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पर्यावरण: जलवायु-परिवर्तन और जागरूकता, विकसित और विकासशील देशों के लोगों के दृष्टिकोण में बड़ा फासला

Wed, 13 Dec 2023 07:22 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Wed, 13 Dec 2023 07:22 AM IST
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सार
सर्वेक्षण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के बारे में दुनिया भर के लोगों के ज्ञान और दृष्टिकोण में बहुत बड़ा फासला है।
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environment awareness gap in knowledge of developed and developing countries people about climate change
जलवायु जागरूकता - फोटो : iStock

विस्तार

फेसबुक उपयोगकर्ताओं के एक वैश्विक सर्वेक्षण में विकसित और विकासशील देशों के लोगों के बीच जलवायु जागरूकता में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया है। जलवायु परिवर्तन पर ‘अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक जनमत : 2023’ नामक एक रिपोर्ट में, जलवायु परिवर्तन कम्यूनिकेशन पर येल कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठन रेयर और डाटा फॉर गुड के शोधकर्ताओं को विकसित दुनिया के उत्तरदाताओं में जलवायु परिवर्तन को लेकर उच्च स्तर की जागरूकता मिली, जबकि अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य अमेरिका, मध्य पूर्व और कई द्विपीय देशों के आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने बताया कि वे जलवायु परिवर्तन के बारे में 'बहुत कम' या 'कुछ भी नहीं' जानते हैं।



इस सर्वेक्षण में दुनिया भर के 187 देशों के 18 वर्ष से ऊपर के 1,39,136 फेसबुक के सक्रिय उपयोगकर्ताओं से प्रतिक्रियाएं जुटाई गईं। सर्वेक्षण में शामिल 110 देशों, इलाकों और क्षेत्रों में से 45 में आधे से अधिक उत्तरदाताओं का कहना है कि वे जलवायु परिवर्तन के बारे में या तो 'बहुत कुछ' या 'थोड़ा-बहुत' जानते हैं। कई क्षेत्रों में उत्तरदाताओं के बड़े हिस्से का कहना है कि उन्होंने जलवायु परिवर्तन के बारे में 'कभी नहीं सुना'। यह रिपोर्ट दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन संबंधी धारणाओं, रवैयों, नीतिगत पसंद और व्यवहार का वर्णन करती है, जो रेयर और मेटा में सोशल इम्पैक्ट पार्टनरशिप की एकसाथ साझेदारी करने का नतीजा है।


यूरोप में उत्तरदाताओं के यह कहने की सर्वाधिक संभावना है कि वे जलवायु परिवर्तन के बारे में कम से कम थोड़ा-बहुत तो जानते हैं, 31 में से 27 क्षेत्रों में बहुमत ऐसा कह रहा है। इसके विपरीत, उप-सहारा अफ्रीका के उत्तरदाताओं में इसकी संभावना सबसे कम है। जलवायु परिवर्तन संचार पर येल कार्यक्रम के निदेशक एंथनी लीसेरोविट्ज ने कहा, 'दुनिया भर में बुनियादी जलवायु परिवर्तन के बारे में लोगों को बताए जाने की अभी गंभीर आवश्यकता है, खासकर दुनिया के सबसे कमजोर देशों की आबादी में।' किसी भी चुनौती से निपटने के लिए उसे झेलने वालों को उसके हर पहलू की बेहतर जानकारी होना जरूरी है।

साफ जाहिर है कि जलवायु परिवर्तन के बारे में दुनिया भर के लोगों के ज्ञान और दृष्टिकोण में बहुत बड़ा फासला है। जलवायु परिवर्तन के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोगों में इसके बारे में पूरी जानकारी और जागरूकता न होने पर इसके लिए जरूरी साक्ष्य-आधारित कार्यक्रमों और नीतियों का समर्थन करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि ग्लोबल साउथ में कई लोग शुरू में जलवायु परिवर्तन के बारे में बेखबर थे, लेकिन एक बार संक्षिप्त परिभाषा देने पर हर स्थान पर बहुत बड़े बहुमत का कहना है कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है। कुछ ही क्षेत्रों में बहुमत का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ज्यादातर मानवीय गतिविधियों के कारण होता है, जबकि कई लोग कहते हैं कि यह समान रूप से मानवीय गतिविधियों और प्राकृतिक परिवर्तनों, दोनों के कारण होता है।

लैटिन अमेरिका के देश जलवायु परिवर्तन को लेकर सबसे अधिक चिंतित देशों में शामिल हैं। कोस्टा रिका और अल साल्वाडोर में 92 फीसदी उत्तरदाताओं का कहना है कि वे जलवायु परिवर्तन के बारे में 'बहुत चिंतित' या 'कुछ हद तक चिंतित' हैं। अल साल्वाडोर में 87 फीसदी उत्तरदाताओं के यह कहने की संभावना है कि जलवायु परिवर्तन उनके लिए व्यक्तिगत रूप से 'निहायत' या 'बहुत' महत्वपूर्ण है, जबकि 90 फीसदी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन सरकार के लिए या तो 'बहुत उच्च' या 'उच्च' प्राथमिकता होनी चाहिए। नीदरलैंड में केवल 45 फीसदी उत्तरदाताओं का कहना है कि वे जलवायु परिवर्तन के बारे में चिंतित हैं या कुछ हद तक चिंतित हैं, और केवल 19 फीसदी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद या बहुत महत्वपूर्ण है।

समृद्ध क्षेत्रों के उत्तरदाता आमतौर पर जलवायु परिवर्तन को व्यक्तिगत जोखिम के रूप में नहीं देखते हैं, बल्कि इसे भविष्य की पीढ़ियों या दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखते हैं। यह येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन के पूर्व अध्ययनों के अनुरूप है, जिनमें पाया गया था कि कई लोग जलवायु परिवर्तन को दूर की समस्या के तौर पर देखते हैं।

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