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विचारों को खंगालें: जहां रोशनी होगी वहां अंधेरा नहीं टिकेगा... जीवन के सवालों पर सोचें और जवाब दें

Thu, 23 Jan 2025 06:08 AM IST
दीपक कुमार शर्मा आचार्य रजनीश
आचार्य रजनीश Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 23 Jan 2025 06:08 AM IST
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सार
बुद्ध एक मशाल की तरह हैं। मशाल जहां भी जलती है, वहां रोशनी होती है। प्रश्न जो भी हो, वह बात नहीं है। बुद्ध के पास रोशनी है और जब भी वह किसी प्रश्न पर पड़ेगी, तो उत्तर प्रकट हो जाएगा।
 
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Explore your thoughts Where there is light darkness will not survive Think and answer questions of life
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैंने प्राथमिक विद्यालय की एक महिला शिक्षिका के बारे में सुना है। उसने बच्चों से पूछा, ‘क्या तुम्हारे पास कोई प्रश्न है?’ एक छोटा लड़का खड़ा हुआ और उसने कहा, ‘मेरे पास एक प्रश्न है और मैं इंतजार कर रहा था-जब भी आप पूछेंगी, तब मैं पूछूंगा कि पूरी पृथ्वी का वजन कितना है?’



वह परेशान हो गईं, क्योंकि उन्होंने कभी इसके बारे में नहीं सोचा था, कभी इसके बारे में नहीं पढ़ा था। पूरी पृथ्वी का वजन कितना है? तो उन्होंने एक चाल चली, जो शिक्षकों को पता है। उन्हें चालें चलनी होती हैं। उन्होंने कहा, ‘हां, प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है। अब कल, सभी को उत्तर खोजकर लाना है।’ शिक्षिका को उत्तर खोजने के लिए समय चाहिए था। बच्चों से कहा, ‘तो कल मैं पूछूंगी, जो कोई भी सही उत्तर लाएगा, उसे एक उपहार दिया जाएगा।’


सभी बच्चों ने खोजा, लेकिन उसका उत्तर नहीं खोज सके और शिक्षिका पुस्तकालय गईं। पूरी रात उन्होंने खोजा, और आखिरकार सुबह तक उन्होंने पृथ्वी का वजन पता लगा लिया। वह बहुत खुश थीं। वह स्कूल वापस आईं और बच्चे वहां थे। वे थके हुए थे। बच्चों ने जवाब दिया कि वे उत्तर पता नहीं कर सके। ‘हमने मां से पूछा और हमने पिताजी से पूछा और हमने सभी से पूछा। कोई नहीं जानता। यह प्रश्न बहुत कठिन लगता है।’ शिक्षिका हंसी और कहा, ‘यह कठिन नहीं है। मुझे उत्तर पता है, लेकिन मैं बस यह कोशिश कर रही थी कि तुम इसका उत्तर खोज पाओगे या नहीं। यह पृथ्वी का भार है।’ वह छोटा बच्चा, जिसने प्रश्न उठाया था, वह फिर से खड़ा हुआ और उसने कहा, ‘लोगों के साथ या बिना लोगों के?’ अब फिर से वही स्थिति थी। तो बुद्ध कहते हैं, ‘यह सोचने का प्रश्न नहीं है। आप प्रश्न पूछते हैं और, बस, मैं इसे देखता हूं। और जो भी सत्य है, वह प्रकट होता है। यह सोचने और उसके बारे में चिंतन करने का प्रश्न नहीं है। उत्तर तार्किक न्याय-वाक्य के रूप में नहीं आ रहा है। यह केवल सही केंद्र पर ध्यान केंद्रित करना है।’

बुद्ध एक मशाल की तरह हैं। इसलिए मशाल जहां भी जलती है, वहां रोशनी होती है। प्रश्न जो भी हो, वह बात नहीं है। बुद्ध के पास प्रकाश है, और जब भी वह प्रकाश किसी प्रश्न पर पड़ेगा, तो उत्तर प्रकट हो जाएगा। उत्तर उस प्रकाश से निकलेगा। यह एक सरल घटना है, एक रहस्योद्घाटन है। जब कोई आपसे पूछता है, तो आपको इसके बारे में सोचना पड़ता है। लेकिन अगर आप नहीं जानते, तो आप कैसे सोच सकते हैं? अगर आप जानते हैं, तो सोचने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आप नहीं जानते, तो आप क्या करेंगे? आप याददाश्त में खोजेंगे, आपको कई सुराग मिलेंगे। आप बस एक पैचवर्क करेंगे। आप वास्तव में नहीं जानते, अन्यथा प्रतिक्रिया तुरंत होती।

सूत्र: सोचें और जवाब दें
जब भी जीवन में कोई सवाल परेशान करे, तो उसका जवाब जरूरी नहीं है कि किताबों या पुस्तकालय में ढूंढा जाए। बस अपने भीतर झांकना होता है। विचारों को खंगालना होता है। रोशनी सबके भीतर है। बस उसे दिशा देने की जरूरत होती है। अगर सवालों के जवाब ढूंढने में किसी पर निर्भरता रहेगी, तो परेशान होना तय ही है।

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