फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Economy of fifty, hundred and two hundred trillion dollars

50, 100 और 200 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था : आखिर मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं?

Sun, 21 Jul 2019 05:41 AM IST
Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 21 Jul 2019 05:41 AM IST
विज्ञापन
Economy of fifty, hundred and two hundred trillion dollars
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
बजट, 2019-20 पर राज्यसभा में अपनी राय रखते हुए मैंने कहा, 'यदि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की नॉमिनल वृद्धि दर 12 फीसदी हो, तो जीडीपी का आकार हर छह साल में दोगुना हो जाता है। यदि नॉमिनल वृद्धि दर 11 फीसदी हो, तो यह सात साल में दोगुना हो जाएगा।' 

loader
बजट, 2019-20 पर राज्यसभा में अपनी राय रखते हुए मैंने कहा, 'यदि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की नॉमिनल वृद्धि दर 12 फीसदी हो, तो जीडीपी का आकार हर छह साल में दोगुना हो जाता है। यदि नॉमिनल वृद्धि दर 11 फीसदी हो, तो यह सात साल में दोगुना हो जाएगा।' 

मैंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि वह 2024-25 में अर्थव्यवस्था के पचास खरब डॉलर होने के लक्ष्य पर रुके नहीं, बल्कि यह भी उल्लेख करें कि छह या सात साल में अर्थव्यवस्था सौ खरब डॉलर की हो जाएगी और फिर उसके अगले छह या सात वर्षों के बाद यह दो सौ डॉलर की हो जाएगी। (नॉमिनल जीडीपी की गणना वर्तमान मूल्यों के आधार पर होती है, जबकि वास्तविक जीडीपी का आकलन मुद्रास्फीति के साथ समायोजित कर किया जाता है)

मैं पचास खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का मजाक नहीं उड़ा रहा हूं। यह एक व्यावहारिक लक्ष्य है (और इस मील के पत्थर तक पहुंचने पर हमें खुशी होगी), लेकिन यह कोई असाधारण लक्ष्य नहीं है। आखिर मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं?

साधारण गणित

भारतीय अर्थव्यवस्था की नॉमिनल वृद्धि पिछले दस वर्षों से औसतन 12 फीसदी सालाना है। कृपया ध्यान रखें कि यह नॉमिनल वृद्धि है। यदि आप  प्रत्येक वर्ष एक बार 11 या 12 फीसदी को सौ से गुणा करें, तो आपको टेबिल में दिए गए आंकड़े मिलेंगे :

 

                         आधार वर्ष                     11% की दर से       12% की दर से

                          वर्ष                                  100                          100

                          +एक साल                        111                           112

                          +दो साल                       123.21                      125.44

                          +तीन साल                      136.76                     140.49

                          +चार साल                       151.81                      157.35

                          +पांच साल                      168.51                      176.23

                          +छह साल                      187.04                      197.38

                          +सात साल                       207.62

 

बेशक, डॉलर में मापने के लिए विनिमय दर को यथोचित रूप से स्थिर रखना होगा। यदि रुपये-डॉलर की विनिमय दर 70-75 रुपये प्रति डॉलर रही, तो भारतीय अर्थव्यवस्था जो कि 2018-19 में 27.5 खरब डॉलर के स्तर पर है, 2024-25 में पचास खरब डॉलर के स्तर तक पहुंच जाएगी। वास्तव में आर्थिक समीक्षा में अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2024-25 तक जीडीपी का आकार पचास खरब डॉलर का हो जाएगा, और यह माना गया है कि रुपये का अवमूल्यन 75 रुपये प्रति डॉलर तक हो सकता है। लेकिन यहां क्यों रुक गए?

