फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Efforts to improve relations with neighboring country n terrorists spreading hatred through violence

अमन की राह के रोड़े : पड़ोसी मुल्क से रिश्ते सुधारने की कोशिशें और हिंसा से नफरत फैलाते आतंकी

Fri, 14 Oct 2022 07:10 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Fri, 14 Oct 2022 07:10 AM IST
विज्ञापन
सार
जब अटल बिहारी वाजपेयी बस यात्रा कर लाहौर पहुंचे थे, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सुधारने का एक शानदार तरीका था। लेकिन जल्द ही जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल की पहाड़ियों में सैन्य ऑपरेशन चलाने का दुस्साहसिक फैसला किया, जिसके कारण दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। 
loader
Efforts to improve relations with neighboring country n terrorists spreading hatred through violence
आतंकवादी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दोनों ओर से रोजाना की जाने वाली बयानबाजी के बावजूद भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तकरीबन तीन वर्षों से तनाव को नियंत्रित रखा है। 26 फरवरी, 2021 को दोनों ओर की सेना ने पुराने संघर्ष विराम समझौते का नवीनीकरण किया था, जिससे दोनों ओर कश्मीरियों (जम्मू और कश्मीर तथा पाक अधिकृत कश्मीर) की जिंदगियों और संपत्ति को बचाने में मदद मिली है। 



इन तीन वर्षों के दौरान नई दिल्ली में वही भाजपा की सरकार है, जबकि इस्लामाबाद में इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ सरकार के बाद अब शाहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार आ चुकी है, लेकिन सौभाग्य से एलओसी पर शांति कायम है। कोई भी समझ सकता है कि पाकिस्तान का फॉरेन ऑफिस और भारत का विदेश मंत्रालय कश्मीर के मुद्दे पर एक दूसरे के खिलाफ बयान जारी करते रहते हैं और अपनी स्थिति दोहराते हैं, लेकिन मीडिया की चकाचौंध से दूर पिछले दरवाजे से कूटनीतिक पहलकदमी जारी है। 


कई बार तो दोनों ओर के विदेश मंत्रालयों को भी विश्वास में नहीं लिया जाता, जैसा कि अतीत में भी हुआ है और इसने दोनों ओर के राजनयिकों को निराश भी किया है। अभी न तो इस्लामाबाद में और न ही दिल्ली में पूर्णकालिक उच्च आयुक्त हैं, लिहाजा उनकी जिम्मेदारियां उप उच्चायुक्त निभा रहे हैं। लोगों की चकाचौंध से दूर दोनों देशों के बीच कई दिलचस्प चीजें होती हैं और यहां मैं आपको एक वाकये के बारे में बता रही हूं, जिसके बारे में कई साल पहले मैंने अपने अखबार द न्यूज इंटरनेशनल के लिए लिखा था। 

इन दिनों मैं एक पूर्व भारतीय राजनयिक की किताब पढ़ रही हूं, जिनकी मैं बहुत प्रशंसा करती हूं। यह हैं, टीसीए राघवन और भारत-पाक संबंधों पर उनकी किताब है, पीपुल नेक्स्ट डोर। राघवन पाकिस्तान में लोकप्रिय उच्चायुक्त थे और उनकी पूर्व पत्रकार पत्नी रंजना तथा वह शहर की सर्वाधिक लोकप्रिय राजनयिक दंपती थे। उनकी डिनर पार्टियों में भारत के विभिन्न हिसों के लजीज व्यंजन होते थे और वहां दिलचस्प मेहमान आते थे। 

जब दोनों देशों के रिश्ते सामान्य थे, तब गणमान्य भारतीय मेहमानों की यह भारतीय दंपती हमेशा मेजबानी करते थे और यह गणमान्य मेहमानों से मुलाकात का अनौपचारिक मौका भी होता था। यह विभाजन के बाद से दोनों देशों के संबंधों के बारे में एक बहुत अच्छी तरह से लिखी गई किताब है, लेकिन मैं उच्चायुक्त के रूप में टीसीए राघवन के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित अध्यायों की प्रतीक्षा में थी। किन्हीं वजहों से उनके व्यक्तिगत अनुभव से जुड़े ब्योरों को किताब में जगह नहीं मिली है। 

यह याद करना दिलचस्प होगा कि जब 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने काबुल की यात्रा के दौरान अचानक लाहौर जाने का फैसला किया और तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की और लाहौर के नजदीक रायविंड में उनके पुश्तैनी घर में हो रही उनकी पोती की शादी की बधाई दी। मैं याद नहीं कर पा रही हूं कि क्या इतनी महत्वपूर्ण अनौपचारिक यात्रा की पूर्व जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय को थी या नहीं। 

राघवन और उच्चायोग की टीम को सारी दुनिया की तरह मोदी के ट्वीट से ही इसकी जानकारी मिली, जिसमें उन्होंने लिखा, 'आज दोपहर लाहौर में पीएम नवाज शरीफ से मिलने के लिए उत्सुक हूं, जहां मैं अफगानिस्तान से नई दिल्ली लौटते हुए जाऊंगा।' यह रविवार का दिन था और भारतीय उच्चायोग ने पहला काम यह किया कि उसने अपनी सारी गाड़ियों की ईंधन टंकियों को फुल करवाया, क्योंकि इस्लामाबाद से लाहौर का सफर पांच घंटे का है। 

राघवन और उनकी टीम ने तेज गति से अपना सफर शुरू किया, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि वे लोग समय पर लाहौर हवाई अड्डे तक नहीं पहुंच सकते, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन करने रायविंड जाने का फैसला किया, जहां वह आने वाले थे। मैं याद कर सकती हूं कि रायविंड में खानसामों को निर्देश दिए गए थे कि वे मोदी और उनके साथ आ रहे प्रतिनिधियों के लिए शाकाहारी भोजन तैयार करें। 

अब पीछे मुड़कर देखें, तो यह एक सपने जैसा प्रतीत होता है कि द्विपक्षीय संबंध इतने सहज थे कि एक भारतीय प्रधानमंत्री बिना किसी तैयारी के आ सकते थे। वास्तव में लाहौर हवाई अड्डे पर मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी सुनिश्चित करने के लिए त्वरित व्यवस्था की गई थी। रविवार को छुट्टी थी, फिर भी व्यवस्था की गई थी। उपमहाद्वीप में हमारी किस्मत बहुत खराब है। मोदी के दौरे के तुरंत बाद कट्टरपंथी हरकत में आ गए। 

मोदी की यात्रा के एक हफ्ते बाद एक जिहादी गुट ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया और मुझे याद है कि नवाज शरीफ के वरिष्ठ मंत्री सरताज अजीज ने पुष्टि की थी कि जिहादियों के पास से मिले फोन के नंबर लाहौर के थे। इसने मुझे वर्ष 1999 की शांति यात्रा की याद दिला दी, जब अटल बिहारी वाजपेयी बस यात्रा कर लाहौर पहुंचे थे, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सुधारने का एक शानदार तरीका था। लेकिन जल्द ही जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल की पहाड़ियों में सैन्य ऑपरेशन चलाने का दुस्साहसिक फैसला किया, जिसके कारण दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। 

पाकिस्तान में मलाला
बुधवार को कई बरसों बाद नोबेल विजेता और स्वात की बेटी मलाला यूसुफजई पाकिस्तान के इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ से पीड़ित लोगों का हाल जानने के लिए पाकिस्तान पहुंची हैं, ताकि दुनिया का ध्यान इस ओर जाए। हर किसी को पता है कि तालिबान ने युवा मलाला को गोलियों से निशाना बनाया था, क्योंकि वह लड़कियों की शिक्षा की वकालत कर रही थी। 

यह विडंबना ही है कि मलाला ऐसे समय पाकिस्तान आई हैं, जब उनका गृहनगर स्वात एक बार फिर कट्टरपंथियों के निशाने पर है। अज्ञात बंदूकधारियों ने एक स्कूल वैन पर गोलियां चलाईं, जिसमें चालक की मौत हो गई और दो बच्चे घायल हो गए, इसके एक दिन बाद हजारों प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को स्वात की सड़कों पर उतरकर उग्रवादियों से सुरक्षा की मांग की। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब वहां के बाशिंदों ने इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी को लेकर सरकार को चेताया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed