फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   E-learning beyond class room

शिक्षा के पारंपरिक चौखटे से बाहर

Wed, 09 Oct 2013 07:03 PM IST
कृपाशंकर चौबे
कृपाशंकर चौबे Updated Wed, 09 Oct 2013 07:03 PM IST
विज्ञापन
E-learning beyond class room

हमारे देश में शिक्षा के क्षेत्र में युगांतकारी परिवर्तन आने जा रहा है और वह इंटरनेट की उंगली पकड़कर आ रहा है। इंटरनेट का मूल स्वभाव सामाजिक है और जो सामाजिक है, वह सभी के लिए है। इंटरनेट की अनगिनत सुविधाओं में एक है, ई-शिक्षा। संप्रति ई-शिक्षा ने सभी के लिए ज्ञान-मीमांसा की खोज को नया आयाम देने की ओर तेजी से कदम बढ़ाया है। स्कूल-कॉलेज में दाखिले के लिए लंबी कतार लगाने के बाद भी जब प्रवेश सूची में नाम न आए, तो छात्रों को कुंठित होने की जरूरत नहीं है। वैसे विद्यार्थियों के लिए ई-लर्निंग साइट्स ने अब ज्ञानार्जन के नए द्वार खोल दिए हैं। विद्यार्थी घर में ही इंटरनेट से जुड़े अपने कंप्यूटर के सामने बैठकर, ई-लर्निंग साइट खोलकर कुछ भी सीख सकते हैं। इस तरह की एक प्रमुख ई-लर्निंग साइट है-कोर्स एरा।

विज्ञापन


पिछले साल से ही ई-शिक्षा प्रदान करने में जुटी यह साइट विश्व के करीब अस्सी विश्वविद्यालयों में चल रहे स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के ऑनलाइन पाठ्यक्रम की शिक्षा देती है और पाठ्यक्रम पूरा होने और ई-परीक्षा लेने के उपरांत संबद्ध विश्वविद्यालय की डिग्री भी देती है। सितंबर, 2013 तक यह साइट करीब 47 लाख शिक्षार्थियों को लाभान्वित कर चुकी है।
विज्ञापन


कतिपय ऐसी साइट्स भी हैं, जो मुफ्त में सिर्फ पढ़ाती हैं। इस तरह की एक प्रमुख साइट है-खान अकादमी। यहां सीखने के लिए अनेक विषयों के मुफ्त वीडियो पाठ उपलब्ध हैं। गणित जैसे शुष्क विषय को सीखने के लिए यहां इतने दिलचस्प वीडियो पाठ हैं, जिनके जरिये कोई छात्र बड़ी सहजता से गणित सीख सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


खान अकादमी की शुरुआत का श्रेय एमआईटी के स्नातक तथा हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए करनेवाले सलमान खान को जाता है। नौ साल पहले उनकी भतीजी नाडिया को गणित में मुश्किल आने लगी, तो उसने चाचा से गणित समझाने को कहा। चूंकि चाचा और भतीजी अलग-अलग जगहों पर रहते थे, इसलिए सलमान खान ने गणित समझाने के लिए याहू मैसेंजर तथा नोटपैड का सहारा लिया। नाडिया को उससे बहुत लाभ हुआ। उसके बाद सलमान खान के दूसरे संबंधियों ने भी उनसे इसी तरह कुछ विषयों को समझाने का अनुरोध किया। उन्होंने अलग-अलग विषयों के विभिन्न वीडियो पाठ बनाकर यू ट्यूब में डालना शुरू किया, तो वे विस्मयकारी ढंग से जनप्रिय होने लगे। तब सलमान खान को लगा कि उन्हें कनेक्टिव कैपिटल मैनेजमेंट में हेगड़े फंड एनलिस्ट की सुरक्षित नौकरी छोड़कर स्वयं को पूरी तरह खान अकादमी में नियोजित कर देना चाहिए।

इस तरह की साइट्स ने ट्यूशन की अवधारणा को पीछे छोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल देश के उन राज्यों में से है, जहां बगैर प्राइवेट ट्यूशन के शिक्षा पूरी ही नहीं हो सकती। सामान्य घरों के स्कूली बच्चों को भी वहां ट्यूशन पढ़ने के लिए मारे-मारे फिरते देखा जा सकता है। ऐसे एक प्रांत में मुफ्त में शिक्षा देने वाली इंटरनेट साइट्स का महत्व यकीनन बहुत बढ़ जाता है। इससे उन छात्रों को लाभ हो रहा है, जो समाज के निचले स्तर से आते हैं।

इस तरह की साइट्स ने हमें यह दृष्टि दी है कि शिक्षा की पारंपरिक पद्धतियों के साथ उत्तरोत्तर आधुनिक तकनीक का समन्वय अब अपरिहार्य है, क्योंकि सिर्फ पारंपरिक शिक्षा पर टिके रहने से कई नई चीजें छूट जाएंगी और वह शिक्षा भी एकांगी होकर रह जाएगी। इसलिए विद्यार्थियों को इंटरनेट से ज्ञान प्राप्ति के द्रुत गति से विकसित हो रहे नए साधनों का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। एक अग्रगामी, गतिशील और उत्तरोत्तर आधुनिक शिक्षा पद्धति का मार्ग तभी प्रशस्त होगा।


ई-शिक्षा का लाभ उठाकर विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज की चारदीवारी के बंधन से मुक्त हो सकेंगे, खुले मन और खुले ढंग से चीजों को देख सकेंगे तथा उनका विश्लेषण कर सकेंगे। लेकिन विडंबना यह है कि ऐसे साइट्स का लाभ उठाने के लिए जो बुनियादी ढांचा होना चाहिए, वह कई राज्यों में अब भी पूरी तरह नहीं है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तो ई-शिक्षा चमत्कार कर सकती है, लेकिन इसके लिए इंटरनेट युक्त कंप्यूटर के साथ-साथ बिजली की मौजूदगी भी जरूर होनी चाहिए। अगर सरकारें इस दिशा में ठान लें, तो देश में शिक्षा का परिदृश्य बदलने में देर नही लगेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed