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पर्यावरण : राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राकृतिक संकट, दुनिया के कई देश मानते हैं इनमें परस्पर संबंध

Sat, 12 Apr 2025 07:06 AM IST
शिव शुक्ला ब्रैडली जे. कार्डिनल
ब्रैडली जे. कार्डिनल Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 12 Apr 2025 07:06 AM IST
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सार
राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सैन्य शक्ति का मामला नहीं है। प्राकृतिक दुनिया भी सामाजिक स्थिरता में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा योजना बनाते समय इस पर भी ध्यान देना होगा। 
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Environment: National security and natural disaster, many countries of the world believe there is a relationsh
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : FREEPIC

विस्तार

जब भोजन, स्वच्छ हवा, पेयजल और आश्रय जैसी बुनियादी मानवीय जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से ज्यादा प्राकृतिक पर्यावरण का दोहन किया जाता है, तो यह सिर्फ विश्व समुदाय के लिए मानवीय चिंता का विषय नहीं रह जाता, बल्कि शोधों के मुताबिक, यह संकट अमेरिका एवं कई अन्य देशों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला भी बन जाता है।



पेंटागन और अमेरिकी खुफिया समुदाय ने लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का बारीकी से अध्ययन किया है। हालांकि ट्रंप प्रशासन की ताजा खुफिया रिपोर्टों में जलवायु परिवर्तन का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन पिछली रिपोर्टों ने दर्शाया है कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक संघर्ष के लिए चरम बिंदु कैसे बन सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर पारिस्थितिकी व्यवधानों के प्रभावों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। लेकिन वे भी सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संघर्ष और तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों का कारण बन सकते हैं।


दुनिया भर में लगभग 3.2 अरब लोग प्रोटीन के मुख्य स्रोत के रूप में मत्स्य पालन पर निर्भर हैं। समुद्री मत्स्य पालन का अत्यधिक दोहन अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का एक आम कारण है। 1950 से 1970 के दशक तक आइसलैंडिक कॉड मछली पकड़ने के क्षेत्र को लेकर ब्रिटिश और आइसलैंडिक मछुआरों के बीच में संघर्ष जारी रहा। 'कॉड वार' के चलते कुछ समय तक आइसलैंड और यूनाइटेड किंगडम के बीच राजनयिक संबंध खत्म हो गया था।  हाल ही में, चीन ने अपने तटीय जल में अत्यधिक मछली पकड़ना शुरू किया, जिसका मतलब है दक्षिण चीन सागर में मछली पकड़ने का विस्तार करना और नए क्षेत्रीय दावों को स्थापित करने के लिए मछली पकड़ने वाले बेड़े का उपयोग करना। चीन के मछली पकड़ने वाले बेड़े ने कई देशों के तटों पर भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है, जिससे मछली के भंडार कम हो रहे हैं और उन क्षेत्रों में भी राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो रही है।

पारिस्थितिकी से संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों के सबसे प्रसिद्ध उदाहरण, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, उनमें जूनोटिक रोग शामिल हैं, जो लोगों और वन्यजीवों के बीच घनिष्ठ संपर्क के चलते जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं। दुनिया की 70 फीसदी से अधिक उभरती संक्रामक बीमारियां जंगली जानवरों के संपर्क से उत्पन्न होती हैं। इसका ताजा उदाहरण कोरोना वायरस है, जिससे 70 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई और न केवल वैश्विक बाजारों और आपूर्ति शृंखलाओं में गंभीर व्यवधान पैदा हुआ, बल्कि सामाजिक सामंजस्य और राजनीतिक स्थिरता भी प्रभावित हुई। प्रति वर्ष 91 अरब डॉलर से 258 अरब डॉलर तक वन्यजीवों का अवैध शिकार और वन उत्पादों का व्यापार होता है। यह पर्यावरण अपराध को दुनिया के सबसे बड़े अपराध में से एक बनाता है। दुर्लभ वन्यजीव नमूनों और शरीर के अंगों की अत्यधिक काला बाजारी की रकम आतंकवादी समूहों, ड्रग माफियाओं और आपराधिक संगठनों को वित्त पोषण प्रदान करती है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि प्रकृति में पारिस्थितिक व्यवधान किस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ाते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सैन्य शक्ति का मामला नहीं है। प्राकृतिक दुनिया भी सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा की योजना बनाते समय इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
साथ में एम्मेट डफी, रॉड शूनोवर (द कन्वर्सेशन से)

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