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मंडेला का सपना शेष है

Thu, 12 Dec 2013 02:09 PM IST
एंड्रयू रॉस सॉरकिन
एंड्रयू रॉस सॉरकिन Updated Thu, 12 Dec 2013 02:09 PM IST
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dream of mandela

जब आप नेल्सन मंडेला के बारे में सोचते हैं, तो संभवतः आप स्वतंत्रता के बारे में सोचते हैं-स्वतंत्र लोग, स्वतंत्र देश, स्वतंत्र आवाज। मंडेला की असाधारण विरासत को जिस चीज ने कमजोर किया, वह था, उनका मुक्त बाजार एवं मुक्त अर्थव्यवस्था को समर्थन।

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मंडेला को जब 1990 में जेल से रिहा किया गया, तो उन्होंने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) के अपने अनुयायियों से कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका के मुख्य व्यवसाय के राष्ट्रीयकरण में विश्वास करते हैं। उन्होंने उस समय कहा था, 'खनन, बैंक एवं एकाधिकार वाले उद्योगों का राष्ट्रीयकरण एएनसी की नीति है और हमारी इन नीतियों में कोई भी बदलाव कल्पनातीत है।' हालांकि, दो वर्ष बाद ही मंडेला ने अपना विचार बदला, पूंजीवाद को गले लगाया और अपने देश के लिए एक नई आर्थिक नीति की घोषणा की।
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मंडेला के आर्थिक विचार के विकास की कहानी आंखें खोलने वाली हैः यह सब हुआ जनवरी, 1992 में दावोस की एक यात्रा के दौरान, जब वह विश्व आर्थिक मंच की एक वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए गए थे। एक के बाद एक कई वैश्विक नेताओं से बातचीत के बाद मंडेला दक्षिण अफ्रीका के लिए पूंजीवाद एवं भूमंडलीकरण पर आधारित एक आर्थिक ढांचे पर राजी हो गए। मंडेला ने अपने दोस्त और मंडेलाः द ऑथराइज्ड बायोग्राफी के लेखक एंथनी सैंपसन से कहा, 'उन्होंने मेरी धारणा को पूरी तरह बदल दिया। घर लौटकर मैंने कहा, हमें दो में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा। या तो हम राष्ट्रीयकरण की नीति जारी रखें, लेकिन उससे हमें निवेश नहीं मिलेगा, या हम अपनी नीतियों में बदलाव करें और निवेश हासिल करें।'
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मंडेला की विचारधारा में आए इस त्वरित बदलाव को दक्षिण अफ्रीका में संदेह की नजरों से देखा गया था और लंबे समय तक यह सवाल बना रहा कि क्या पश्चिम द्वारा उन पर देश की अर्थव्यवस्था को मुक्त करने के लिए किसी तरह का दबाव डाला गया था। वैसे मंडेला के साथ दावोस जाने वाले दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर टीटो मोवेनी के अनुसार, मंडेला का हृदय परिवर्तन वास्तविक था।

मोवेनी ने बाद में दक्षिण अफ्रीका के संडे इंडिपेंडेंट को एक पत्र में बताया, हमने एक संक्षिप्त भाषण तैयार किया, जो इस बात पर केंद्रित था कि एएनसी किस तरह अच्छा घर, स्वास्थ्य सेवा, बेहतर शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ पेयजल और अश्वेत व्यवसायी वर्ग के सृजन के जरिये बहुसंख्यक अश्वेत लोगों का सामाजिक कल्याण करना चाहती है।

लेकिन जैसे ही पांच दिवसीय सम्मेलन में उच्च स्तरीय मुलाकातों का दौर शुरू हुआ, मंडेला ने शीघ्र ही फैसला किया कि उन्हें अपनी धारणाओं पर पुनर्विचार की जरूरत है। मोवेनी लिखते हैं- फिर मादिबा (मंडेला का उपनाम) ने चीन एवं वियतनाम के कम्युनिस्ट नेताओं से काफी दिलचस्प मुलाकात की। उन नेताओं ने उन्हें साफ-साफ कहा, 'हम इस समय देश के उद्यमों के निजीकरण एवं हमारी अर्थव्यवस्थाओं में निजी उद्यमियों को आमंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। हम कम्युनिस्ट पार्टी की सरकारें हैं और आप राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के नेता। आप राष्ट्रीयकरण की बात क्यों कर रहे हैं?' मोवेनी बताते हैं-यही वह निर्णायक क्षण था, जिसने उन्हें हमारे आंदोलन के लिए जरूरी इस मुद्दे पर गंभीरता से पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया।

देश के बाजार को मुक्त करने की मंडेला की इस नीति के कारण दक्षिण अफ्रीका ने तेजी से विकास किया और बाहर की बड़ी कंपनियों ने वहां अरबों डॉलर का निवेश किया। मसलन देश के सबसे बड़े इस्पात संयंत्र इस्कॉर को लक्ष्मी मित्तल की कंपनी को बेचा गया। यही नहीं, मंडेला बिल एवं मिलिंडा गेट्स, अधिग्रहण कार्यकारी थ्योडोर जे फोर्स्टमैन, उद्यमी रिचर्ड्स ब्रैनसन आदि के मित्र बन गए, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए अरबों डॉलर का दान दिया।

लेकिन पूंजीवाद एवं मुक्त बाजार को गले लगाने के बावजूद (जैसा कि उनकी जीईएआर नीति-ग्रोथ, इंप्लॉयमेंट ऐंड रिडिस्ट्रीब्यूशन से प्रदर्शित होता है) जो नतीजा निकलता है, वह उनकी सफलता पर सवाल ही ज्यादा खड़े करता है। दक्षिण अफ्रीका ने बेशक विकास किया है, पर उसकी वार्षिक विकास दर 1993 से 2012 के बीच 3.2 फीसदी रही है, जो चीन एवं भारत जैसे उभरते देशों के मुकाबले काफी कम है। जब मंडेला राष्ट्रपति बने थे, तब की तुलना में अमीरों एवं वंचितों के बीच की खाई चौड़ी हुई है। विषमता दक्षिण अफ्रीका की बढ़ती हुई समस्या है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय योजना आयोग ने 1995 में कहा था कि दो डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करने वाले गरीबी रेखा से नीचे के नागरिकों का अनुपात करीब 53 फीसदी है, यह आंकड़ा अधिकतम 58 फीसदी और न्यूनतम 48 फीसदी पर चला गया है।

आधिकारिक बेरोजगारी दर 25 फीसदी के करीब है, जो वास्तव में ज्यादा हो सकती है। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, औसत श्वेत परिवार अश्वेत परिवार के मुकाबले छह गुना अधिक कमाता है। अश्वेत युवाओं के बीच 50 फीसदी के करीब बेरोजगारी है। श्वेत अब भी सभी प्रबंधकीय सेवाओं में तीन चौथाई पदों पर काबिज हैं। नेशनल यूनियन ऑफ मेटलवर्क ऑफ साउथ अफ्रीका के महासचिव इरविन जिम कहते हैं,  संघर्ष के दौरान श्रमिकों ने अच्छी मजदूरी के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन रंगभेदी मजदूरी की खाई अब भी मौजूद है।


मंडेला ने रंगभेद एवं वर्षों की हिंसा को बेशक खत्म किया होगा, लेकिन दक्षिण अफ्रीका को एक ऐसा लोकतांत्रिक एवं मुक्त समाज, जहां सभी सद्भाव एवं समान अवसरों के साथ रहें, बनाने का सपना अभी शेष है, जिसे पूंजीवाद एवं मुक्त बाजार को पूरा करना होगा।

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