भारत की अर्थव्यवस्था 1991 में 325 अरब डॉलर की थी और 2003-04 में यह दोगुना हो गई, 2008-09 में यह फिर दोगुना हो गई और सितंबर, 2017 में पुनः दोगुना होकर यह 21.2 खरब डॉलर की हो गई। भविष्य में भी जीडीपी हर छह या सात साल में दोगुना हो जाएगी। ऐसा हर मील का पत्थर संतुष्टि की बात होगी, लेकिन यह कोई असाधारण उपलब्धि नहीं है।

महत्वपूर्ण सवाल

सबसे अहम सवाल हैं :

1. हम कितनी जल्दी नॉमिनल वृद्धि दर 11 या 12 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी तक पहुंच सकते हैं ( तब भारत दो अंकों में दस फीसदी की विकास दर हासिल कर लेगा) ?

2. औसत भारतीय की प्रति व्यक्ति सालाना आय में वृद्धि दर क्या होगी?

3. सबसे गरीब दस फीसदी और सबसे अमीर दस फीसदी लोगों के बीच गैरबराबरी बढ़ रही या घट रही है?

हमें इन सवालों के जवाब चाहिए और साथ ही हमें ऐसी नीतियों की जरूरत है, जो कि कम नॉमिनल वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में धीमी वृद्धि और बढ़ती गैरबराबरी जैसे मुद्दों से निपट सके। दुर्भाग्य से वित्त मंत्री ने समष्टि आर्थिक स्थिति की समीक्षा करने और अर्थव्यवस्था के अपने आकलन से परहेज किया। 

इन सवालों में से कुछ के जवाब आर्थिक समीक्षा, 2018-19 में दिए गए हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक उच्च वृद्धि की कुंजी अधिक निजी निवेश में निहित है। कुछ दिनों पूर्व उन्होंने जोर देकर कहा था कि निवेश के लिए सिर्फ घरेलू संसाधन पर्याप्त नहीं हैं और इसीलिए विदेशी निवेश महत्वपूर्ण होगा।

संसाधनों की तलाश

पर्याप्त घरेलू संसाधन न होने को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार के दुखी होने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं। सरकार/सार्वजनिक निवेश को केवल कर राजस्व और सार्वजनिक क्षेत्र के अधिशेष से बाहर किया जा सकता है। इनमें से कर राजस्व दबाव में है। 2018-19 विशेष रूप से निराशाजनक वर्ष था; अभी तक सरकार ने 2019-20 में कर राजस्व के लिए आक्रामक लक्ष्य निर्धारित किए हैं। जाहिर है,मुख्य आर्थिक सलाहकार सरकार के आशावाद से इत्तफाक नहीं रखते।

 
नीचे दी गई टेबल मुख्य आर्थिक सलाहकार की चिंताओं को जायज ठहराती है

   
  बजट अनुमान  2018-19  संशोधित वृद्धि दर वास्तविक बजट अनुमान  साल-दर-साल वृद्धि दर  2019-20 बजट अनुमान साल-दर-साल वृद्धि दर
आयकर 529,000  529,000   461,654  7.16  569,000  23.25
केंद्रीय उत्पाद  259,600 259,612  259,612  0.06 300,000  15.55
सीमा शुल्क 112,500  130,038  117,930  -8.60 155,904 32.20
 
जीसटी   743,900 643,900 457,535   3.38 663,343 44.98
                                   
 करोड़ रुपए : वृद्धि दर प्रतिशत में

यदि महत्वाकांक्षी कर राजस्व की प्राप्ति नहीं हुई, तो सरकार के कुल राजस्व के साथ ही पूंजीगत व्यय दबाव में आ जाएगा, जैसा कि 2018-19 में हुआ जब सरकार ने कर राजस्व के 1,67,455 करोड़ रुपये 'गंवा' दिए और उसके पूंजीगत व्यय को नुकसान हुआ। मुख्य आर्थिक सलाहकार सही हैं। बड़े निवेश की अनुपस्थिति में 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि दर सात फीसदी होगी। इसलिए जीडीपी की मुद्रास्फीति-समायोजित सात या आठ फीसदी की विकास दर के बारे में आधिकारिक दस्तावेजों में अस्पष्टता है!
 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed