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खुदाई करूं या खुद जमींदोज हो जाऊं

Wed, 30 Oct 2013 07:25 PM IST
आसिम अनमोल
आसिम अनमोल Updated Wed, 30 Oct 2013 07:25 PM IST
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Dream of Gold

एक हफ्ते से बीवी अपनी भविष्यवाणी दबाए बैठी थी। जब उससे रहा नहीं गया, तो एक दिन वह मेरे सामने फट पड़ी, तुम्हें तो बड़ा आदमी बनना नहीं है। तुम रहोगे कंगाल के कंगाल ही। लेकिन मैं तुम्हारी तरह फकीर बनकर नहीं रहना चाहती। मैं कितने दिनों से कह रही हूं कि मुझे सोने के कुंडल चाहिए। पड़ोस की सारी औरतों के पास सोने के गहने हैं। मेरे पास एक भी नहीं। फिर सोने के कुंडल के लिए तुम्हें अपना पैसा लगाना भी नहीं पड़ेगा। मैं कितनी बार तुमसे कह चुकी हूं कि अपने घर के पिछवाड़े वाले हिस्से की खुदाई कर डालो। मुझे अपने ख्वाब में वजन लगता है कि हमारे घर में सोना जरूर है। फिर तो हमारे दिन बदल जाएंगे। यह टूटा-फूटा मकान अब खटकता है। मैं शानदार महल के सपने देखती हूं। एक बार नीचे से सोना मिल जाए, तो हमारी तकदीर ही बदल जाए।

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पर मुझे पता चल गया था कि उन्नाव के डौंडिया खेड़ा में इतने दिनों की खुदाई के बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा। सोना कहीं ऐसे हाथ आता है! लेकिन मेरी पत्नी को इससे क्या लेना-देना! फिर भी मैं मासूमियत के साथ बोला, ख्वाब भी कहीं हकीकत में तब्दील होते हैं! उन्नाव में तो सरकार ने खुदाई करवा दी। यहां मैं अकेला घर का पिछवाड़ा कहां तक खोदता फिरूंगा। कहीं किसी को तुम्हारा यह झूठा-मूठा ख्वाब पता चल गया, तो मेरे घर का आंगन छावनी बन जाएगा। इसलिए अपने ख्वाब को ख्वाब समझ कर भूल जाओ।
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लेकिन बीवी टस से मस नहीं हो रही थी। उन्नाव में खुदाई से कुछ न कुछ तो मिला है। ऐसे ही कोई पसीना नहीं बहा देता। ऐसे ही कोई वहां दुकान खोलकर नहीं बैठ गया होगा। जब मिट्टी के बर्तन मिले हैं, लोहे की कीलें मिली हैं, तो सोने के कंगन भी तो मिल सकते हैं!
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मैने बीवी को फिर समझाने की कोशिश की कि सोना-वोना मिलने की बात झूठी है। पहले बताया गया था कि उन्नाव में खुदाई से एक हजार टन सोना मिलेगा। अब सोना न मिलने से खुदाई बंद कराने की बात चल रही है। जल्दी ही वहां तमाम दुकानदारी बंद होने वाली है। कुछ दिनों में लोग डौंडिया खेड़ा को भूलकर चुनाव में लग जाएंगे। नेताओं का क्या है, उनके सामने एक से एक मसले हैं। लेकिन तुम तो मेरी हड्डी-पसली एक करवाने पर तुली हो। तुम्हीं बताओ कि मैं खुदाई करूं या खुद जमींदोज हो जाऊं।

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