलता और महावर लगाते हैं। जब बहुत छोटी थी, तो एक सुबह जब उठी, तो एक महिला पर नजर पड़ी। वह इसी तरह सजी हुई थीं। पता चला कि वह महिला नहीं, पुरुष हैं। पिता जी को वह रेलवे स्टेशन पर मिले थे। वह उन्हें घर ले आए। लेकिन ये लोग खुद को साधु कहते हैं। उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़े पुलिस अफसर भी इसी तरह सजते थे। वह खुद को राधा बताते थे। लेकिन आज का पुरुषों का फैशन ट्रेंड पश्चिम से आयातित है। जैसा कि होता है, पश्चिम से चला हर फैशन ट्रेंड, भारत में बहुत जल्दी अपनी जगह बना लेता है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
वैसे भी कंपनियों की इच्छा होती है कि उनके उत्पादों को किसी एक वर्ग तक ही सीमित न रखा जाए! यदि कोई उत्पाद स्त्री-पुरुषों के भेद से मुक्त है, तो उसका उपयोग बढ़ता है और इस बहाने कंपनियां भारी मुनाफा कमाती हैं। वे उत्पादों को सौंदर्य और दूसरे से हमेशा अलग दिखने की चाहत से जोड़ देती हैं। और इस तरह घर-घर पहुंच जाती हैं।